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1950 के बाद का सबसे खतरनाक अल नीनो: भारत में मचेगी तबाही! ये महीना है बेहद डरावना

यह 1950 के बाद का सबसे ताकतवर 'अल नीनो' है, जिसने पूरी दुनिया की टेंशन बढ़ा रखी है. क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब के नए ट्रैकर ने जो जानकारी दी है, उससे हर कोई हैरान है.

1950 के बाद का सबसे खतरनाक अल नीनो: भारत में मचेगी तबाही! ये महीना है बेहद डरावना
Image Credit: अल नीनो का भारत पर असर कितना होगा?

सुपर अल नीनो ने दुनिया को डरा रखा है. भारत समेत कई देश इसकी चपेट में हैं. इस बीच एक नए ग्लोबल ट्रैकर ने ऐसा अंदेशा जताया है, जो बेहद डराने वाला है. अंदेशा ये है कि आने वाले 6 महीनों में पड़ने वाली जानलेवा गर्मी के दौरान 3.73 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं. रिपोर्ट का दावा है कि नाइजीरिया के बाद सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ेगा. यहां मार्च तक करीब 55,200 लोग भीषण गर्मी के चलते अपनी जान गंवा सकते हैं.

यह हैरान करने वाला आंकड़ा 'अल नीनो हीट मॉर्टेलिटी ट्रैकर' के जरिए सामने आया है, जिसे यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के एक प्रमुख रिसर्च ग्रुप 'क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब' ने रेडी किया है.

नया ट्रैकर क्या है?

नया ट्रैकर एक टूल है, जो यह अनुमान लगाता है कि 1996 से 2005 के औसत तापमान के मुकाबले भीषण गर्मी की वजह से कितने ज्यादा लोगों की जान जा सकती है. इस मॉडल के मुताबिक, जून 2026 से मार्च 2027 के बीच अत्यधिक गर्मी के चलते दुनिया भर में करीब 8.57 लाख अतिरिक्त मौतें होने की आशंका है.

Super El Nino

इनमें से 4.85 लाख मौतें हो चुकी हैं, जबकि बाकी बची करीब 3.73 लाख मौतों का बड़ा खतरा अभी बना हुआ है. यह अगले 6 महीनों यानी अक्टूबर से मार्च के बीच असर दिखा सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जब तक अल नीनो का प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता, तब तक इस ट्रैकर को हर महीने अपडेट किया जाएगा.

भारत को लेकर क्या हैं अनुमान?

  • अब भारत की बात करते हैं. अक्टूबर से मार्च 2027 के दौरान भारत में गर्मी से जुड़ी बीमारियों के कारण करीब 55,200 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं. सबसे ज्यादा असर मार्च के महीने में दिखने की आशंका है.
  • पूरी दुनिया की बात करें तो नाइजीरिया पर सबसे ज्यादा खतरा है. वहां करीब 56,000 मौतों की आशंका है. इसके बाद भारत और फिर इंडोनेशिया का नाम है, जहां लगभग 29,000 मौतें और ब्राजील में करीब 19,000 मौतों की आशंका है.
  • अगर सिर्फ नाइजीरिया, भारत और ब्राजील को ही मिला लें, तो गर्मी से होने वाली कुल अनुमानित मौतों में से एक-तिहाई से ज्यादा आंकड़ा इन्हीं तीन देशों का होगा. इससे सबसे बड़ा झटका विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) को लग सकता है, क्योंकि यहां न तो अस्पतालों का सिस्टम उतना मजबूत है और न ही भीषण गर्मी से बचने के लिए जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं.

यह सिर्फ अनुमान है, असली आंकड़े नहीं

हालांकि एक बात याद रखने की है. रिसर्चर्स ने साफ कर दिया है कि ये आंकड़े कंप्यूटर मॉडल पर आधारित एक अनुमान (पूर्वानुमान) हैं, असल में दर्ज की गई मौतें नहीं. यह पूरा आकलन मौजूदा तापमान और मौसम के अनुमान को मिलाकर किया गया है. असल आंकड़े इस बात पर डिपेंड करेंगे कि अल नीनो आगे क्या रुख दिखाता है और सरकारें इससे निपटने के लिए जमीन पर कितनी तैयारी करती हैं.

यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के अर्थशास्त्री और लैब के सह-संस्थापक माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा, 'इस रिसर्च का मकसद नए फोरकास्टिंग टूल्स की मदद से यह पहचानना है कि अत्यधिक गर्मी कहां और किन इलाकों में सबसे ज्यादा जान ले सकती है.' रिसर्च का मकसद सिर्फ यह डेटा उपलब्ध कराना है, ताकि अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच और कूलिंग सपोर्ट को सही समय पर मजबूत किया जा सके.

आखिर क्या है अल नीनो?

अब सवाल ये है कि आखिर अल नीनो क्या है और यह इतना खतरनाक क्यों है? तो जान लीजिए कि अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की एक मौसमी घटना है. यह दुनिया भर में हवाओं की दिशा, वायुमंडलीय दबाव और बारिश के पूरे चक्र को बिगाड़ देता है. आमतौर पर यह हर 2 से 7 साल में एक बार आता है और 9 से 12 महीने तक जारी रहता है.

अल नीनो को लेकर आ रहीं रिपोर्ट्स की मानें तो इस साल सितंबर तक समुद्र की सतह इतनी गर्म हो चुकी थी कि अल नीनो के पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं. विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने इसे 1950 के बाद से अब तक का सबसे ताकतवर अल नीनो बताया है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह दिसंबर में अपने पीक पर पहुंचेगा और इसका असर 2027 की शुरुआत तक देखने को मिल सकता है.

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About the Author

Bhoopendra Rai

Bhoopendra Rai

पत्रकारिता में 9 साल से सक्रिय भूपेंद्र कुमार राय Zee News में सीनियर सब एडिटर के तौर पर न्यूज टीम का हिस्सा हैं, देश विदेशी की खबरें कवर करते हैं. 2017 में ETV Bharat (हैदराबाद) से करियर की शुरुआत करने के बाद वे 2020 में Zee News पहुंचे, जहां 2022 तक काम किया. 2023 में News24 की स्पोर्ट्स टीम को लीड करने का मौका मिला. इसके बाद India Daily Live में बतौर चीफ सब एडिटर स्पोर्ट्स टीम के साथ जुड़े. 2024 में दोबारा News24 लौटे और नई स्पोर्ट्स वेबसाइट लॉन्चिंग का अहम हिस्सा रहे. अक्टूबर 2025 में News24 से अलविदा लेकर एक बार फिर Zee News पहुंचे हैं. खेलों में गहरी रुचि रखते हैं और क्रिकेट वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स, ओलंपिक गेम्स, हॉकी वर्ल्ड कप समेत बड़े खेल इवेंट को कवर करने का अनुभव है. ब्रेकिंग न्यूज, क्रिकेट एनालिसिस और किस्से-कहानियों पर अच्छी पकड़ है. जी न्यूज में खेल से जुड़ी खबरों के बाद अब न्यूज टीम के साथ रियलटाइम न्यूज पर काम कर रहे हैं. एक्सप्लेनर और किसी भी मुद्दे पर रिसर्च के साथ उसे आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं. आप Bhoopendra.Rai@zeemedia.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facebook से जुड़ सकते हैं.
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