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कौन हैं राकेश हंडू 'बंटी'? फरीदाबाद से बारामूला तक कैसे पहुंचा साइबर-आतंकवाद का ये मामला

कश्मीरी पंडित कार्यकर्ता राकेश हंडू उर्फ 'बंटी' की हरियाणा के फरीदाबाद से बारामूला पुलिस द्वारा साइबर आतंकवाद के मामले में गिरफ्तारी ने तूल पकड़ लिया है. जानिए क्या है पूरा मामला

Written By Khalid Hussain
Published: Oct 26, 2026, 10:03 PM IST | Updated: Oct 26, 2026, 10:18 PM IST
Image Credit: कश्मीरी पंडित एक्टिविस्ट राकेश हंडू 'बंटी' की गिरफ्तारी: साइबर-आतंकवाद का मामला और समुदाय की निष्पक्ष जांच की मांग
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हाल ही में देश और खासकर कश्मीरी पंडित समुदाय के बीच एक खबर ने खासी हलचल मचा दी है. कश्मीरी पंडितों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाले जाने-माने एक्टिविस्ट और आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता राकेश हंडू, जिन्हें प्यार से 'बंटी' भी कहा जाता है, इन दिनों कानूनी पचड़े में फंस गए हैं. 17 अक्टूबर 2026 को हरियाणा के फरीदाबाद स्थित उनके घर से बारामूला पुलिस की एक टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया.

इस गिरफ्तारी के बाद से ही सोशल मीडिया पर उनकी रिहाई की मांग जोर पकड़ने लगी है और कश्मीरी पंडित समुदाय के भीतर एक तीखी बहस छिड़ गई है. आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से और बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर पूरा विवाद क्या है. राकेश हंडू फिलहाल उत्तर कश्मीर में दर्ज एक साइबर-आतंकवाद से जुड़े मामले के सिलसिले में बारामूला जेल में बंद हैं. पुलिस ने यह कार्रवाई 12 सितंबर 2026 को बारामूला पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर (FIR No. 151/2026) के आधार पर की है.

क्या है पूरा मामला और किस आधार पर हुई गिरफ्तारी?

इस मामले में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम यानी आईटी एक्ट (IT Act) की धारा 66F (जो साइबर-आतंकवाद से जुड़ी है) और धारा 84C लगाई गई है. दिलचस्प बात यह है कि यह शिकायत किसी और ने नहीं, बल्कि एक अन्य कश्मीरी पंडित रोहित रैना ने दर्ज कराई थी. रोहित रैना प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज (PM Package) के तहत काम करते हैं और बारामूला के वित्त विभाग में तैनात हैं. सरकारी दस्तावेजों और पुलिस के अनुसार, आरोप यह है कि एक सार्वजनिक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए लगातार ऐसी इलेक्ट्रॉनिक सामग्री यानी कंटेंट को आगे बढ़ाया और प्रसारित किया जा रहा था, जो 'यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल' (ULC) नामक एक छोटे और कम जाने-माने आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ था. गिरफ्तारी के मेमो में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि डिजिटल कंटेंट में कथित तौर पर बदलाव करके उसे आगे शेयर (ट्रांसमिट) किया गया था.

पुलिस समन और फरीदाबाद से गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि

इस पूरी कार्रवाई से पहले, पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत एक नोटिस जारी किया था. इसके जरिए राकेश हंडू को जांच अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया गया था. हालांकि, बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद हंडू जांच में शामिल होने के लिए सामने नहीं आए. इस पर राकेश हंडू का अपना पक्ष यह था कि वह वर्तमान में फरीदाबाद में रह रहे हैं और उन्हें अपनी जान का वास्तविक सुरक्षा खतरा है, जिसके कारण वह कश्मीर की यात्रा नहीं कर सकते.

उन्होंने पुलिस के सामने यह अनुरोध भी किया था कि उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ऑनलाइन जांच प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति दी जाए. जब बारामूला पुलिस की टीम फरीदाबाद पहुंची और उन्हें गिरफ्तार किया, तो नियमानुसार उन्हें उनकी गिरफ्तारी के कारणों और कानूनी अधिकारों की जानकारी दी गई. इनमें उनके वकील से परामर्श करने और अपनी जमानत के लिए अर्जी देने का अधिकार शामिल था.

पुलिस का पक्ष और कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा से जुड़ा एंगल

जम्मू-कश्मीर पुलिस की तरफ से इस गिरफ्तारी को लेकर अभी तक कोई बहुत लंबा या विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. हालांकि, विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई पिछले कुछ महीनों में कश्मीरी पंडितों को मिल रही धमकियों की एक बड़ी और व्यापक जांच का हिस्सा है. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि राकेश हंडू लगातार ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट और पोस्टर अपलोड करते थे, जिनमें सीधे तौर पर कश्मीरी पंडितों को डराने और धमकियां देने वाली बातें होती थीं.

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अधिकारी का यह भी आरोप है कि जब भारत में आतंकवादियों का समर्थन करने वाले और धमकियां देने वाले ऐसे अकाउंट्स को ब्लॉक किया जा रहा था, तब भी हंडू उन लोगों में सबसे आगे थे जो इन धमकियों वाले पोस्ट्स को इंटरनेट पर शेयर कर रहे थे. पुलिस का यह भी कहना है कि कानून अपना काम पूरी निष्पक्षता से कर रहा है और जांच पूरी तरह नियमों के मुताबिक चल रही है. अधिकारी ने आश्वस्त किया है कि इस प्रक्रिया में किसी भी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा.

