चिन्मय मिशन के 75 वर्षः 'व्यक्तिगत उन्नति को राष्ट्र उन्नति का माध्यम बनाएं', युवाओं से PM मोदी की अपील
चिन्मय अमृत महोत्सव को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 25 वर्षों से मैं सरकार के मुखिया के नाते अनावृत देश की सेवा कर रहा हूं. इस यात्रा में मेरे प्रयासों और नीतियों के केंद्र में देश के युवा ही हैं.
भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने देश के युवाओं से अपनी ऊर्जा राष्ट्र निर्माण में खर्च करने की अपील की. पीएम मोदी ने चिन्मय महाराज को याद करते हुए बताया कि उनसे आखिरी मुलाकात में जो बातचीत हुई थी, उसका मूल था युवा शक्ति का निर्माण. युवा शक्ति के जरिए सशक्त और समर्थ भारत का निर्माण. गुरुदेव से मिलने के कुछ वर्षों के बाद मुझे गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सेवा करने का जनता-जनार्दन ने आशीर्वाद दिया. तब से लेकर आजतक पिछले 25 वर्षों से मैं सरकार के मुखिया के नाते अनावृत देश की सेवा कर रहा हूं. गुरुजी का आशीर्वाद मेरे साथ है. इस यात्रा में मेरे प्रयासों और नीतियों के केंद्र में देश के युवा ही हैं.
भारत की संस्कृति का वर्णन किया
पीएम ने कहा कि मुझे खुशी है कि चिन्मय अमृत महोत्सव में भी युवाओं ने बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं. हमारे कई युवा साथियों ने करीब 300 वर्षों तक 40 हजार किमी. की यात्रा की है. इस दौरान एक लाख से अधिक युवाओं से संपर्क किया गया है. मैं इस अद्भुत प्रयास के लिए पूरी टीम को बधाई देता हूं. पीएम मोदी ने कहा कि हमारे उपनिषदों का कथन है- 'वयम् अमृतस्य पुत्रः' अर्थात् हम अमृत की संतान हैं. ये केवल एक कथन ही नहीं है. यह हमारा सांस्कृतिक दर्शन है. इसका मतलब यह नहीं है कि हम शरीर से अमर हैं. इसका अर्थ है कि हमारी चेतना अमर है. हमारा ज्ञान और बोध अमर है. इसी बोध के कारण भारत भी हजारों वर्षों से अमर बना हुआ है, क्योंकि भारत शब्द का अर्थ ज्ञान और प्रकाश के अनुसंधान में लगा हो.
कैसे आया अमृत महोत्सव का विचार?
पीएम मोदी ने कहा कि जब आजादी के 75 वर्ष मनाने का का अवसर आया, तो मेरे मन में विचार आया कि हमें इस अवसर को विकसित भारत का प्रेरणामंत्र तो बनाना ही है, हमें भारत के उस स्वरूप को भी जीवंत करना है. जो सहस्त्र शताब्दियों के अपने अनुभवों से युगों-युगों के लिए मानवता की चिंता कर सकता है. इसलिए मैंने उस उत्सव को मनाने के लिए अमृत महोत्सव के रूप में मनाने का आह्वान किया था. देखिए समय के साथ-साथ एक के बाद एक अद्भुत यात्राएं उस संकल्प से जुड़ती चली जा रही हैं. कितने ही आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संगठनों ने इस दौरान अपनी यात्रा के अहम पड़ावों पर अमृत संकल्प लिए.
गुरुदेव को याद करके भावुक हुए PM
पीएम मोदी ने कहा कि हमारे संतो का मेरे प्रति विशेष स्नेह और आशीर्वाद है, क्योंकि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं है. ये चिन्मय विचार है. जिसकी स्थापना एक चिन्मय ऋषि ने की थी. इतने दशकों से इसकी यात्रा भी चिन्मय संकल्पों से भरी रही है. जो चिन्मय है, वो स्वाभाविक ही अमर है. आधुनिक टेक्नोलॉजी के जरिए इस आयोजन इसे और भी जीवंत कर दिया. उनके होलोग्राम से संवाद करने का सौभाग्य मिला. ऐसा लग रहा था कि जैसे में 33 वर्ष पीछे पहुंच गया हू. 1993 में वडोदरा में गुरुदेव से मेरी मुलाकात, उनके साथ हुई बातचीत, उनका स्नेह, आज सबकुछ आंखों के सामने आ गया. एक पल के लिए ऐसा लगा, जैसे में फिर से गुरुदेव के सानिध्य में आ गया हूं.