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कांग्रेस समेत, तमाम विपक्षी दलों ने आज यानी मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद से लेकर चुनाव आयोग तक मार्च निकाला. मार्च संसस से शुरू तो हो गया, लेकिन आयोग तक नहीं पहुंच पाया. बीच में ही मार्च कर रहे विपक्षी नेताओं को सुरक्षकर्मियों ने रोक लिया. ऐसे में सभी नेता वहीं पर रुककर अपना विरोध दर्ज कराने लगे. इस दौरान कई तरह नेताओं को हिरासत में भी लिया गया. विपक्ष का यह प्रदर्शन सुबह से लेकर रात 8 बजे तक, तब तक चलता रहा जब तक कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई बड़े नेताओं को हिरासत में नहीं ले लिया गया. इस खबर में हम आपको सुबह से लेकर देर रात घटने वाले मुख्य घटनाओं के बारे में बताएंगे.
सबसे पहले विपक्ष के तमाम बड़े नेता संसद परिसर में इकट्ठा हुए और फिर लगभग 11 बजे संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग तक मार्च शुरू किया, लेकिन उन्हें साढ़े 11 बजे के करीब नीति आयोग के नजदीक सुरक्षाबलों ने उन्हें रोक लिया और आगे जाने की इजाजत नहीं दी.
सुरक्षाबलों के जरिए रोके जाने के बाद विपक्षी सांसदों ने बैरिकेड भी पार करने की कोशिश की. समाजवादी पार्टी के कई नेता बैरिकेड पर चढ़ गए और आगे जाने की कोशिश करते रहे. लगभग 20 मिनट तक चले गतिरोध के बाद राहुल गांधी खुद पुलिस बैरिकेड के ऊपर चढ़ गए. इस दौरान राहुल गांधी के हाथ में तिरंगा था और बैरिकेड पर खड़े होकर तिरंगा लहराते रहे.
लोकतंत्र के गद्दारो को बचाने के लिए बचे-खुचे लोकतंत्र को घसीटा गया है। हिसाब होगा - एक भी देशद्रोही बख्शा नहीं जाएगा। https://t.co/QbngN1p9y6
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) October 6, 2026
लगातार चलते रहे गतिरोध के साथ, पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लेना शुरू किया. प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओब्रायन समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया और बस में बिठाकर ले जाने लगी, लेकिन विपक्ष के बाकी नेताओं ने बस का घेराव कर लिया. बस सिर्फ कुछ ही मीटर चल पाई थी और आखिर में नेताओं को हिरासत से छोड़ना पड़ा.
इस पूरे घटनाक्रम में उस समय बड़ा ट्विस्ट आया, जब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी नजदीक में ही मौजूद आकाशवाणी भवन में दाखिल होने की कोशिश करने लगे. हालांकि उन्हें गेट पर ही रोक लिया गया. राहुल गांधी का यह कदम इतना हैरान करने वाला था कि प्रदर्शन कर रहे कई नेता भी चौंक कि वो ये क्या कर रहे हैं. बाद में पता चला कि राहुल गांधी आकाशवाणी भवन के अंदर से होते हुए चुनाव आयोग तक जाने की कोशिश कर रहे थे.
तब तक प्रियंका गांधी भी आकाशवाणी भवन के गेट के करीब पहुंच चुकी थीं. इसके बाद राहुल-प्रियंका समेत कई और नेता आकाशवाणी भवन में दाखिल होने में कामयाब हो गए. ये नेता आकाशवाणी भवन के गेट नंबर 4 के पास एक बैंच पर, पेड़ के नीचे काफी देर तक बैठे रहे. प्रदर्शन लंबा होता देख, वहां गद्दे और चाय तक पहुंचाई गई, जिससे साफ हो गया कि विपक्षी नेता कुछ देर के लिए नहीं बल्कि लंबे समय तक बैठने की तैयारी में हैं.
इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन को खत्म कराने की कोशिशें कीं, लेकिन राहुल गांधी ने इससे इनकार कर दिया. देर शाम तक राहुल-प्रियंका समेत तमाम नेता उस जगह पर बने रहे. राहुल गांधी से कहा गया कि इस तरह यहां बैठने की इजाजत नहीं है. इस पर राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें किसी निर्धारित जगह पर धरना देने की जगह दी जाए या चुनाव आयोग तक जाने दिया जाए.
कई घंटे तक चले विरोध के बाद अचानक गहमा-गहमी देखने को मिली और पुलिस ने एक्शन शुरू कर दिया. पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत सभी नेताओं को परिसर से हटाकर हिरासत में लिया गया. बड़े हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद धरना खत्म कराया गया.
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य सांसद को किंग्सवे कैंप में मौजूद न्यू पुलिस लाइन में लाया गया. यहां पर भी प्रियंका गांधी का एक वीडियो आया है, जिसमें वो गेट पर चढ़ती हुई दिखाई दे रही थीं. लगभग दो घंटे के बाद दोनों नेताओं को पुलिस ने वहां से रिहा कर दिया.
इस बीच चुनाव आयोग की तरफ से भी बयान आया और आयोग ने अपने बयान में कहा कि शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल की तरफ से मिलने का औपचारिक अनुरोध नहीं आया. आयोग ने कहा,'आज पहले, मीडिया रिपोर्टों से चुनाव आयोग को पता चला कि कुछ राजनीतिक दल, खासकर, कुछ सांसद (MP) और उनके प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना चाहते हैं, आयोग यह साफ करना चाहता है कि आज शाम 4:00 बजे तक, किसी भी राजनीतिक दल ने अपने प्रतिनिधियों के जरिए चुनाव आयोग से मिलने का औपचारिक अनुरोध नहीं किया था. इसके बाद, शाम करीब 4:00 बजे दिल्ली पुलिस से जानकारी मिली कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल एक ज्ञापन सौंपने के लिए आयोग से मिलना चाहता है.'

आयोग ने अपने बयान में यह भी कहा कि 2025 में, भारत के चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के साथ बैठक करने के लिए एक प्रक्रिया तय की थी. सभी राजनीतिक दलों को इसकी जानकारी दी गई थी और वे इस प्रक्रिया का पालन करते हैं. जब भी किसी राजनीतिक दल का प्रतिनिधिमंडल, या कई दलों का संयुक्त प्रतिनिधिमंडल, आयोग से मिलना चाहता है, तो वे अपने अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए अपॉइंटमेंट लेते हैं. इसके बाद, दोनों पक्षों की आपसी सहमति से तय समय पर बैठक होती है.