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सिर्फ ग्रीन पटाखे, 2 दिन की छूट, सख्त टाइमिंग... SC की इन शर्तों के साथ मनेगी दिल्ली-NCR की दिवाली

दिवाली पर दिल्ली-एनसीआर में पटाखे फूटेंगे या नहीं? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पटाखों को बनाने, बेचने और फोड़ने को लेकर किन नियमों का पालन करना होगा.

सिर्फ ग्रीन पटाखे, 2 दिन की छूट, सख्त टाइमिंग... SC की इन शर्तों के साथ मनेगी दिल्ली-NCR की दिवाली
Image Credit: दिल्ली में सिर्फ QR कोड वाले ग्रीन पटाखे बिकेंगे.

दीपावली पर दिल्ली-एनसीआर में पटाखे फूटेंगे या नहीं? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना रुख साफ कर दिया है. कोर्ट ने पटाखे फोड़ने पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया है. अदालत ने भारी शर्तों के साथ सिर्फ 'ग्रीन पटाखों' को ही मंजूरी दी है. यही नहीं, आतिशबाजी के लिए दिन और समय भी तय कर दिया गया है. इसके अलावा पटाखे बनाने, बेचने और किन इलाकों में बिल्कुल पटाखे नहीं जलेंगे, इसको लेकर भी सख्त नियम बनाए हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि दीपावली के अवसर पर सिर्फ 7 और 8 नवंबर को ही ग्रीन पटाखे जलाए जा सकते हैं. इन दोनों दिनों में सिर्फ 3 घंटे का वक्त ग्रीन पटाखों को फोड़ने के लिए तय किया गया है. अदालत ने तय किया है कि सुबह 6 बजे से 7 बजे तक और रात 8 बजे से 10 बजे तक ही पटाखे जलाए जा सकते हैं. इसके अलावा दिन और रात के किसी भी वक्त पटाखे जलाने की इजाज़त नहीं होगी. 9 नवंबर से पटाखों पर पूरी तरह बैन का आदेश लागू हो जाएगा.

कौन-से पटाखों पर बैन रहेगा?

सिर्फ ग्रीन पटाखों की इजाजत रहेगी, बाकी सभी तरह के पटाखे बनाने, बेचने और फोड़ने की अनुमति नहीं होगी. जिन पटाखों की अनुमति नहीं होगी, उनमें पटाखों की लड़ी (माला), बेरियम वाले पटाखे शामिल हैं. जिन्हें CSIR-NEERI ने ग्रीन पटाखों के रूप में मंजूरी नहीं दी है, उन पर प्रतिबंध रहेगा.

इन जगहों पर ग्रीन पटाखों की भी इजाजत नहीं होगी

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अस्पताल, नर्सिंग होम, सरकारी हेल्थ सेंटर, वृद्धाश्रम, स्कूल-कॉलेज और शांत क्षेत्रों (साइलेंस जोन) के 300 मीटर के दायरे में ग्रीन पटाखे भी नहीं फोड़े जा सकेंगे. इन सभी संवेदनशील इलाकों को 'नो-क्रैकर जोन' घोषित करने और इसकी जानकारी आम जनता तक पहुंचाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही अफसरों को दो-टूक कहा गया है कि इन नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए, ताकि मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों को धुएं या तेज आवाज से किसी तरह की परेशानी न झेलनी पड़े.

कौन बना सकेंगे ग्रीन पटाखे?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिन पटाखा निर्माताओं के पास CSIR-NEERI और PESO द्वारा ग्रीन पटाखों के लिए वैध प्रमाणपत्र है, केवल उन्हीं को ग्रीन पटाखों का निर्माण करने की अनुमति होगी. पटाखों के निर्माण की अनुमति की अवधि 2 नवंबर 2026 से 6 नवंबर 2026 तक होगी.

कैसे पहचाने जाएंगे ग्रीन पटाखे?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि ग्रीन पटाखों के डिब्बे पूरी तरह से सीलबंद होने चाहिए. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ग्रीन पटाखों के डिब्बों में कोई भी बिना अनुमति वाला या सामान्य पारंपरिक पटाखा मिलाया न जा सके. यही नहीं, केवल उन्हीं पटाखों की बिक्री की इजाजत होगी, जिनके डिब्बे पर उस विशेष प्रोडक्ट का अपना QR कोड लगा होगा.

QR कोड स्कैन करने पर पटाखा बनाने वाली कंपनी का नाम, NEERI रजिस्ट्रेशन की जानकारी, PESO/DM के लाइसेंस की जानकारी, पटाखे में इस्तेमाल किए गए पदार्थों की जानकारी और संबंधित पटाखे का टेस्ट सर्टिफिकेट नजर आना चाहिए. QR कोड किसी दूसरे व्यक्ति या उत्पाद को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता. QR कोड की खरीद-बिक्री करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और ऐसा करने पर संबंधित कंपनी का रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस रद्द किया जा सकता है.

दुकानदारों को इन शर्तों का पालन करना होगा

जिन पटाखा व्यापारियों या दुकानदारों के लाइसेंस पहले रद्द कर दिए गए थे, उनके लाइसेंस को अस्थायी रूप से दोबारा बहाल किया जाएगा. यह बहाली 4 नवंबर 2026 से 6 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी, हालांकि कोर्ट ने कुछ शर्तें लगाई हैं, जो नीचे दी गई हैं.

