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CEC पर 'सुप्रीम' सुनवाई: ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने की मांग खारिज, चुनाव आयोग को SC ने जारी किया नोटिस

देश के मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. एससी ने सीईसी को निलंबित करने वाली मांग को खारिज कर दिया. चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया गया.

Written By abhinav tripathi
Published: Oct 05, 2026, 01:18 PM IST | Updated: Oct 05, 2026, 02:06 PM IST
Image Credit: ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले पर एससी में सुनवाई.
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देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर यायिकाओं पर सोमवार (05 अक्टूबर) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. याचिका पर हुई सुनवाई के बाद ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे उम्मीद है कि संवैधानिक संस्था हमेशा कानून के मुताबिक काम करेगी.

दरअसल, सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले में चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया है और इस संबंध में जवाब मांगा है. सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि एसआईआर, फॉर्म-6 में बदलाव और चुनाव आयोग के कई अन्य फैसले में निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया है. याचिकाओं में दावा किया गया है कि चुनाव आयोग से जुड़े कानून के अनुसार, फैसले सर्वसम्मति से या बहुमत से लिए जाने चाहिए थे.

किसने दायर की है याचिका

सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में  सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह और वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ये याचिकाएं दाखिल की गई हैं. इस मामले में राकेश कुमार सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील विकास सिंह पेश हुए थे. उन्होंने जनप्रतिनिधित्व कानून के मूल स्वरूप और उसमें किए गए बदलावों के साथ धारा 10(2) और 10(3) के बातों का जिक्र किया.

चुनाव आयुक्त पर एकतरफा फैसला लेने का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया कि देश के मुख्य चुनाव आयु्क्त ने कई मामलों में एक तरफा फैसला लिया है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में केवल एक न्यूज रिपोर्ट के आधार पर फैसला नहीं लिया जा सकता है. CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिका में लगाए गए आरोपों पर भारत के चुनाव आयोग से जवाब मांगा है.

कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर ECI का जवाब देखने के बाद उसे लगता है कि सीईसी ने कुछ फैसले बिना जरूरी आम सहमति के लिए है, तो वह उन फैसलों पर फिर से विचार कर सकता है या वापस ले सकता है. कोर्ट ने कगा कि नोटिस के बाद अगर वह हमे दिखाते हैं कि एबीसी फैसले बिना आम सहमति के लिए गए थे, तो हम उन सभी फैसलों को वापस लेंगे. 

भारत सरकार को भी नोटिस 

सीईसी के खिलाफ याचिका दायर करने वाले विकास सिंह के वकील ने कहा कि बहुत सारी गड़बड़ियां थीं और इस मुद्दे को लेकर पूरा देश परेशान था. इसे लेकर हमने एक याचिका दायर की; आज हमारे वकील विकास सिंह ने यह मामला उठाया और अंतरिम आदेश की मांग की. याचिका में तर्क दिया गया कि सुनवाई पूरी होने तक CEC को सस्पेंड कर दिया जाना चाहिए.

शीर्ष न्यायालय ने निर्देश दिया है कि किसी भी तरह की छेड़छाड़ से बचने के लिए संबंधित दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं और मामले पर आगे विचार करने के लिए सुनवाई अगले हफ्ते होगी. भारत सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त को नोटिस जारी किए गए हैं. 

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About the Author

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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