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हाथों में खंजरी लेकर 'पार्बती' गाना गुनगुनाते रहे PM मोदी, Gen-Z के साथ भजन क्लबिंग में दिखा अनूठा अंदाज

पीएम नरेंद्र मोदी पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय पार्क में आयोजित भजन क्लबिंग कार्यक्रम में शामिल हुए. जहां वो गुजराती और हिंदी भजनों पर खंजरी बजाते दिखे.

Written By Harsh Singh
Published: Sep 25, 2026, 08:27 PM IST | Updated: Sep 26, 2026, 04:57 PM IST
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PM नरेंद्र मोदी ने आज दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय पार्क में भजन क्लबिंग कार्यक्रम में हिस्सा लिया है. पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर आयोजित इस खास कार्यक्रम में जब फिल्म हनुमान अंश फेम सिंगर साधु तिवारी ने मंच से अपना चर्चित भक्ति गीत जब जिद पर आ गई पार्वती पेश किया, तो पीएम मोदी इसे बेहद ध्यान से सुनते नजर आए.

भक्ति के माहौल में पीएम मोदी पूरी तरह से रंगे दिखे और उन्होंने गुजराती व हिंदी भजनों की धुन पर मग्न होकर युवाओं के बीच बैठकर हाथों में झाल व खंजरी बजाई. युवाओं के साथ बैठकर पीएम मोदी ने न केवल भजनों का आनंद लिया, बल्कि भक्ति गीतों को गुनगुनाते हुए युवाओं का हौसला भी बढ़ाया.

क्या है भजन क्लबिंग? 

भजन क्लबिंग आजकल की नई पीढ़ी और Gen-Z के बीच बेहद मशहूर हो रहा है. इसमें भजन और कीर्तन को नाइट-क्लब जैसी मॉडर्न वाइब के साथ गाया जाता है.

युवा रात में डिस्को और डीजे बीट्स के बजाय भक्ति संगीत पर नाचते और ध्यान लगाते हैं. ये नया कल्चर युवाओं को दिमागी शांति और आध्यात्मिकता से जोड़ने का बहुत ही मजेदार तरीका बन चुका है.

ऑस्ट्रेलिया दौरे और मन की बात में भी कर चुके हैं तारीफ

पीएम मोदी इस नए ट्रेंड के बड़े समर्थक रहे हैं. उन्होंने इसी साल अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मेलबर्न में भी भजन क्लबिंग का जिक्र किया था. तब उन्होंने तारीफ की थी कि कैसे भारत के युवा अपनी सांस्कृतिक जड़ों को आधुनिक जीवनशैली से जोड़ रहे हैं.

इससे पहले जनवरी में अपने मन की बात कार्यक्रम में भी उन्होंने Gen-Z के इस भक्ति अवतार की जमकर सराहना की थी. पीएम मोदी का मानना है कि ये बदलाव भारत की संस्कृति को जिंदा रखने में मदद कर रहा है.

रहता है नशा-मुक्त माहौल

नाम में भले ही क्लबिंग शब्द जुड़ा है, लेकिन ये जगह बाकी नाइट-क्लब्स से बिल्कुल अलग होती है. ये कार्यक्रम पूरी तरह से सात्विक और नशा-मुक्त माहौल में आयोजित किए जाते हैं.

यहां किसी भी तरह के नशे या शराब के लिए कोई जगह नहीं होती है. इसमें शामिल होने वाले लोग सिर्फ दर्शक बनकर बैठते नहीं हैं. बल्कि वे खुद भी ढोलक और ताली बजाते हैं, गाते हैं और पूरे दिल से कीर्तन में झूमते हैं. इससे लोगों को बहुत अपनापन महसूस होता है.

मानसिक शांति और तनाव दूर करने का सबसे बेस्ट तरीका

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में युवाओं पर काम और पढ़ाई का बहुत तनाव रहता है. ऐसे में भजन क्लबिंग उनके लिए तनाव दूर करने का एक बेहतरीन जरिया बन गया है.

तेज संगीत और सकारात्मक भजनों के बीच रहकर युवाओं का दिमाग तरोताजा हो जाता है. गाना गाने से मन में खुशी और शांति का अहसास होता है. यही वजह है कि हफ्ते भर की थकान उतारने के लिए युवा इन सात्विक कार्यक्रमों की तरफ तेजी से खिंचे चले आ रहे हैं.
 

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About the Author

हर्ष सिंह जी न्यूज डिजिटल में एक अनुभवी और धारदार शैली के पत्रकार हैं. उन्होंने मार्च 2024 में जी न्यूज जॉइन किया था. वर्तमान में हर्ष धर्म और ज्योतिष से जुड़ी खबरों की खास कवरेज कर रहे हैं. वे देश-दुनिया के धार्मिक आयोजनों, अध्यात्म और ज्योतिषीय गणनाओं से जुड़े जरूरी अपडेट्स दर्शकों तक पूरी सटीकता के साथ पहुंचाते हैं. हर्ष को उनकी फैक्ट-आधारित और भरोसेमंद लेखन शैली के लिए जाना जाता है.बनारस के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन करने वाले हर्ष अपनी पूरी ऊर्जा और समझ के साथ धर्म-कर्म और ऐस्ट्रो की दुनिया के खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं.अगर आप हर्ष सिंह से संपर्क करना चाहते हैं या उनसे जुड़ा कोई सुझाव साझा करना चाहते हैं, तो उन्हें इस ईमेल आईडी पर लिख सकते हैं: Harsh.singh@India.com
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