मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपनी कैबिनेट विस्तार को लेकर अहम जानकारी मीडिया से साझा की है. अब्दुल्ला ने बताया कि उन्होंने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से अगले हफ्ते मंत्रिपरिषद के विस्तार के लिए समय तय करने की अपील की है. एलजी से मुलाकात के बाद अब्दुल्ला ने कहा कि मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई. जैसे ही वहां से हरी झंडी मिलेगी, कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. अब्दुल्ला ने बताया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के साथ विचार-विमर्श के बाद मंत्रियों की सूची पहले ही अंतिम रूप दे दी गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रिमंडल में किसे शामिल किया जाएगा, इस पर फैसला हो चुका है.
पार्टी के सहयोगियों और मंत्री पद के दावेदारों को सलाह देते हुए अब्दुल्ला ने कहा, 'फारूक साहब के दरवाजे, मेरे दरवाजे या किसी और के दरवाजे खटखटाने की कोई जरूरत नहीं है. कृपया धैर्य रखें. जिसकी किस्मत में जो होगा, उसे वह मिल जाएगा. पहले अल्लाह तय करते हैं, फिर हम तय करते हैं. कृपया व्हाट्सऐप मैसेज न भेजें, फोन न करें और न ही लंबे बायोडाटा भेजें. मैं पहले से ही सभी को जानता हूं. जो भी होना है, वह अगले दो-तीन दिनों में हो जाएगा.'
अब्दुल्ला ने सऊदी अरब में फंसे जम्मू-कश्मीर और दूसरे राज्यों के लोगों का मुद्दा भी उठाया. उड़ानें रद्द होने के कारण ये लोग वहां फंस गए हैं. उन्होंने कहा कि हवाई टिकटों की कीमतें काफी बढ़ गई हैं. ऐसे में उन लोगों के लिए वापसी का टिकट खरीदना मुश्किल हो रहा है, जिन्होंने कम किराये वाली एयरलाइंस में पहले से बुकिंग कराई थी. उन्होंने बताया कि इस मामले को उनकी सरकार ने विदेश मंत्रालय के सामने उठाया है.
चीन सीमा और लद्दाख से जुड़े सवाल पर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि लद्दाख के जम्मू-कश्मीर से अलग होने के बाद ये मामला अब केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. इस मुद्दे पर लद्दाख के उपराज्यपाल या केंद्र सरकार से बात की जानी चाहिए, क्योंकि अब इसमें जम्मू-कश्मीर की कोई भूमिका नहीं है.'
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने यह भी बताया कि उपराज्यपाल कुछ दिन पहले ही श्रीनगर लौटे थे और इस दौरान उनकी तबीयत भी थोड़ी खराब हो गई थी. इसलिए, बैठक में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के साथ उन्होंने उनके स्वास्थ्य लाभ की जानकारी लेते हुए हालचाल भी जाना.