भाषा चुनें
  • Hindi
  • English
  • Marathi
  • Bengali
  • Tamil
  • Malayalam
  • Gujarati
  • Telugu
  • Kannada
  • Odisha
  • Z Bharat
  • ZEE PHH
  • ZEE Business
  • WION
राज्य चुनें
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखण्ड
  • मध्य प्रदेश
  • छत्‍तीसगढ़
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • बिहार
  • झारखण्ड
  • राजस्‍थान
  • हिमाचल प्रदेश
  • हिन्दीEnglishमराठीবাংলাதமிழ்മലയാളംગુજરાતીతెలుగుಕನ್ನಡଓଡ଼ିଶାZ BharatPHHBusinessWION
  • facebookyoutubetwitterlinkedinwhatsapp
Zee News Hindi
App
Zee News Hindi
  • News
  • वीडियो
  • फोटोज़
  • रील्स
  • लाइव ब्लॉग
  • राज्य चुनें

Add Zee Business As A Preferred Source
App
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • LIVE टीवी
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • ज़ी न्यूज़ हिंदी
  • /देश
  • /कश्मीर में पहली बार खुला RSS से जुड़े संगठन का दफ्तर, इस मुस्लिम शख्स को मिली कमान

कश्मीर में पहली बार खुला RSS से जुड़े संगठन का दफ्तर, इस मुस्लिम शख्स को मिली कमान

कश्मीर में एक बड़े वैचारिक बदलाव के तहत पुलवामा के पास भारतीय मजदूर संघ (BMS) का पहला दफ्तर शुरू हुआ है. RSS से जुड़े इस संगठन की कमान एक स्थानीय मुस्लिम शख्स को सौंपी गई है.

Written ByKhalid Hussain
Published: Oct 22, 2026, 08:19 PM IST|Updated: Oct 22, 2026, 08:27 PM IST
joinshare
कश्मीर में पहली बार खुला RSS से जुड़े संगठन का दफ्तर, इस मुस्लिम शख्स को मिली कमान
Image Credit: अनुच्छेद 370 के बाद घाटी की नई तस्वीर: कभी ‘संघी’ ताने सुनने वाले समीर कुछाए के नेतृत्व में पुलवामा में खुला BMS का दफ्तर

About the Author

    Khalid Hussain

    Khalid Hussain

    सैयद खालिद हुसैन जम्मू-कश्मीर के एक पुरस्कार विजेता पत्रकार हैं, जिन्हें 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है. साल 2014 से 'ज़ी न्यूज़' में चीफ  स्पेशल कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम कर रहे हैं.जी मीडिया से पहले हुसैन ने न्यूज़ 18 में नौ साल तक सीनियर कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम किया. हुसैन ने अपने करियर की शुरुआत डीडी न्यूज से की थी. हुसैन ने अपनी तालीम श्रीनगर के पब्लिक स्कूल और डीएवी हाई स्कूल से हासिल की. फिर ग्रेजुएशन तक का सफ़र एस.पी हायर सेकेंडरी स्कूल और अमर सिंह कॉलेज से पूरा किया. उसके बाद मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली के सर अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पूरी की. इसके अलावा हुसैन लेखक फ़िल्म/ वीडियो कैमरा का स्पेशल कोर्स एफटीआई पुणे से कर चुके हैं.  मुंबई और दिल्ली में कई साल काम करने के बाद 2004 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में काम करना शुरू किया. डीडी न्यूज़, डीडी कश्मीर, BAG फ़िल्म्स में फ्रीलांस काम किया. हुसैन पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों को बेहतरीन तरीके से कवर कर रहे हैं. लद्दाख से लेकर मुंबई तक हुसैन भारत के कई शहरों से रिपोर्टिंग कर चुके हैं.
    Read More

    ट्रेंडिंग

    • न्यूज़
    • फोटो
    • वीडियो
    'ब्लैक डे' से 'जश्न के उत्सव' तक... BJP ने कैसे विलय की वर्षगांठ को 'नए कश्मीर' के जश्न में बदला?