एक्टिविस्ट राकेश हंडू का काम और समर्थकों का नजरिया

दूसरी ओर, राकेश हंडू के समर्थकों और उनके काम को करीब से जानने वाले लोगों का बिल्कुल अलग ही नजरिया है. अपने समुदाय के बीच हंडू एक मुखर आरटीआई और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पहचाने जाते हैं. उनका मुख्य काम हमेशा से कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास, 'पीएम पैकेज' के तहत नौकरी कर रहे प्रवासी कर्मचारियों की सुरक्षा, उनके लिए सुरक्षित आवास की मांग और सुरक्षा ऑडिट कराने से जुड़ा रहा है. इसके अलावा, उन्होंने उन रिपोर्ट्स की भी खुलकर जांच मांगी थी जिनमें इन कर्मचारियों के निजी डेटा लीक होने के आरोप लगे थे.

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सितंबर 2026 की शुरुआती रिपोर्टों पर गौर करें तो पता चलता है कि हंडू ने ULC नामक आतंकी संगठन द्वारा कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को दी जा रही धमकियों वाले पोस्ट को सिर्फ इसलिए साझा और उजागर किया था ताकि प्रशासन का ध्यान इस तरफ खींचा जा सके. उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और गृह मंत्रालय (MHA) को टैग करते हुए मांग की थी कि इस आतंकी संगठन के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए और कर्मचारियों को सुरक्षित ट्रांजिट आवास मुहैया कराए जाएं. हंडू के समर्थकों और शुभचिंतकों का तर्क है कि 'पीएम पैकेज' के तहत काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा की वकालत करने वाले उनके इस नेक और सामाजिक काम को इन कथित और गंभीर अपराधों के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.

नेताओं का समर्थन और सोशल मीडिया पर मुहिम

इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद कश्मीरी पंडित समुदाय के भीतर गहरी चिंता और तनाव का माहौल बन गया है. समुदाय के कई वर्गों ने इस पर सवाल उठाए हैं और इसे लेकर तीखी बहस छिड़ गई है. लोक जनशक्ति पार्टी के जाने-माने नेता संजय सर्राफ ने खुलकर राकेश हंडू का समर्थन किया है. उन्होंने सार्वजनिक रूप से मांग की है कि इस पूरे मामले की पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा देश के कानून का पूरी सख्ती और ईमानदारी से पालन किया जाना चाहिए. सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए संजय सर्राफ ने कहा कि फरीदाबाद से इस तरह गिरफ्तारी करना और फिर लाकर बारामूला जेल में रखना, उन सभी लोगों के लिए बहुत चिंताजनक है जो हंडू को और उनके सामाजिक कार्यों को अच्छी तरह जानते हैं.

उन्होंने जोर देकर कहा कि भले ही आरोपों की गहन और डीप जांच होनी चाहिए, लेकिन साथ ही यह भी जरूरी है कि राकेश हंडू के साथ पूरी तरह निष्पक्ष व्यवहार किया जाए, उनकी इंसानियत और गरिमा का पूरा सम्मान हो और कानूनी प्रक्रिया में किसी तरह की कोताही न बरती जाए. सर्राफ ने अपने बयान में यह भी दोहराया कि 'कश्मीरी पंडित समुदाय हमेशा से न्याय, शांति और देश के कानून के शासन में अटूट विश्वास रखता है.' उन्होंने उम्मीद जताई है कि पुलिस की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के जरिए दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और असली सच्चाई सबके सामने आ जाएगी.

आगे क्या स्थिति है?

फिलहाल ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस की तरफ से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक चार्जशीट या कोई बहुत विस्तृत सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया गया है. कानून के दायरे में रहकर पुलिस की जांच अभी भी जारी है. दूसरी तरफ, कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग और राकेश हंडू के चाहने वाले सोशल मीडिया पर लगातार ऑनलाइन कैंपेन चलाकर उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं. हर तरफ बस यही एक आवाज उठ रही है कि चाहे जांच किसी भी दिशा में जाए, लेकिन उसमें पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए और देश के कानून की निर्धारित प्रक्रिया का शत-प्रतिशत पालन होना अनिवार्य है, ताकि किसी के साथ भी अन्याय न हो सके.

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About the Author

सैयद खालिद हुसैन जम्मू-कश्मीर के एक पुरस्कार विजेता पत्रकार हैं, जिन्हें 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है. साल 2014 से 'ज़ी न्यूज़' में चीफ  स्पेशल कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम कर रहे हैं.जी मीडिया से पहले हुसैन ने न्यूज़ 18 में नौ साल तक सीनियर कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम किया. हुसैन ने अपने करियर की शुरुआत डीडी न्यूज से की थी. हुसैन ने अपनी तालीम श्रीनगर के पब्लिक स्कूल और डीएवी हाई स्कूल से हासिल की. फिर ग्रेजुएशन तक का सफ़र एस.पी हायर सेकेंडरी स्कूल और अमर सिंह कॉलेज से पूरा किया. उसके बाद मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली के सर अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पूरी की. इसके अलावा हुसैन लेखक फ़िल्म/ वीडियो कैमरा का स्पेशल कोर्स एफटीआई पुणे से कर चुके हैं.  मुंबई और दिल्ली में कई साल काम करने के बाद 2004 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में काम करना शुरू किया. डीडी न्यूज़, डीडी कश्मीर, BAG फ़िल्म्स में फ्रीलांस काम किया. हुसैन पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों को बेहतरीन तरीके से कवर कर रहे हैं. लद्दाख से लेकर मुंबई तक हुसैन भारत के कई शहरों से रिपोर्टिंग कर चुके हैं.
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