एक ट्रक चावल के लिए दो राज्यों की पुलिस आ गई आमने-सामने, जानिए फिर क्या हुआ
ओडिशा और आंध्र प्रदेश सीमा पर एक बार फिर विवाद गहरा गया है, जहां चेकपोस्ट पर दोनों राज्यों के पुलिस अधिकारी आमने-सामने आ गए. सीमावर्ती इलाकों में बढ़ते तनाव और प्रशासनिक हलचल से जुड़ी पूरी अपडेट जानिए.
ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा पर स्थित विवादित कोटिया क्षेत्र में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. मंगलवार को कोरापुट जिले के कोटिया स्थित नेरेल्लावलासा चेकपोस्ट पर ओडिशा और आंध्र प्रदेश के पुलिसकर्मी आमने-सामने आ गए. दोनों राज्यों की पुलिस के बीच हुई तीखी बहस और तनातनी से इलाके में माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है. यह घटना तब घटी जब ओडिशा पुलिस ने आंध्र प्रदेश के पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर जबरदस्ती इलाके में घुसने से रोक दिया.
मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब इस तीखी बहस और विवाद के दौरान कोरापुट के सब-कलेक्टर और पट्टंगी के तहसीलदार भी मौके पर मौजूद थे. रिपोर्ट्स के अनुसार, इन प्रशासनिक अधिकारियों की भी आंध्र प्रदेश पुलिस के लोगों के साथ तीखी कहासुनी और बहस हुई. सीमावर्ती इलाकों में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का इस तरह आमने-सामने आना इस बात का संकेत है कि दोनों राज्यों के बीच यह सीमा विवाद कितना संवेदनशील रूप ले चुका है.
एक ट्रक चावल को लेकर बढ़ा विवाद
यह पूरा टकराव एक दिन पहले हुई एक घटना की कड़ी माना जा रहा है. दरअसल, इससे एक दिन पहले ओडिशा पुलिस ने कोटिया पंचायत के नेरेल्लावलासा इलाके में आंध्र प्रदेश नंबर के एक रजिस्टर्ड ट्रक को रोका था. यह ट्रक चावल लेकर जा रहा था और इसके बारे में खबर मिली थी कि यह चावल आंध्र प्रदेश के किसी गोदाम से पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) यानी जन वितरण प्रणाली के तहत ले जाया जा रहा था. ओडिशा प्रशासन का मानना है कि उनके अधिकार क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां गैरकानूनी हैं, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया और तनाव की शुरुआत हुई.
5 नवंबर के पंचायत चुनावों के चलते कड़ी सुरक्षा
हालात की नजाकत को देखते हुए और सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में 5 नवंबर को पंचायत चुनाव होने वाले हैं. चुनावों से ठीक पहले कोटिया इलाके में सुरक्षा के बेहद कड़े इंतज़ाम किए गए हैं. प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए इलाके में पुलिस की सात प्लाटून तैनात कर दी हैं. इसके अलावा, सीमा पर बने तीन मुख्य चेक गेटों पर चौबीसों घंटे पैनी नज़र रखी जा रही है ताकि स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो.
यह भी पढ़ेंः ZEE SPECIAL: दीया मिर्जा के पटाखे न फोड़ने वाले वीडियो पर क्यों मचा बवाल? VHP नेता ने दिए 5 धधकते सवालों के जवाब
प्रशासन और मजिस्ट्रेटों की पैनी नजर
तनावपूर्ण माहौल को शांत रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने कड़े प्रशासनिक उपाय किए हैं. हालात पर लगातार नज़र रखने के लिए नौ एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेटों को ड्यूटी पर लगाया गया है, जो बारी-बारी से इलाके की हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं. हालांकि, इस तनाव के बीच अधिकारी केवल सख्ती तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जनहित के कामों पर भी पूरा ध्यान दे रहे हैं. नेरेल्लावलासा, फातुसिनेरी और फागुनसिनेरी जैसे इलाकों में मेडिकल कैंप लगाए जा रहे हैं और स्थानीय लोगों के बीच पब्लिक अवेयरनेस (जनजागरूकता) गतिविधियां चलाई जा रही हैं ताकि जनता को राहत मिल सके.
सीमा पर लगातार बनी हुई है चिंता
यह ताजा घटनाक्रम कोई अचानक हुई घटना नहीं है, बल्कि यह उस लंबी खींचतान का हिस्सा है जो बॉर्डर पर आंध्र प्रदेश की बढ़ती गतिविधियों को लेकर लगातार बनी हुई है. ओडिशा के अधिकारी लंबे समय से इन इलाकों पर अपनी नज़र बनाए हुए हैं और सीमावर्ती गतिविधियों को लेकर सतर्क हैं. ओडिशा के अधिकारी लगातार कोटिया के स्थानीय निवासियों से बातचीत कर रहे हैं ताकि उनका विश्वास जीता जा सके और वे किसी भी बाहरी प्रभाव या भ्रम में न आएं. बहरहाल, 5 नवंबर के चुनावों के नज़दीक आने के साथ ही कोटिया में हर किसी की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में दोनों राज्यों के बीच प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर क्या रुख रहता है.
यह भी पढ़ेंः '24 घंटे हो गए, डरिए मत...मोहन भागवत को जज बना लीजिए', राहुल ने फिर याद दिलाया PM मोदी को डिबेट वाला चैलेंज