    'ब्लैक डे' से 'जश्न के उत्सव' तक... BJP ने कैसे विलय की वर्षगांठ को 'नए कश्मीर' के जश्न में बदला?

    2

    कल से बदल जाएगा रेलवे का नियम, लाइन में लगकर ट्रेप टिकट लेने वालों को मिलेगी यह खुशखबरी

    3

    कोटा में 16 साल के JEE स्टूडेंट ने किया सुसाइड, 6 महीने पहले करने आया था तैयारी

    4

    अनंत सिंह की भविष्यवाणी पर JDU का करारा पलटवार, श्याम रजक बोले, पहले अपना भविष्य तो देख लेते

    5

    राजस्थान मौसम अपडेट: फिर बदलेगा मौसम का मिजाज, 29-30 अक्टूबर को बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट

    logo
    • contact us
    • privacy policy
    • legal
    • investor info
    • advertise with us
    © 1998-2026 Indiadotcom Digital Private Limited, All Rights Reserved.

    कश्मीर घाटी में वैचारिक स्तर पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. जो पुलवामा कभी अलगाववाद और अशांति का गढ़ माना जाता था, वहां अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े श्रम संगठन भारतीय मजदूर संघ (BMS) का झंडा फहरा रहा है. खास बात यह है कि इस संगठन की कमान एक स्थानीय मुस्लिम नेता के हाथों में है. 2019 के अवंतीपोरा (पुलवामा) आतंकी हमले के घटनास्थल से महज 5 किलोमीटर दूर बारसू गांव में बने इस नए दफ्तर के साथ, RSS से जुड़े किसी संगठन ने घाटी में पहली बार अपनी सार्वजनिक और स्थायी उपस्थिति दर्ज कराई है.

    यह जगह लेथपोरा के उस इलाके से लगभग पांच किलोमीटर दूर है, जहां फरवरी 2019 के पुलवामा हमले में एक आत्मघाती हमलावर ने CRPF के 40 जवानों की जान ले ली थी. इस साधारण सी इमारत में सुरक्षा कैमरे लगे हैं सुरक्षा कर्मी तैनात हैं लेकिन यहां कोई भगवा झंडा या बड़ा साइनबोर्ड नहीं है, बस एक छोटा सा बोर्ड लगा है जिस पर सिर्फ 'OFFICE' लिखा है. एक ऐसा संगठन जो सालों तक घाटी में चुपचाप काम करता रहा, उसके लिए यह सादगी जानबूझकर रखी गई है लेकिन अब इस संगठन का सार्वजनिक रूप से दरवाजे खोलना एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.

    कश्मीर में बदले सियासी हालात

    कश्मीर में BMS के प्रभारी और बारसू गांव के ही रहने वाले 36 वर्षीय समीर कुछाए ने कहा कि कश्मीर में किसी संग संगठन के कार्यालय का यह पहला अनुभव है. BMS के कश्मीर प्रभारी ने कहा अब समय आ गया है कि खुलकर काम किया जाए. कश्मीर के हालात बदल गए हैं. और हम राजनीति से दूर है बहले ही किसी राजनीतिक दल से विचारधारा मिलती है मगर हम राजनीति में सकरी नहीं हैं. हमारा मकसद केवल देश की उन्नति है.

    हमें सियासत से कोई लेना-देना नहीं...

    समीर कुछे ने कहा, 'चूंकि हम मजदूरों का संगठन हैं, जिसमें हमें राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. हम किसी राजनीतिक पार्टी के संचालन से नहीं जुड़े हैं. हम मजदूरों के हित के लिए राष्ट्रीय निर्माण सर्वप्रथम के मजदूरों के हित के लिए काम करने वाले लोग हैं. मजदूरों के हित के लिए काम करने वाला संगठन है. तो हमारे लिए इतना मुश्किल यहां पे संगठन का आखिरी डेवलप करना इतना भी मुश्किल नहीं है क्योंकि जैसे कि यहां एक मजदूर तबके के साथ हम जुड़े हैं, वाबस्ता है, धीरे-धीरे करके उनकी समझ में ये बात आई कि हम उनके हित के लिए, बिना पूछे कि वे किस समुदाय, किस जाति, किस पंथ से हैं या किस धर्म का पालन करते हैं, उससे दूर रहके हम सिर्फ उनके लिए कि एक सरकारी सुविधा उनके लिए उनको उपलब्ध कराती है, वो उससे अनजान थे. वो उसमें जानकारी प्राप्त कर लें, उन सुविधाओं का लाभ ले सकें, उसके लिए हम काम करते हैं तो मुझे नहीं लगता इसमें कोई हमें कठिनाई आ सकती है या कोई इतना कुछ हमें करना पड़े.'

    बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में अशांति

    समीर कुछे का अपना सफर इस क्षेत्र के हालिया उतार-चढ़ाव भरे इतिहास को दर्शाता है. वे बताते हैं कि वे 2009 के आसपास RSS से जुड़े और 2016 में औपचारिक रूप से BMS/RSS के काम से जुड़ गए. यह वही साल था, जब हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी मारा गया था, जिसके बाद पूरी घाटी में बड़े पैमाने पर अशांति फैल गई थी. वे ऐसे साल थे जब सार्वजनिक रूप से देशभक्ति दिखाने पर भी भारी सामाजिक कीमत चुकानी पड़ती थी. कुछे ने बताया कि उनके रिश्तेदारों ने उस अछूत समझते थे कहते थे तुम 'संघी' हो. फेसबुक पर तिरंगा फहराते हुए उनका एक वीडियो वायरल हुआ था उसके बाद कुछे नजर में आया. उनके लिए, एक दशक बाद अपने ही गांव में एक औपचारिक कार्यालय खोल पाना इस बात का संकेत है कि जमीनी हालात कितने बदल गए हैं.

    कश्मीर में 30 हजार कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है संगठन

    समीर कुछे ने कहा 'मैं आपको ईमानदारी से बताता हूं, शुरू में कठिनाइयां बहुत थी, यहां तक कि मेरे अपने रिश्तेदार भी मुझे संघी कहते थे, जैसे मैं अछूत हूं, लेकिन बाद में चीजें बदल गईं, खासकर 370 के निरस्तीकरण के बाद.' BMS के पदाधिकारियों का कहना है कि यह संगठन कश्मीर में लगभग 2020 से सक्रिय है, यानी अनुच्छेद 370 हटने के बाद से. शुरुआत में यह श्रीनगर के शिवपोरा में एक छोटी सी किराए की जगह से काम करता था. दक्षिण कश्मीर में एक विधिवत डिवीजनल कार्यालय स्थापित करने का निर्णय, बेहतर होती सुरक्षा व्यवस्था और रणनीतिक रूप से मज़बूत समर्थन आधार को दर्शाता है: इस क्षेत्र में BMS से जुड़े ज़्यादातर मज़दूर संगठन दक्षिण कश्मीर के चार जिलों में स्थित हैं.कुछे के अनुसार, इस संगठन से अभी लगभग 20 पंजीकृत मजदूर यूनियनें जुड़ी हुई हैं, जो कश्मीर में लगभग 30,000 कर्मचारियों और मजदूरों का प्रतिनिधित्व करती हैं.

    समीर कुछे ने कहा 'अब लोग सोचते हैं और महसूस करते हैं कि जैसे भारतीय मजदूर संघ हैं. भारतीय मजदूर संघ के बारे में पहले ये था कि देखो जी ये मुस्लिम विरोधी है. आज हमारे साथ कश्मीर प्रांत के 20 संबद्ध यूनियन हैं, जिसमें 30,000 से ज्यादा मजदूर, 30,000 से ज्यादा कर्मचारी हमारे साथ संबद्ध हैं. उन 30,000 के माध्यम से हमारे कश्मीर प्रांत में एक बात सीधे से आ गई है कि हम बिना परवाह किए कि हमारा मजदूर भाई किस धर्म से है, किस समुदाय से है और किस राजनीतिक विचारधारा का पालन करता है, हम उसके सिर्फ हित में, मजदूर हित में काम करने वाले लोग हैं. तो ऐसी चीजें बदली हैं'.

