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SIR पर घमासानः पता बदलने पर वोटर की टली आफत, फॉर्म-6 से मिली राहत; बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

एक जगह से दूसरी जगह पर शिफ्ट होने वाले मतदाताओं को 'फॉर्म-6' या 'एन्यूमरेशन फॉर्म' से मुक्ति मिल गई है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि स्थान परिवर्तित करने वाले मतदाताओं को फॉर्म-6 भरने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है.

Written By K. Raj Mishra
Published: Nov 06, 2026, 01:29 PM IST | Updated: Nov 06, 2026, 02:09 PM IST
Image Credit: SIR पर बॉम्बे हाईकोर्ट का बड़ा फैसला (File Photo- ANI)
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वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मचे सियासी घमासान के बीच बॉम्बे हाई कोर्ट ने फॉर्म-6 को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. हाइकोर्ट ने गोवा SIR पर सुनवाई करते हुए कहा कि अपने एक जगह से दूसरी जगह पर शिफ्ट होने वाले मतदाताओं (वोटर्स) को फॉर्म-6 भरने की जरूरत नहीं है. अदालत ने साफ कहा कि स्थान बदलने वाले मतदाता को केवल 'फॉर्म 8' भरना चाहिए. ऐसे मतदाताओं को 'फॉर्म-6' या 'एन्यूमरेशन फॉर्म' (पहले से भरा हुआ विवरण फॉर्म) भरने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है. कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा किया जा रहा है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ मुकदमा भी चलाया जा सकता है.

हाई कोर्ट ने फॉर्म-6 को समझाया

जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित जमसांडेकर की खंडपीठ ने कहा कि 'फॉर्म 6' और 'एन्यूमरेशन फॉर्म' के साथ कुछ खास घोषणाएं जुड़ी होती हैं. नए मतदाताओं को वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने के लिए 'फॉर्म 6' भरना होता है. इस फॉर्म को भरते वक्त वे यह घोषणा करते हैं कि उनका नाम पहले से किसी मतदाता सूची में नहीं है और वह पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए आवेदन कर रहे हैं. 

स्थान बदलने के लिए 'फॉर्म-8' आवश्यक

वहीं, 'एन्यूमरेशन फॉर्म' में मतदाता यह बताता है कि वह उसी पते पर रह रहा है, जो पहले से दर्ज है. पीठ ने कहा कि दूसरी जगह पर शिफ्ट हुए वोटरों को 'फॉर्म-8' भरकर जानकारी देनी होती है. कोर्ट ने कहा कि नए वोटर और दूसरी जगह पर शिफ्ट हुए वोटर में अंतर होता है, इसलिए उनकी घोषणाओं में भी अंतर होता है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अगर कोई वोटर अपना पता बदलने के लिए आवेदन कर रहा है, तो उसको 'फॉर्म-8' भरना होगा. उनका नाम पहले से ही मतदाता सूची में मौजूद है और उन्होंने केवल अपना निवास स्थान बदला है.

सालगांवकर परिवार के 6 सदस्यों का दर्ज होगा नाम

इसी के साथ कोर्ट ने चुनाव आयोग को सालगांवकर परिवार के उन 6 सदस्यों के नाम फिर से बहाल करने का आदेश दिया, जिन्हें हाल ही में गोवा में पूरी हुई SIR प्रक्रिया के दौरान हटा दिया गया था. बता दें कि गोवा के सांताक्रूज विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले परेश वसंत सालगांवकर और उनके परिवार के पांच अन्य सदस्यों ने अपना स्थान बदला था. बीएलओ के निर्देश पर सभी 6 सदस्यों ने पता बदलने के लिए फॉर्म-8 जमा किया था. 

इसके बावजूद SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची में सभी 6 सदस्यों के नाम नहीं मिले. इस पर ERO ने कहा कि दावा-आपत्ति दर्ज कराने की समयसीमा समाप्त होने के बाद फॉर्म-8 जमा किया गया था. वहीं, चुनाव आयोग ने उन्हें फॉर्म-6 भरने की सलाह दी थी. इसके विरोध में सभी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. कोर्ट ने 10 दिन के अंदर सभी के नाम वापस दर्ज करने का आदेश दिया है.

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About the Author

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
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