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पंजाब में नशा मुक्ति कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के अंतिम संस्कार से पहले पीड़ित पिता ने अपनी एक मांग को लेकर अन्न-जल त्यागने का ऐलान किया है. इससे पहले शुक्रवार को कई दिनों से चल रहे गतिरोध टूटने और धरना प्रदर्शन खत्म होने के बाद परविंदर का शव पोस्टमार्टम के लिए चंडीगढ़ पीजीआई लाया गया. इसी दौरान उनके पिता ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली पंजाब सरकार से किसी भी तरह की मदद लेने से इनकार कर दिया है. उन्होंने अपने परिवार के सम्मान की बात को लेकर अन्न-जल त्यागने यानी आमरण अनशन पर बैठने का संकल्प लिया है. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, 'जब तक कि मानसा के एसएसपी को नहीं बदला जाता, तब तक वे कुछ भी नहीं खाएंगे.'
मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड के 23वें दिन परिवार पोस्टमॉर्टम के लिए राजी हुआ था. हालांकि, अंतिम संस्कार किस दिन किया जाएगा, यह अभी साफ नहीं हुआ है.
इस तरह मानसा के ड्रग्स एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में बीते तीन हफ्तों से जारी धरने के खत्म होने के बाद मामले ने फिर से तूल पकड़ लिया है. इससे पहले पंजाब सरकार और परविंदर सिंह झोटा के परिवार के बीच मांगों को लेकर सहमति बनने का दावा किया गया था कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के इस्तीफे की मांग को छोड़कर परिवार की बाकी सभी मांगें मान ली गई हैं. इसके बाद संघर्ष कमेटी ने धरना खत्म करने पर सहमति जताई थी.
दवा की दुकानों पर नशीली दवाओं की गैर-कानूनी बिक्री के खिलाफ आवाज उठाने के लिए जाने जाने वाले झोटा की पंजाब के मानसा में एक व्यस्त बाजार में एक मेडिकल स्टोर के अंदर दिनदहाड़े गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. बताया गया कि झोटा मेडिकल स्टोर पर कथित तौर पर नशीली दवाओं की बिक्री का विरोध करने पहुंचे थे. इसी दौरान उन्हें गोली मार दी गई. 13 अक्टूबर को हुई इस वारदात ने एक बार फिर पंजाब में नशा माफिया के एक्टिव होने और युद्ध नशिया दे विरुद्ध जैसे अभियानों की पोल खोल कर रख दी थी.
इस हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी. झोटा के शव का पोस्टमार्टम 6 नवंबर को हो रहा है. पार्थिव शरीर को चंडीगढ़ भेजने से पहले सीबीआई की टीम वहां मौजूद थी और परविंदर झोटा के पिता भीम सिंह की उपस्थिति में धरना स्थल पर आत्मा की शांति के लिए अरदास भी हुई थी.