Captain Smit Machhar Bajrang Bali Devotion News: बजरंग बली को कष्टभंजक, संकटमोचक क्यों माना जाता है, ये एक बार फिर से साबित हो चुका है. ठीक वैसे ही जैसे हनुमान चालीसा की एक चौपाई में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा- सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू को डरना.
संकट की हालत में हनुमान चालीसा पढ़ने से हिम्मत मिलती है, संकट से लड़ने की क्षमता बढ़ती है. ये सब आपने जुबानी सुना होगा, लेकिन दुनिया ने इसका जीवंत उदाहरण भी देख लिया.
इसका जिक्र फ्लाईदुबई के उस हिंदुस्तानी पायलट ने किया, जिसने जख्मी होकर भी 180 यात्रियों को बचाने में बडी भूमिका निभाई. उस जांबाज पायलट का नाम आज दुनिया भर के लोगों की जुबान पर है और वो नाम है कैप्टन स्मित मच्छार का. पीएम नरेन्द्र मोदी से बातचीत में पायलट ने हनुमान जी को लेकर जो बातें कहीं, वो बेहद चमत्कारिक हैं.
दिलचस्प ये है, कि गुजरात में जन्मे और मुंबई में पले-बढ़े कैप्टन स्मित मच्छार की पढ़ाई-लिखाई अंग्रेजी मीडियम के स्कूलों में हुई, उसके बाद एविएशन की ट्रेनिंग. उसके बाद 17 साल तक पहले को-पायलट उसके बाद चीफ पायलट की नौकरी. लेकिन इस पूरे सफर में जो एक कैप्टन मच्छार के साथ रही वो है बजरंगबली के प्रति उनकी आस्था और हनुमान चालीसा का पाठ.
क्या मुश्किल की स्थिति में हनुमान चालीसा का पाठ इतना असरदायी होता है? आज के जी स्पेशल में इस सवाल का जवाब दो तरीके से समझेंगे, पहला तो कैप्टन स्मित मच्छार का पूरा बयान, जब वो 25 मिनट तक कॉकपिट में खून से लथपथ होकर हमलावर से संघर्ष करते रहे. दूसरा- हनुमान जी को लेकर कुछ पौराणिक और आधुनिक घटनाओं के जरिए, जो धरती पर किसी चमत्कार की तरह घटित हुईं.
34 हजार फीट की ऊंचाई पर जब कैप्टन स्मित मच्छार पर ओमानी पायलट ने हमला बोला और कॉकपिट की सेफ्टी कुल्हाड़ी से वार करना शुरू किया, तब हनुमान चालीसा की यही लाइनें गुनगुना रहे थे.
कैप्टन मच्छार को हमलावर को-पायलट ने कुल्हाडी से इतनी बार मारा कि उनके पेट, कंधे और छाती से खून निकल रहा था. वो जमीन पर गिर पड़े, लेकिन हनुमान चालीसा का पाठ बंद नहीं हुआ. वे लगातार मन ही मन पाठ कर रहे थे, संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा
पीएम मोदी से बातचीत में ये किस्सा कैप्टन स्मित मच्छार ने खुद सुनाया. उन्होंने बताया कि कैसे वो जख्मी हालत में हनुमान चालीसा का पाठ करते रहे और कुल्हाड़ी से लैस हमलावर से आखिरी दम तक लड़ते रहे.
कैप्टन स्मित ने पीएम से कहा, 'मुझे कई चोटें आई थीं, लेकिन मैंने खुद से कहा कि मुझे उठना है और कुछ करना है. उस समय, मैंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने के लिए खुद को प्रेरित किया.'
यही वह अहसास था, जिसके जोर से स्मित कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब हुए. इसके बाद अंदर की चीख पुकार बाहर सुनाई दी और हमलावर पायलट को मुसाफिरों के एक समूह ने काबू किया. तब तक कैप्टन स्मित मच्छार खून से लथपथ हो चुके थे.
प्रभु हनुमान कृपा और अपनी जांबाजी से विमान में सवार 180 लोगों को बचा लिया. 34 हजार फीट की ऊंचाई पर हुए उस खौफनाक लम्हे के बारे में ये बताते हुए स्मित मच्छार भावुक हो गए. पीएम मोदी ने उन्हें ढाढस बंधाते हुए कहा, 'अगर आप मेरे सामने भावुक नहीं होंगे तो कहां होंगे.'
प्रधानमंत्री मोदी ने कैप्टन स्मित का सही इलाज और देखभाल करने के लिए सऊदी अरब और UAE की सरकारों का दिल से शुक्रिया अदा किया. साथ ही, पीएम मोदी ने भारत के इस बहादुर बेटे को भरोसा दिलाते हुए एक बड़ा वादा किया, 'जब भी आपको मेरी ज़रूरत होगी, मैं बस एक फोन कॉल की दूरी पर हूं.'
