'SIR' पर महासंग्राम: दिल्ली से मुंबई तक भड़का विपक्ष, जानिए CEC से लेकर PM मोदी के इस्तीफे तक क्यों पहुंची बात
वोटर लिस्ट के 'SIR' सर्वे को लोकतंत्र पर हमला बताकर कांग्रेस ने सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त और पीएम मोदी का इस्तीफा मांग लिया है. 29 सितंबर को दिल्ली में CWC की बैठक के बाद 30 सितंबर को होने वाली INDIA गठबंधन की महाबैठक और मुंबई का आंदोलन सरकार की मुश्किलें बढ़ा देगा? आइए जानते हैं पूरा मसला आखिर क्या है..
चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है. कांग्रेस ने वोटर लिस्ट के 'SIR' सर्वे को लोकतंत्र पर सीधा हमला और 'वोटबंदी' करार देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग कर डाली है. दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति की ढाई घंटे चली मैराथन बैठक के बाद अब सबकी नजरें कल होने वाली INDIA गठबंधन की महाबैठक और मुंबई में जमीन पर उतरने जा रहे बड़े आंदोलन पर टिकी हैं.
भ्रष्टाचार देश की अर्थव्यवस्था, शासन व्यवस्था और आम लोगों को अंदर से खोखला करके कमजोर करता है. वहीं चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर अविश्वास से देश का लोकतंत्र कमजोर होता है. दुर्भाग्य की बात ये है कि सरकार और विपक्ष की लड़ाई में चुनाव आयोग अब सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है. जो चुनाव आयोग न पक्ष का होता है, न विपक्ष का.. वो इस समय राजनीतिक लड़ाई के केंद्र में है.
दिल्ली से मुंबई तक आर-पार की तैयारी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली से मुंबई तक आंदोलन की बड़ी तैयारी चल रही है. दिल्ली में आज इस आंदोलन की तैयारी के लिए कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक हुई और कल INDIA गठबंधन की बैठक होने वाली है. वहीं मुंबई में 2 अक्टूबर से कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन शुरू होने वाला है, जिसे कई राजनीतिक दलों का भी समर्थन हासिल है. मुंबई में होने वाले आंदोलन से पहले आपको जानना चाहिए, आज दिल्ली में क्या हुआ.
'नोटबंदी के बाद अब वोटबंदी'
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ रणनीति बनाने और SIR की प्रक्रिया का विरोध करने के लिए आज दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई. कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में आयोजित इस बैठक में पार्टी के 68 दिग्गज नेता शामिल हुए. कांग्रेस ने इस बैठक के दौरान SIR की प्रक्रिया को वोटबंदी का नाम दिया. आरोप लगाया कि 10 साल पहले नोटबंदी करके अर्थव्यवस्था को बर्बाद किया गया और अब वोटबंदी करके लोकतंत्र को खत्म किया जा रहा है.
ढाई घंटे की बैठक के बाद कांग्रेस की 4 बड़ी मांगें
ढाई घंटे तक चली इस मीटिंग के बाद कांग्रेस ने 4 मांगें कीं. कांग्रेस की यह चार मांगें बता रही हैं कि जो बात CEC के इस्तीफे की मांग से शुरू हुई थी, वो अब PM के इस्तीफे की मांग तक पहुंच गई है.
पहली मांग: CEC को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए. उन्हें एक दिन भी अपने पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है.
दूसरी मांग: SIR को तत्काल रोका जाए.
तीसरी मांग: SIR प्रक्रिया के दौरान वोटर लिस्ट से मतदाताओं के हटाए गए नामों को लेकर है. कांग्रेस ने हटाए गए नामों को फिर से वोटर लिस्ट में जोड़ने को कहा है.
चौथी मांग: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए.
SIR में अब तक कितनों के नाम कटे?
कांग्रेस जिस SIR की प्रक्रिया को रोकने की मांग कर रही है, वो पिछले एक साल से ज्यादा समय से चल रही है. बिहार चुनाव से पहले इसकी शुरुआत हुई थी. पहले 2 चरणों में अब तक कुल 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का काम पूरा हो चुका है. वहीं तीसरे चरण में 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का काम जारी है. SIR के दौरान इन राज्यों में 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं जो कुल मतदाताओं का लगभग 15% है.
नाम हटाने पर चुनाव आयोग की 4 वजहें
चुनाव आयोग के मुताबिक 4 कारणों से मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं.
- अपने पते पर मतदाता की गैर-मौजूदगी.
- घर का पता बदलना.
- किसी वोटर का निधन होना.
- डुप्लीकेट एंट्री यानी एक से ज्यादा जगहों पर नाम होना.
