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Shashi Tharoor On BRICS Summit: नई दिल्ली में 12-13 सितंबर 2026 को BRICS शिखर सम्मेलन का आयोजन हो रहा है. इसकी लेकर राजधानी में प्रतिनिधिमंडल के स्वागत से लेकर उनके ठहरने की व्यवस्था और ट्रैफिक नियमों की पूरी तैयारी की जा चुकी है. इस बीच शिखर सम्मेलन को लेकर वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने सवाल उठाया, जिसका जवाब देते हुए शशि थरूर ने नया विवाद खड़ा कर दिया है.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने गुरुवार ( 10 सितंबर 2026) को BRICS के फायदों पर संदेह जताया. वहीं, उनकी ही पार्टी के नेता और सांसद शशि थरूर ने भारत की कूटनीतिक ताकत की तारीफ की.
चिदंबरम ने BRICS पर बात करते हुए कहा था,' मुझे नहीं पता कि कितने राष्ट्रपति और कितने प्रधानमंत्री आ रहे हैं. मुझे नहीं लगता कि पिछले 2-3 BRICS शिखर सम्मेलनों से कोई ठोस फायदा या ठोस नतीजा निकला है.' उनके इस बयान पर भाजपा ने तीखा हमला करते हुए चिदंबरम को नाराज फूफा वाले लोगों में से एक बताया, जो भारत की तरक्की नहीं पचा पाते. वहीं, शशि थरूर ने BRICS को ग्लोबल एशिया के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया और इसके महत्व पर जोर दिया.
थरूर ने BRICS की अहमियत को लेकर कहा,' सबसे पहले हम ग्लोबल साउथ के लिए एक अहम प्लेटफॉर्म दे रहे हैं. आप जानते हैं कि ग्लोबल साउथ में 100 से अधिक देश हैं, लेकिन यहां हमारे पास ग्लोबल साउथ के 11 मुख्य देश हैं, जो मिलकर विचारों की विविधता और उन देशों की रेंज का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनकी अध्यक्षता हम इस खास मौके पर कर रहे हैं.' उन्होंने आगे कहा कि 11 BRICS देश- दुनिया की अधिकतर आबादी और ग्लोबल GDO के 41 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करते हैं.
शशि थरूर ने BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने के भारत के फैसले का समर्थन करते हुए दिल्ली में कई वर्ल्ड लीडर्स की उपस्थिति को अपने आप में एक कूटनीतिक उपलब्धि बताया. उन्होंने कहा,' BRICS के सदस्यों के साथ-साथ राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर के कुछ पर्यवेक्षकों समेत एक दर्जन राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों का आना हमारे लिए बेहद सम्मान की बात है. यह हमारी डिप्लोमैटिक ऑर्गनाइजिंग कैपिसिटी को दर्शाता है, जिसका वैश्विक मंच पर अपने आप में महत्व है.'
थरूर की यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है, जब भारत खुद को ग्लोबल साउथ की आवाज के तौर पर स्थापित करने की कोशिश कर रहा है. वह उन देशों के साथ भी संबंधों को मैनेज कर रहा है, जो जियोपॉलिटिक्स में हमेशा नई दिल्ली के रुख से सहमत नहीं होते हैं. हालांकि, शशि थरूर ने यह भी स्पष्ट किया कि BRICS की अपनी सीमाएं हैं, खासकर तब जब इसके सदस्य देशों के वैश्विक संघर्षों पर बिल्कुल अलग-अलग विचार हों. उन्होंने इसकी चुनौतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब विदेश मंत्रियों की बैठक हुई, तो आम सहमति से बना संयुक्त घोषणा पत्र जारी करने के बदले भारत ने चेयर का घोषणा पत्र जारी किया. उन्होंने सवाल किया कि क्या फिर ऐसा होगा. उन्होंने कहा,' कुछ लोग इसे शायद एक झटका या BROCS में बुनियादी तालमेल की कमी का संकेत मान सकते हैं या क्या हम मतभेदों को सुलझा पाएंगे? यह हमारे डिप्लोमैट्स के लिए बड़ी चुनौती होगी.'