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PM नरेंद्र मोदी ने आज दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय पार्क में भजन क्लबिंग कार्यक्रम में हिस्सा लिया है. पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर आयोजित इस खास कार्यक्रम में जब फिल्म हनुमान अंश फेम सिंगर साधु तिवारी ने मंच से अपना चर्चित भक्ति गीत जब जिद पर आ गई पार्वती पेश किया, तो पीएम मोदी इसे बेहद ध्यान से सुनते नजर आए.
भक्ति के माहौल में पीएम मोदी पूरी तरह से रंगे दिखे और उन्होंने गुजराती व हिंदी भजनों की धुन पर मग्न होकर युवाओं के बीच बैठकर हाथों में झाल व खंजरी बजाई. युवाओं के साथ बैठकर पीएम मोदी ने न केवल भजनों का आनंद लिया, बल्कि भक्ति गीतों को गुनगुनाते हुए युवाओं का हौसला भी बढ़ाया.
भजन क्लबिंग आजकल की नई पीढ़ी और Gen-Z के बीच बेहद मशहूर हो रहा है. इसमें भजन और कीर्तन को नाइट-क्लब जैसी मॉडर्न वाइब के साथ गाया जाता है.
युवा रात में डिस्को और डीजे बीट्स के बजाय भक्ति संगीत पर नाचते और ध्यान लगाते हैं. ये नया कल्चर युवाओं को दिमागी शांति और आध्यात्मिकता से जोड़ने का बहुत ही मजेदार तरीका बन चुका है.
सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में अग्रसर नया भारत!
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi ने दिल्ली में आयोजित 'भजन क्लबिंग' में सहभागिता कर अपनी जड़ों से जुड़ती देश की युवा शक्ति का उत्साहवर्धन किया।
भक्ति, संगीत और आधुनिकता के इस अभूतपूर्व संगम में युवाओं का यह उत्साह यह सिद्ध करता… pic.twitter.com/zQdkzDrbwC— BJP (@BJP4India) September 25, 2026
पीएम मोदी इस नए ट्रेंड के बड़े समर्थक रहे हैं. उन्होंने इसी साल अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मेलबर्न में भी भजन क्लबिंग का जिक्र किया था. तब उन्होंने तारीफ की थी कि कैसे भारत के युवा अपनी सांस्कृतिक जड़ों को आधुनिक जीवनशैली से जोड़ रहे हैं.
इससे पहले जनवरी में अपने मन की बात कार्यक्रम में भी उन्होंने Gen-Z के इस भक्ति अवतार की जमकर सराहना की थी. पीएम मोदी का मानना है कि ये बदलाव भारत की संस्कृति को जिंदा रखने में मदद कर रहा है.
नाम में भले ही क्लबिंग शब्द जुड़ा है, लेकिन ये जगह बाकी नाइट-क्लब्स से बिल्कुल अलग होती है. ये कार्यक्रम पूरी तरह से सात्विक और नशा-मुक्त माहौल में आयोजित किए जाते हैं.
यहां किसी भी तरह के नशे या शराब के लिए कोई जगह नहीं होती है. इसमें शामिल होने वाले लोग सिर्फ दर्शक बनकर बैठते नहीं हैं. बल्कि वे खुद भी ढोलक और ताली बजाते हैं, गाते हैं और पूरे दिल से कीर्तन में झूमते हैं. इससे लोगों को बहुत अपनापन महसूस होता है.
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में युवाओं पर काम और पढ़ाई का बहुत तनाव रहता है. ऐसे में भजन क्लबिंग उनके लिए तनाव दूर करने का एक बेहतरीन जरिया बन गया है.
तेज संगीत और सकारात्मक भजनों के बीच रहकर युवाओं का दिमाग तरोताजा हो जाता है. गाना गाने से मन में खुशी और शांति का अहसास होता है. यही वजह है कि हफ्ते भर की थकान उतारने के लिए युवा इन सात्विक कार्यक्रमों की तरफ तेजी से खिंचे चले आ रहे हैं.