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  • /किस सॉफ्टवेयर का SIR में हुआ इस्तेमाल, RTI में भी नहीं खुल पाएंगी परतें; ECI ने क्या कहा?

किस सॉफ्टवेयर का SIR में हुआ इस्तेमाल, RTI में भी नहीं खुल पाएंगी परतें; ECI ने क्या कहा?

चुनाव आयोग ने एक आरटीआई आवेदक को जवाब देते हुए बताया कि SIR में इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर और उसके वर्जन की जानकारी सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर है. चुनाव आयोग ने नियमों का हवाला देते हुए सॉफ्टवेयर और उसके वर्जन की जानकारी साझा करने से इनकार किया है.

Written Byabhinav tripathi
Published: Oct 25, 2026, 11:12 AM IST|Updated: Oct 25, 2026, 11:21 AM IST
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किस सॉफ्टवेयर का SIR में हुआ इस्तेमाल, RTI में भी नहीं खुल पाएंगी परतें; ECI ने क्या कहा?
Image Credit: एसआईआर में किस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया, उसकी जानकारी RTI के दायरे से बाहर. (फोटो- एआई)

About the Author

abhinav tripathi

abhinav tripathi

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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Election Commission on SIR: विपक्ष की ओर से 'विशेष गहन पुनरीक्षण' यानी SIR पर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं. इस बीच चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन बताने से इनकार किया और इस जानकारी को आरटीआई के दायरे से बाहर रखने का हवाला दिया. चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि यह व्यावसायिक गोपनीयता, ट्रेड सीक्रेट और बौद्धिक संपदा का मामला है. यही कारण है कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत इस जानकारी को साझा नहीं किया जा सकता है.

दरअसल, एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पिछले कुछ महीनों से विपक्ष के निशाने पर है. आयोग ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर न बनाया गया है और न ही बाहर से खरीदा गया है. EC ने दावा किया कि वोटर लिस्ट में किसी का नाम जोड़ने या हटाने का फैसला निर्वाचक निबंधन अधिकारी करते हैं. यह फैसला पूरी तरीके से तथ्यों और रिकॉर्ड्स पर आधारित है.

अब जानिए पूरा मामला

तेलंगाना के करीमनगर निवासी सामाजिक कार्यकर्ता एम.ए. मुजीब अय्यूब ने हाल में ही चुनाव आयोग से उस सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी मांगी थी, जिसका इस्तेमाल एसआईआर प्रक्रिया के लिए किया जा रहा है. इसी RTI आवेदन के संदर्भ में आयोग की ओर से यह स्पष्टीकरण सामने आया है. बता दें कि आवेदनकर्ता ने मतदाता डेटा में गलतियों या विसंगतियों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन जानने की इच्छा व्यक्त की थी. हालांकि, इस जानकारी को साझा करने से इनकार कर दिया गया.

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

आरटीआई आवेदन के दौरान सॉफ्टवेयर के नाम वाले पहले सवाल पर आयोग ने आईटीआई कानून की धारा 8(1)(d) का हवाला दिया. इसका सीधा मतलब है कि किसी तीसरे के पक्ष के ट्रेड सीक्रेट और व्यावसायिक जानकारी न देने की छूट होती है. इसके साथ ही एआई और सिस्टम से जुड़े अन्य सवालों पर आयोग ने कहा कि आवेदक स्पष्टीकरण मांग रहे हैं, ऐसे में कानून की धारा 2(f) के तहत स्पष्टीकरण मांगना 'सूचना' के दायरे में नहीं आता है.

इस पूरे मामले पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने अपनी बात रखी है. उनका कहना है कि RTI कार्यकर्ता को इसके खिलाफ अपील करनी चाहिए. उन्होंने यहां तक कहा कि यह एक कानूनी मामला है. चुनाव आयोग जवाब देने से बच रहा है ऐसे में आवोदक को सक्षम अधिकारी के सामने अपील करनी चाहिए.

एसआईआर पर मचा है बवाल

गौरतलब है कि इस समय एसआईआर प्रक्रिया को लेकर देश में सियासत हाई है. देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस समय विपक्षी दलों के निशाने पर हैं. दावा है कि एसआईआर के तहत देश भर से 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए गए हैं. विपक्ष का कहना है कि ऐसा करते धांधली की जा रही है, लेकिन आयोग की ओर से कहा गया कि नाम केवल उनके ही हटे हैं, जो दो जगहों पर पंजीकृत थे, या किसी दूसरी जगह पर चले गए या किसी की मृत्यु हो गई. 

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