आपको बता दें कि कैप्टन स्मित मच्छार का इलाज दुबई के एक अस्पताल में चल रहा है. उनकी हालत बेहतर हो रही है. लेकिन अस्पताल में भी स्मित ना उस खूनी संघर्ष को भूले हैं और ना ही हनुमान चालीसा को.
कैप्टन मच्छार ने जिस हनुमान भक्ति और हौसले से प्लेन का कंट्रोल ओमानी पायलट के हाथ में जाने से रोका, जख्मी होकर भी 180 मुसाफिरों की जान बचाई, उसकी तारीफ पूरी दुनिया में हो रही है. अब इंतजार है, उस हमलावर ओमानी को-पायलट की आतंकी कुंडली खुलने का, जिसके पन्ने धीरे-धीरे खुलने लगे हैं.
यूएई की तरफ से बताया गया है कि ओमानी पायलट के इरादे आतंकी थे और उसने बेहद खतरनाक वारदात को अंजाम देना चाहा. लेकिन भारतीय पायलट स्मित मच्छार ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए 180 यात्रियों की जान बचा ली. फिलहाल ओमानी पायलट यूएई के कब्जे में है और इजरायली एजेंसियों के साथ मिलकर उससे पूछताछ जारी है. वहीं, कैप्टन स्मित मच्छार को दुबई एयरलिफ्ट करने के बाद उनका इलाज बेहतर अस्पताल में चल रहा है.
इजरायली एजेंसियां अब पूरे हमले और इसकी साजिश के पीछे की कहानी की जांच कर रही है. इस दौरान जो तीन बातें कैप्टन स्मित की जांबाजी के बारे में पता चली, इसके बाद वो कैप्टन को दाद देते नहीं थक रहे. कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा तो अंत में खोला, उसके पहले हाथापाई और हमले के बीच ही वो दो बार इमरजेंसी और हाईजैकिंग का सिग्नल भेजने में कामयाब रहे.
आतंकी हमलों के बीच कैप्टन स्मित अच्छी तरह समझ चुके थे कि ओमान का को-पायलट सिर्फ हमलावर नहीं, बल्कि किसी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित चरमपंथी हो सकता है. वह प्लेन में सवार 180 यात्रियों और यहूदियों को मारना चाहता है. अब इजरायली एजेंसियां इसी एंगल से जांच कर रही हैं.
इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, ‘ओमानी पायलट किसकी साजिश के तहत काम कर रहा था? उसका इरादा क्या था? ये सबकुछ जल्दी पता कर लेंगे. हम मामले की पूरी तह तक जाएंगे.'
34 हजार फीट की ऊंचाई पर ज़िंदगी और मौत के बीच झूलती वो खौफनाक घड़ियां, जब चारों तरफ सिर्फ तबाही का मंजर था. फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार गंभीर रूप से घायल थे, लेकिन उनका हौसला चट्टान की तरह अडिग था. इसके पीछे हनुमान चालीसा के पाठ और इससे मिली शक्ति का जो जिक्र कैप्टन स्मित ने किया, वो हमारी सनातनी परंपरा का प्राचीन हिस्सा है. जी स्पेशल के इस हिस्से में जानिए, बजरंगबली को संकट की हालत में सहारा और कष्टभंजक क्यों कहा जाता है?
हमारे वैदिक ग्रंथों में जिस 7 वायु और इसके 49 नियंत्रकों का जिक्र है. इन सभी वायु शक्तियों के देवता हैं हनुमान, जिन्हें मारूत भी कहा जाता है
सुंदर कांड में तुलसीदास ने हनुमान जी के जिस रूप का वर्णन किया है, उसके मुताबिक वो वानर के मुख वाले अत्यंत बलिष्ठ जीव हैं. इनका शरीर अत्यंत मांसल और बलशाली है. उनका शरीर पर्वत के समान विशाल और कठोर है. उनका मुख्य अस्त्र गदा है और उनके मुख पर सदैव राम नाम की धुन रहती है.
आगे चलें बहुरि रघुराया, रिष्यमूक पर्बत निअराया॥
तहं रह सचिव सहित सुग्रीवा, आवत देखि अतुल बल सींवा॥
रामायण में वर्णित इस दृश्य के मुताबिक भगवान श्रीराम और हनुमान की पहली मुलाकात तब हुई थी, जब रावण ने सीता का हरण कर लिया था. सीता की तलाश में श्रीराम और लक्ष्मण भटकते-भटकते ऋष्यमूक पर्वत के पास पहुंचे. उस वक्त बेसहारा और संकट की घड़ी में हनुमान ने ही श्रीराम लक्ष्मण में साथ दिया.