  • दुकानदार केवल CSIR-NEERI से प्रमाणित निर्माताओं से खरीदे गए मंजूर ग्रीन पटाखे ही बेच सकेंगे.
  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन करना होगा.
  • यदि कोई दुकानदार इन निर्देशों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस तुरंत दोबारा रद्द कर दिया जाएगा.
  • ऐसे दुकानदार को शेष अवधि में पटाखे बेचने की अनुमति नहीं होगी.

पुलिस और प्रशासन के लिए SC के निर्देश

  1. दिल्ली-NCR में पटाखे बनाने वाली कंपनियों और पटाखा व्यापारियों को प्रशासन के पास एक बड़ी रकम सिक्योरिटी के रूप में जमा करनी होगी. कितनी रकम जमा करनी है, यह संबंधित अधिकारी तय करेंगे.
  2. अगर कोई कंपनी या दुकानदार सुप्रीम कोर्ट के नियम तोड़ता है, तो उसकी पूरी सिक्योरिटी राशि जब्त कर ली जाएगी.
  3. जिला कलेक्टर और पुलिस अधिकारी मिलकर पटाखे बेचने के लिए जगह तय करेंगे. केवल तय की गई जगहों पर ही ग्रीन पटाखे बेचे जा सकेंगे. तय जगह के अलावा कहीं भी पटाखे बेचना मना होगा.
  4. ऑनलाइन पटाखे बेचना भी पूरी तरह मना है.
  5. सरकार और पुलिस को अवैध और सामान्य पटाखों की सप्लाई रोकनी होगी. दिल्ली-NCR में आने वाले वाहनों की जांच की जाएगी. अगर किसी वाहन में अवैध या सामान्य पटाखे मिलते हैं, तो अधिकारियों को उचित कार्रवाई करनी होगी.
  6. पुलिस को असली और नकली ग्रीन पटाखों की पहचान करना आना चाहिए.
  7. पुलिस और प्रशासन की टीमें दुकानों पर नियमित जांच करेंगी.
  8. अवैध और सामान्य पटाखे मिलने पर उन्हें तुरंत जब्त किया जाएगा.
  9. नियम तोड़ने वाली कंपनियों और दुकानदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी.
  10. पुलिस समय-समय पर पटाखों के QR कोड की जांच करेगी, ताकि पता चल सके कि QR कोड असली है या नकली.

दीपावली पर प्रदूषण की होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि CPCB और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मिलकर दिल्ली-NCR में हवा की गुणवत्ता (AQI) की जांच करेंगे, इसकी रिपोर्ट तीन हिस्सों में तैयार की जाएगी.

  1. दिवाली से पहले की रिपोर्ट: 2 नवंबर से 6 नवंबर 2026 तक. हर दिन हवा कितनी प्रदूषित थी, इसकी रिपोर्ट बनेगी.
  2. दीपावली के दिनों की रिपोर्ट: 7 नवंबर और 8 नवंबर 2026 को. दोनों दिनों के AQI की अलग-अलग रिपोर्ट बनेगी.
  3. दीपावली के बाद की रिपोर्ट: 9 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक. हर दिन के प्रदूषण की रिपोर्ट तैयार होगी.

कोर्ट ने मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर की संबंधित राज्य सरकारों और अधिकारियों को 14 दिसंबर तक नीचे दिए गए पहलुओं पर रिपोर्ट देने के लिए कहा है. 

  • पटाखा निर्माताओं और व्यापारियों से कितनी सिक्योरिटी राशि जमा कराई गई और कितने लोगों ने यह राशि जमा की?
  • ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए कितने स्थान निर्धारित किए गए? अवैध और सामान्य पटाखों की सप्लाई रोकने के लिए क्या कार्रवाई की गई?
  • नियमों का उल्लंघन करने वाले कितने लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई और कितने अवैध पटाखे जब्त हुए?
  • दिल्ली-NCR के सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों से जानकारी लेकर हलफनामा दाखिल करना होगा. इसमें विशेष रूप से बताना होगा:
  • दिवाली के बाद अस्पतालों में कितने मरीज भर्ती हुए?
  • मरीजों की संख्या में कितनी वृद्धि हुई?
  • प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी मामलों में कितनी बढ़ोतरी हुई?
  • 30 नवंबर 2026 तक अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या में हुई वास्तविक वृद्धि कितनी रही.
  • सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी.
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About the Author

Arvind Singh

Arvind Singh

अरविन्द सिंह ज़ी न्यूज़ में सीनियर जर्नलिस्ट हैं. पत्रकारिता में करीब दो दशक का अनुभव है. वह मुख्यत: सुप्रीम कोर्ट की रिपोर्टिंग करते हैं. इसके अलावा देशभर में कोर्ट से आने वाली बड़ी ख़बरों पर भी उनकी नज़र रहती है. कानून की जटिल, तकनीकी खबरों को सरल अंदाज में पेश करना उनकी खासियत है, इन्होंने जामिया यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. 
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