कश्मीरी पंडितों की दिवाली बनी खास: 16 साल का 'वनवास' खत्म, सुरक्षित आशियानों की चाबी मिलते ही चेहरे खिले
ये फ्लैट्स कश्मीरी कर्मचारियों को तब मिले हैं, जब सुरक्षित छत का सरकारी वादा पूरा होने में सालों की देर हो चुकी है.
घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों का 16 साल लंबा इंतजार अब खत्म हो चुका है. जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (LG) मनोज सिन्हा ने घाटी में काम कर रहे पीएम पैकेज कर्मचारियों को कुल 1,416 नए फ्लैटों का तोहफा दिया है. ये सभी फ्लैट कर्मचारियों को अलॉट भी कर दिए गए हैं. दिवाली से पहले मिले इस तोहफे के चलते कर्मचारियों में खुशी का माहौल है.
एलजी ने श्रीनगर के जेवान में मौके पर जाकर 'ट्रांजिट रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स' में 936 फ्लैटों (39 ब्लॉक) का उद्घाटन किया. इसके अलावा बडगाम के काकन मारन में 12 ब्लॉकों में बने 192 और कुपवाड़ा के कुलांगम बाग में 18 ब्लॉकों में बने 288 फ्लैटों का वर्चुअली उद्घाटन किया, ये सभी फ्लैट कर्मचारियों को आवंटित कर दिए गए हैं.
3,900 कश्मीरी कर्मचारियों को मिला आवास
श्रीनगर, बडगाम और कुपवाड़ा में 1,416 नए फ्लैट मिलने के बाद अब कश्मीर घाटी में तैनात कुल 6,000 'पीएम पैकेज' कर्मचारियों में से करीब 3,900 लोगों को सरकारी घर की सुविधा मिल चुकी है.
16 साल बाद नसीब हुई अपनी छत
सरकार ने पूरी घाटी में ट्रांजिट आवास के लिए 20 जगहें चुनी थीं, लेकिन काम इतना सुस्त रहा कि कर्मचारियों को मजबूरी में किराए के मकानों में दिन काटने पड़े. जिन कर्मचारियों की नौकरी 2010 में शुरू हुई थी, उन्हें अपना घर पाने के लिए करीब 16 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा, वहीं 2017-18 में भर्ती हुए कर्मचारियों को भी आवास के लिए 7 से 8 साल लग गए. अफसरों के मुताबिक इन कॉलोनियों में 24 घंटे बिजली-पानी की पक्की व्यवस्था की गई है. कड़ा सुरक्षा पहरा होगा और किसी भी शिकायत पर तुरंत सुनवाई की जाएगी.
'अपनी छत मिली तो अब कोई गम नहीं'
दशकों के विस्थापन का दर्द झेल रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए ये ट्रांजिट फ्लैट्स अपनी ही मिट्टी पर लौटने की एक नई उम्मीद लेकर आए हैं. कश्मीरी पंडित कर्मचारी आशीष ने कहा, 'मैं बस इतना कहूंगा कि इसका श्रेय सबसे पहले मीडिया जगत को जाता है, जिन्होंने हमारी आवाज उठाई. ऐसा नहीं था कि काम नहीं हो रहा था, लेकिन जिस रफ्तार से काम होना चाहिए था, वह नहीं हो पा रहा था. महीने दर महीने बीतते गए और हम सोचते थे कि हमें अपना घर कब मिलेगा. अब हमारी ये जरूरतें पूरी हो गई हैं और चीजें बेहतर हो रही हैं. भले ही यह एक ट्रांजिट (अस्थायी) आवास ही क्यों न हो, पर कम से कम एक छत तो है. यहां अभी जश्न जैसा माहौल है. जब कोई व्यक्ति नौकरी करता है, तो हमेशा यही चिंता रहती है कि रहने के लिए कोई ऐसी जगह हो जहां वह शांति से रह सके.'
'अब एक साथ रहेगा हमारा समाज'
एक अन्य कश्मीरी पंडित कर्मचारी मनीष धर ने कहा, 'मैं बहुत खुश हूं. सबसे पहले मैं माननीय प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और उपराज्यपाल (एलजी) को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने हमारे 16 साल के वनवास को खत्म कर दिया, जिससे अब हम एक ही जगह पर साथ रह सकेंगे. पिछले 16 सालों से हम किराए के मकानों में रह रहे थे, क्योंकि श्रीनगर में रहने के लिए कोई जगह उपलब्ध नहीं थी. आज पहली बार श्रीनगर में लोगों के लिए आवास बनाए गए हैं, जहां हमारे समुदाय के लोग और मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग भी भाईचारे की भावना के साथ एक साथ रहेंगे. यह बहुत खुशी की बात है.'
'हमने इसके लिए बहुत तपस्या की'
एक कश्मीरी पंडित कर्मचारी प्रिया ने कहा, 'हमने इसके लिए बहुत तपस्या की है, यानी यहां तक पहुंचने के लिए हमने काफी संघर्ष किया है. अब तक हम किराए के मकान में रह रहे थे. ऐसा नहीं है कि वहां हमें कोई परेशानी थी, लेकिन जब पूरा समुदाय एक साथ होता है, तो एक अपनापन महसूस होता है, जो बहुत अच्छा लगता है. हालांकि, वहां के लोगों ने भी हमारे साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया, लेकिन जब हम सब यहां एक साथ होते हैं, तो बहुत अच्छा लगता है. मैं बहुत खुश हूं क्योंकि हम अपना खुद का घर चाहते थे, जहां हम अपने परिवार के साथ अच्छे से रह सकें और उन्हें भी आजादी का एहसास हो. हमारे बच्चों ने पहले ऐसा माहौल नहीं देखा है, इसलिए उनके लिए यह बहुत अच्छी बात है कि हमारे सभी भाई-बहन यहां एक साथ रह रहे हैं. यहां हमारे त्योहार मनाए जाएंगे और बहुत कुछ होगा, जिसका हम सब मिलकर आनंद ले सकेंगे.'
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