    लोगों को लगता है कि हम मुस्लिम विरोधी हैं, लेकिन...

    पदाधिकारियों के मुताबिक पुलवामा को इसलिए चुना गया क्योंकि यह एक केंद्रीय स्थान पर है, यहां से दक्षिण कश्मीर और श्रीनगर दोनों जगह आसानी से पहुंचा जा सकता है, और यहां बड़ी संख्या में मजदूर रहते हैं. इस कार्यालय का मुख्य उद्देश्य व्यावहारिक है और पूरी तरह से मजदूरों पर केंद्रित है, यह सुनिश्चित करना कि कर्मचारियों और मजदूरों को उनका हक मिले और उनके साथ सम्मानजनक व्यवहार हो. कुछे  स्पष्ट रूप से एक लक्ष्मण रेखा खींच रखी है. उन्होंने बार-बार जोर देकर कहा है, 'हम BJP या किसी अन्य पार्टी के साथ नहीं हैं. हमारा राजनीति या धर्म से कोई लेना-देना नहीं है.' उन्होंने आगे कहा, 'लोगों को लगता है कि हम मुस्लिम-विरोधी हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. हमारा धर्म से कोई वास्ता नहीं है.'

    2019 के बाद से शांत हुआ माहौल

    इस ऑफिस के उद्घाटन के समय BMS के वरिष्ठ नेता मौजूद थे, जिनमें अखिल भारतीय संगठन सचिव बी. सुरेंद्रन, उत्तर भारत संगठन सचिव सोहन लाल गुप्ता और अन्य लोग शामिल थे. RSS जुड़े संगठनों ने घाटी में खुद को चर्चा से दूर रखा और चुपचाप काम किया. BMS का यह कार्यालय पहली बार ऐसा मौका है जब RSS से जुड़ा कोई संगठन कश्मीर जो भारत का एकमात्र मुस्लिम-बहुसंख्यक क्षेत्र है में सार्वजनिक रूप से और स्थायी तौर पर स्थापित हुआ है. संगठन के पदाधिकारियों का मानना है कि 2019 के बाद से वहां का माहौल काफी शांत हुआ है, जिससे अब खुलकर काम करना संभव हो पाया है. समीर मानते हैं कि अब समय और बेहतर हो और संग कश्मीर के कोने कोने में दिखेगा.

    कश्मीर का युवा हाथों में पत्थर की जगह किताब चाहता है

    कुछे ने इस बदलाव को पीढ़ीगत बदलाव के रूप में देखा है; उनका कहना है कि आज के बच्चे और युवा अपने हाथों में पत्थर के बजाय किताबें चाहते हैं. उनके अनुसार, यह वर्कर्स और कर्मचारियों के बीच संगठन के जमीनी काम को और मजबूत करने की दिशा में एक कदम भी है. यह नया कार्यालय केवल एक शांत प्रशासनिक केंद्र बनकर रहेगा या आगे चलकर और अधिक सक्रिय रूप में सामने आएगा, यह स्थानीय लोगों की स्वीकृति, सुरक्षा की स्थिति और श्रमिकों के अधिकारों के लिए काम करने के संगठन के वादों को पूरा करने की क्षमता पर निर्भर करेगा. फिलहाल, एक ऐसे गांव में जो कभी आतंकवाद  की घटनाओं का केंद्र हुआ करता था, सुरक्षा कैमरों और 'कार्यालय' लिखे एक साधारण बोर्ड वाली यह छोटी सी इमारत, कश्मीर घाटी में संघ परिवार के श्रमिक संगठन की पहली सार्वजनिक और संस्थागत उपस्थिति को दर्शाती है.

    यह भी पढ़ेंः  'जम्मू-कश्मीर हमारा था, है और रहेगा...' OIC के प्रस्ताव पर भारत का पलटवार, पाक को दिखाया आईना!

    Add Zee News as a Preferred Source
    TAGS:
    Jammu Kashmir News