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सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने एक बार फिर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार लद्दाख के लोगों से किए गए अपने वादों से मुकर रही है. सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफॉर्म पर शेयर किए गए एक ताजा वीडियो संदेश के जरिए वांगचुक ने अपनी नाराजगी जाहिर की और बताया कि सरकार ने बातचीत के नाम पर उन्हें दिल्ली बुलाया, लेकिन अब अधिकारी अपनी बात से पीछे हट रहे हैं.
सोनम वांगचुक ने वीडियो में अपनी पूरी व्यथा साझा करते हुए कहा कि पिछले हफ्ते गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बातचीत बेनतीजा रही थी. उस बैठक के बाद अधिकारियों ने संकेत दिया था कि आगे की चर्चा के लिए 22 अक्टूबर को फिर से बैठक होगी. वांगचुक ने आगे कहा, 'इसी भरोसे पर मैंने अपना टिकट बुक करा लिया और दिल्ली स्थित लद्दाख भवन आ रहा था. लेकिन अब अचानक यह कहा जा रहा है कि आज कोई बैठक नहीं होगी. सरकार एक बार फिर अपने वादों से पूरी तरह पीछे हट रही है.' उनका मानना है कि सरकार लद्दाख को 'छठी अनुसूची' के तहत विशेष सुरक्षा देने के अपने शुरुआती वादे से भी मुकर रही है, जिससे वहां के निवासियों में भारी निराशा है.
I’ll be at Ladakh Bhavan Delhi for talks with Home Ministry today but… https://t.co/fdcrdNtZPk
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) October 22, 2026
लद्दाख के संवेदनशील सीमावर्ती इलाके के हालात का जिक्र करते हुए वांगचुक ने बहुत ही भावुक और गंभीर बात कही. उन्होंने कहा कि इस बॉर्डर एरिया के लोग बेहद दुखी और आहत हैं. उन्होंने सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा, 'एक तरफ हम पर चीन का लगातार दबाव रहता है, जो दावा करता है कि लद्दाख चीन का हिस्सा है. इसके बावजूद हमें अपने देश यानी भारत से गहरा लगाव है. लेकिन विडंबना देखिए कि भारत सरकार भी हमारे साथ अच्छा बर्ताव नहीं कर रही है. वे हर वादे से पीछे हट रहे हैं. वे लद्दाख के लोगों को देश के बाकी नागरिकों के समान अधिकार भी नहीं देना चाहते, ताकि लोग लोकतांत्रिक तरीके से वोट के जरिए अपनी आवाज उठा सकें और अपनी आकांक्षाएं पूरी कर सकें.' उन्होंने आरोप लगाया कि लद्दाख की जनता को लोकतंत्र के बुनियादी अधिकारों से भी वंचित रखा जा रहा है.
आपको बता दें कि यह पूरा मामला लद्दाख के राजनीतिक भविष्य और वहां के स्थानीय लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है. पिछले हफ्ते ही लेह में लद्दाख के स्थानीय नेताओं और केंद्रीय गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच एक अहम बैठक हुई थी. इस बैठक में 'लेह एपेक्स बॉडी' (LAB) और 'कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस' (KDA) के नेताओं ने केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव के मसौदे को सिरे से खारिज कर दिया था.
वांगचुक का सीधा आरोप है कि सरकार मई महीने में हुई बैठक के दौरान दिए गए आश्वासनों और वादों से पूरी तरह मुकर गई है. उस वक्त बैठक के बाद नेताओं ने उम्मीद जताई थी कि बातचीत को किसी नतीजे पर पहुंचाने के लिए 22 अक्टूबर को नई दिल्ली में एक और दौर की बैठक होगी, लेकिन लद्दाख के प्रतिनिधियों को इस बार कोई औपचारिक निमंत्रण या सूचना नहीं मिली.
इस पूरे गतिरोध की जड़ में लद्दाख के लिए संवैधानिक सुरक्षा का मुद्दा है. बीते मई महीने में केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच एक अहम दौर की बातचीत हुई थी, जिसमें एक सैद्धांतिक सहमति बनने की बात सामने आई थी. उस समय यह चर्चा थी कि लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश को देश के बाकी राज्यों की तरह विशेष सुरक्षा देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 371A, 371F और 371G की तर्ज पर संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी.
गौरतलब है कि ये विशेष अनुच्छेद देश के अन्य राज्यों जैसे नगालैंड, सिक्किम और मिजोरम को उनकी संस्कृति, जमीन और पहचान बचाने के लिए विशेष अधिकार और सुरक्षा प्रदान करते हैं. लद्दाख के लोग लंबे समय से इसी तर्ज पर अपने क्षेत्र के लिए कानूनी और संवैधानिक गारंटी की मांग कर रहे हैं, ताकि उनकी अनूठी संस्कृति, पर्यावरण और जमीन सुरक्षित रह सके. लेकिन वांगचुक और अन्य स्थानीय नेताओं का कहना है कि सरकार अब इन बुनियादी गारंटियों से पीछे हट रही है, जिससे सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है.