यानी चुनाव आयोग ने मतदाताओं का नाम वोटर लिस्ट से हटाने की वजह बताई है, लेकिन कांग्रेस को इस पर भरोसा नहीं है. BJP ने इसी को आधार बनाकर कांग्रेस पर सवाल उठाए.
कल INDIA गठबंधन की 8वीं बैठक, पर कई बड़े चेहरे नदारद
चुनाव आयोग और SIR को लेकर जारी विवाद के बीच कल दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक भी होने वाली है. पिछले 3 सालों के दौरान गठबंधन की ये आठवीं बैठक है, लेकिन जो अलायंस विपक्षी दलों को एकजुट कर BJP को सत्ता से हटाने के लिए बना था, उसके एजेंडे में अब चुनाव आयोग और SIR सबसे ऊपर है. इस साल 8 जून को हुई बैठक में भी सबसे बड़ा मुद्दा SIR ही था, लेकिन कल होने वाली बैठक में कई पार्टियां और बड़े नेता शामिल नहीं होंगे.
आम आदमी पार्टी: साफ किया है कि वो इस बैठक में शामिल नहीं होगी. हालांकि संसद में वो मुख्य चुनाव आयुक्त का विरोध करेगी.
डीएमके (DMK): पहले ही INDIA गठबंधन से दूरी बना चुकी है और पिछली बैठक में भी शामिल नहीं हुई थी.
सपा (सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव): पहले से तय कार्यक्रम का हवाला देकर इस मीटिंग में नहीं आ रहे, हालांकि उनकी पार्टी के प्रतिनिधि शामिल होंगे.
क्या CEC के खिलाफ महाभियोग लाएगा विपक्ष?
INDIA गठबंधन की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद पर चर्चा होगी. साथ ही SIR को लेकर भी रणनीति तैयार की जाएगी. कुछ दिन पहले मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष की तरफ से महाभियोग का प्रस्ताव लाने की खबर आई थी. इस पर भी INDIA गठबंधन की पार्टियां मंथन करेंगी.
मुंबई में 2 अक्टूबर से शिवाजी पार्क में जेल भरो आंदोलन
एक तरफ दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR के खिलाफ रणनीति बनाई जा रही है, दूसरी तरफ मुंबई में भी चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन होने वाला है.
CJP ने 2 अक्टूबर से मुंबई के शिवाजी पार्क में जेल भरो आंदोलन का एलान किया है. CJP की मांग भी वही है जो कांग्रेस की है, यानी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और SIR पर रोक. CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया था. मांग नहीं माने जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी थी, जो आंदोलन अब 2 दिन बाद मुंबई से शुरू होने वाला है. यानी दिल्ली में कांग्रेस रणनीति बना रही है तो मुंबई में CJP.
उद्धव और राज ठाकरे एक मंच पर
खास बात ये है कि इस आंदोलन में CJP को ठाकरे बंधुओं का भी समर्थन मिल रहा है. आज उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने CJP के आंदोलन में शामिल होने की घोषणा की. साथ ही 4 अक्टूबर को इस मुद्दे पर एक विशाल मार्च निकालने का भी एलान किया. अपनी इस तैयारी में उद्धव ठाकरे इतने व्यस्त हैं कि वो INDIA गठबंधन की बैठक के लिए दिल्ली नहीं जाएंगे, बल्कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक से जुड़ेंगे. यानी उद्धव ठाकरे कांग्रेस के साथ भी हैं और CJP के साथ भी.
क्रेडिट की होड़: राहुल गांधी बनाम अभिजीत दीपके
कांग्रेस का दावा है कि राहुल गांधी ने ही चुनाव आयोग से जुड़े विवाद को लगातार सबूतों के साथ उठाया. आज कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में इसके लिए राहुल गांधी को बधाई भी दी गई, लेकिन चुनाव आयुक्तों में मतभेद की खबर आने के साथ ही CJP ने भी मोर्चा खोल दिया था. इस मुद्दे पर अभिजीत दीपके भी पीछे नहीं रहना चाहते. दिल्ली में पेपर लीक आंदोलन के समय से ही सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के मामले में कांग्रेस और CJP के बीच एक मुकाबला चल रहा है.
अब चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन में भी यही हो रहा है. राहुल गांधी छात्रों के आंदोलन का पूरा क्रेडिट CJP को नहीं देना चाहते थे. अब अभिजीत दीपके चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन का क्रेडिट अकेले राहुल गांधी को नहीं देना चाहते. इन सबके बीच सवाल चुनाव आयोग की साख का भी है. जब रेफरी पर लगातार सवाल उठेंगे तो मैच का नतीजा नहीं, बल्कि पूरा खेल खराब होता है. इसलिए चुनाव आयोग की साख बचाना सरकार और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है.