'तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं':, CJP नेताओं की गिरफ्तारी पर भड़के राहुल गांधी, बोले- ये कायरतापूर्ण काम
सीजेपी के सदस्य आशुतोष रांका और सौरव दास को न्यायिक हिरासत में भेजने को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है. राहुल ने कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और हम इसे वापस हासिल करेंगे.
लोकसभा के नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी का विरोध किया है. राहुल गांधी ने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है. कांग्रेस सांसद ने इसे कायरतापूर्ण काम बताया. उन्होंने कहा कि छात्र, युवा, पत्रकार और INDIA ब्लॉक भले ही बैनर अलग-अलग हों, लेकिन मकसद एक ही है. नागरिक अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सभी विरोध प्रदर्शन एक ही हैं. राहुल गांधी ने कहा कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और हम इसे वापस हासिल करेंगे.
इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए भी राहुल गांधी ने जंतर-मंतर को प्रदर्शनस्थल से हटाने के फैसले का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि लोकतंत्र में जंतर-मंतर ही अपनी बात कहने का एक जरिया था, लेकिन अब सरकार ने इसे भी बंद कर दिया है. सरकार ने तय किया है कि लोकतांत्रिक भावनाएं जाहिर करने के लिए जंतर-मंतर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा.
जंतर-जंतर के लिए आवाद उठाएंगे- राहुल
राहुल ने कहा था कि हम इस फैसले को चुनौती देंगे. राहुल ने कहा कि हम लोगों के अधिकारों को कुचलने नहीं देंगे. हम भारत की जनता की आवाज के लिए लड़ेंगे. जिन लोगों ने यह काम किया है, उन्हें यह समझना होगा कि उन पर अब शिकंजा कस रहा है. राहुल गांधी ने कहा कि यह इतना आसान नहीं होगा कि आप भारतीय संविधान को नष्ट कर दें और बच निकलें.
न्यायिक हिरासत में भेजे गए CJP नेता
वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सदस्य सौरव दास और आशुतोष रांका ने मंगलवार (13 अक्टूबर) को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की कोशिश की थी. ट्रेसपासिंग और बॉन्ड तोड़ने के आरोप में दोनों को 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
सौरव-आशुतोष पर क्या आरोप है?
पुलिस के अनुसार, 10 अक्टूबर को सीजेपी नेताओं को सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था. उस वक्त दोनों को 50,000 रुपये के बॉन्ड और एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त पर छोड़ा गया था.
13 अक्टूबर को ही दोनों नेताओं ने अपनी शर्त का उल्लंघन किया. पुलिस अब दोनों को बार-बार नियम तोड़ने वालों के तौर पर देख रही है. बुधवार सुबह-सुबह पुलिस ने दोनों को SCM कोर्ट के सामने पेश किया. कोर्ट ने उन्हें 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.
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