भगवान राम से मुलाकात के बाद उन्होंने किस तरह पूरे लंका अभियान में निर्णायक भूमिका निभाई, इसकी गाथाएं आज भी गाई जाती हैं. वो चाहे देवी सीता को रावण के राज्य में ढूंढने की चुनौती हो या माता सीता को ढूंढकर, उन्हें सुरक्षित ले जाने का भरोसा हो. या फिर रावण को चुनौती देने के लिए लंका दहन हो.
लंका दहन के बाद जब युद्ध शुरू हुआ, तब मेघनाद ने ब्रहास्त्र से लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया. इस संकट में भी हनुमान जी ने अपने विराट रूप और बल का परिचय दिया. लक्ष्मण को बचाने का एक ही उपाय था - संजीवनी बूटी. वो संजीवनी बूटी तय समय में नहीं मिली, तो हनुमान जी अपने कंधे पर पूरा पर्वत ही उठा लाए.
हनुमान जी की अद्भुत और अदृश्य शक्ति से से जुड़ी कई लोकप्रिय घटनाएं और इसके साक्षात अनुभव भक्तों के बीच प्रचलित हैं. ये सिर्फ आस्था और श्रद्धा पर आधारित नहीं, बल्कि भक्त इसे हनुमान की कृपा और उनकी शक्ति से चमत्कार मानते हैं. जी स्पेशल के इस हिस्से में कुछ ऐसे जीवंत उदाहरण जानिए.
ये घटना इसी साल सितंबर की है, जब उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के दौरान सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा था. लेकिन सड़क के रास्ते में 170 साल पुराना हनुमान मंदिर आ गया. प्रशासन ने मंदिर का ढांचा तो हटा दिया, लेकिन इसके गर्भगृह में 8 फुट ऊंची प्रतिमा भारी क्रेन और मशीनों से हिली तक नहीं. इसकी कोशिश कई दिन हुई लेकिन हर कोशिश नाकाम.
हनुमान जी की शक्ति से जुडी एक कहानी अयोध्या में भी प्रचलित है. ये घटना हनुमान गढ़ी मंदिर की है. देश में आतंकवाद पांव पसार चुका था. 1998 में हनुमान गढ़ी मंदिर के पास बम रखने की साजिश हुई. ऐसा कहा जाता है कि एक बंदर ने टाइमर लगे बम के तार खींचकर उसे निष्क्रिय कर दिया. भक्त इसे हनुमान जी की कृपा मानते हैं.
इससे साथ-साथ एक कहानी तो बहुत प्रचलित है. जब 1986 में अयोध्या में राम मंदिर का ताला खोलने की सुनवाई लोअर कोर्ट में हो रही थी तो सुनवाई के दौरान एक लंगूर हर दिन कोर्ट परिसर में दिखाई देता था. इतना ही नहीं, जिस दिन अयोध्या राम मंदिर केस में जज कृष्ण मोहन पांडे फैसला सुनाने वाले थे. उस दिन फैसले से पहले वो जज के आवास की मुंडेर पर भी बैठा दिखा. इस केस में जब लोअर कोर्ट ने फैसला सुनाया, तब भी वो लंगूर कोर्ट की छत पर घूमता दिखा. इस घटना का जिक्र जज कृष्ण मोहन पांडे ने अपनी आत्मकथा - Voice of Conscience - में किया है.
अब जरा एक ऐसी ही एक घटना 2024 में राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान की सुनिए. ऐसा कहते हैं कि प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान गर्भगृह में अचानक एक बंदर ने प्रवेश किया और राम लला की मूर्ति के सामने कुछ देर बैठकर शांत भाव से निकल गया.
अभी नीब करौरी बाबा की जीवनी पर आई फिल्म ''हनुमान अंश'' का ये नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि बाबा नीब करौरी बाबा की योग शक्ति के पीछे हनुमान भक्ति और उनकी अदृश्य शक्ति ही मानी जाती है. नीब करौरी बाबा के करोडों भक्त उन्हें हनुमान जी का अंश मानते हैं. उनके जीवन और मंदिरों से जुड़ी अनेक चमत्कारी घटनाएं बताई जाती हैं. इन्हीं घटनाओं की वजह से ये मान्यता मजबूत होती गई कि हनुमान कष्टभंजक हैं. यानी ऐसे देवता, जिनके दर्शन और पूजन से सारे कष्ट दूर हो जाएं. वो संकटमोचक हैं.