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कई बार हम लोग एक-दो रुपये को यूं ही छोड़ देते हैं और समझते हैं कि एक-दो रुपये की क्या अहमियत? लेकिन हाल ही में कंज्यूमर कोर्ट ने एक ऐसा आदेश दिया है कि जो भी इस खबर को पढ़ रहा है कम से कम वो तो एक रुपये की अहमियत पर फिर से गौर कर रहा है. केरल में एक शख्स को टिकट रिफंड करते समय भारतीय रेलवे ने एक रुपया कम दिया था. जिसकी शिकायत शख्स ने कंज्यूमर कोर्ट में दर्ज करवाई और फिर जो फैसला आया, वो अपने आप में नजीर बन गया.
मामला केरल के कासरगोड जिले का है. यहां एक शख्स 11 अगस्त 2024 को 533 रुपये का AC थ्री-टियर टिकट बुक किया था. टिकट के तहत शख्स को 20 अगस्त को यात्रा करनी थ. हालांकि, किसी वजह के चलते शख्स ने 17 अगस्त को टिकट कैंसिल कर दिया. टिकट कैंसिल होने के बाद IRCTC ने रिफंड के तौर पर 340 रुपये लौटाए. यात्री का कहना था कि नियमों के हिसाब से उसे 341 रुपये मिलने चाहिए थे. टिकट कैंसिलेशन के लिए 180 रुपये और उस पर 5 फीसदी GST यानी 9 रुपये काटे गए थे. इसके बाद भी रिफंड की रकम में एक रुपये की कमी रह गई.
बस फिर क्या था, शख्स ने तुरंत इसकी शिकायत उपभोक्ता आयोग में दर्ज कराई. यात्री ने शिकायत करते समय कहा कि उसका भरोसा टूटा और इसके बदले में उसे 1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए. साथ ही उसने मुकदमे के खर्च और बकाया एक रुपये की वापसी की मांग भी की. कासरगोड जिला उपभोक्ता आयोग ने IRCTC को उस यात्री को बकाया एक रुपया लौटाने का आदेश दिया. साथ ही सर्विस में दिक्कत के चलते 100 रुपये और मुकदमे के खर्च के तौर पर 3000 रुपये अदा करने को कहा.
यह खबर कई मायनों में अहम है, क्योंकि लगभग हम सभी की रोजमर्रा की जिंदगी में कई बार ऐसा होता है, जब हमें सामने वाले पक्ष की तरफ से एक-दो रुपये कम दे दिए जाते हैं. हम उनकी अहमियत कम समझकर टाल भी देते हैं. लेकिन ग्राहक को मिलने वाली रकम छोटी होने से कंपनी की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो जाती. कंपनी उसके लिए पूरी तरह जिम्मेदार रहेगी.