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ZEE SPECIAL: दीया मिर्जा के पटाखे न फोड़ने वाले वीडियो पर क्यों मचा बवाल? VHP नेता ने दिए 5 धधकते सवालों के जवाब

दीया मिर्जा के पटाखे न फोड़ने की अपील वाले वीडियो पर मचा बवाल. जानिए इस विवाद पर जनता के 5 तीखे सवालों पर VHP नेता का जवाब.

ZEE SPECIAL: दीया मिर्जा के पटाखे न फोड़ने वाले वीडियो पर क्यों मचा बवाल? VHP नेता ने दिए 5 धधकते सवालों के जवाब
Image Credit: क्यों हटाया गया दीया मिर्जा का दिवाली संदेश वाला वीडियो? VHP नेता राज नायर बताई ये वजह

बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज से बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा का दिवाली पर पटाखे न फोड़ने की अपील वाला वीडियो हटा दिया है. मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम की आपत्ति के बाद बीएमसी प्रशासन ने रविवार को यह कदम उठाया. वीडियो हटाए जाने के बाद दीया मिर्जा ने न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में कहा कि वायु प्रदूषण सीधे तौर पर जनस्वास्थ्य से जुड़ा मामला है और यह वीडियो बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत जनहित में तैयार किया गया था.

इस विवाद की शुरुआत मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर किए गए एक पोस्ट से हुई. उन्होंने बीएमसी के आधिकारिक अकाउंट को टैग करते हुए लिखा कि हमें दिवाली मनाने के तरीके पर किसी से सीख लेने की जरूरत नहीं है. इसके कुछ ही घंटों के भीतर बीएमसी ने दीया मिर्जा के संदेश वाला वीडियो अपने एक्स और इंस्टाग्राम पेज से हटा दिया. हालांकि, इसी अभियान के तहत जारी किए गए अभिनेत्री माधुरी दीक्षित और क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे के वीडियो बीएमसी के सोशल मीडिया हैंडल पर अब भी बरकरार हैं.

इस पूरे घटनाक्रम पर विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ता श्रीराज नायर ने अपनी बात रखी है. आइए आपको बताते हैं इस मुद्दे पर Zee News के नायर से 5 सवाल और उनके जवाब

सवाल: क्या दीया मिर्जा का यह वीडियो हिंदू त्योहारों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया था?

राज नायर का जवाबः दीया मिर्जा के पुराने बयानों को देखें तो उनका रुख हमेशा ऐसा ही रहा है. जहां तक पर्यावरण रक्षा की बात है, तो हिंदू समाज को पर्यावरण का पाठ पढ़ाने की उन्हें कोई आवश्यकता नहीं है. हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के गठन के 100 वर्ष पूरे हुए हैं और संघ के 'पंच परिवर्तन' के विजन में पर्यावरण संरक्षण को अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है. हिंदू जीवनशैली में पर्यावरण पहले से रचा-बसा है.

सवाल: आखिर हिंदू त्योहारों के समय ही कुछ चुनिंदा कलाकार इस तरह के सवाल क्यों उठाने लगते हैं?

राज नायर का जवाबः हमारे धर्म, शास्त्र और वेद प्राचीन काल से ही हमें प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करना सिखाते आए हैं. दुख की बात यह है कि दीया मिर्जा और उन जैसे कुछ चुनिंदा कलाकार सिर्फ हिंदू त्योहारों के समय ही सक्रिय होते हैं. जब ईद के मौके पर पानी का बेहिसाब इस्तेमाल होता है या कुर्बानी के नाम पर सड़कें लाल हो जाती हैं, तब ये लोग चुप्पी साधे रहते हैं. क्रिसमस पर लाखों पेड़ काटे जाते हैं, तब भी कोई आवाज नहीं उठती. यहां तक कि 'पेटा' जैसी संस्थाएं भी तभी सामने आती हैं जब मुद्दा हिंदुओं से जुड़ा होता है. यह दोहरा रवैया साफ दिखाई देता है.

सवाल: इस अभियान में माधुरी दीक्षित, अजिंक्य रहाणे और एक मराठी अभिनेत्री भी शामिल थीं. AIMIM का आरोप है कि दीया के नाम में 'मिर्जा' जुड़ा होने के कारण बीजेपी को आपत्ति हुई और केवल उनका वीडियो डिलीट कराया गया. इस पर आपका क्या कहना है?

राज नायर का जवाबः यह नाम की बात बिल्कुल नहीं है. दीया मिर्जा एक तरह से 'हैबिचुअल ऑफेंडर' बन चुकी हैं, जो बार-बार और चुन-चुनकर हिंदू धर्म, हिंदू त्योहारों और साधु-संतों को निशाना बनाती आई हैं. इसीलिए आपत्ति सिर्फ उनके बयान पर दर्ज कराई गई. जिन विषयों पर उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं है, उन पर टिप्पणी करने से उन्हें बचना चाहिए. उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) पर बिना समझे बयान दिए, NEET परीक्षा जैसे गंभीर विषय पर बिना जानकारी के loose statement दिए. वे लगातार ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर बोलती रही हैं.

सवाल: शब-ए-बारात, 31 दिसंबर और नए साल के जश्न पर भी तो जमकर आतिशबाजी होती है, तब ये लोग खामोश क्यों रहते हैं?

राज नायर का जवाबः असली मुद्दा यही 'सिलेक्टिव अप्रोच' है. शब-ए-बारात हो, 31 दिसंबर हो या न्यू ईयर का जश्न—इन मौकों पर भी बड़े पैमाने पर पटाखे जलाए जाते हैं, लेकिन तब पर्यावरण प्रेमियों को प्रदूषण दिखाई नहीं देता. कोई एक शब्द तक नहीं बोलता. लेकिन जब दिवाली पर सिर्फ दो दिन पटाखे जलाए जाते हैं, तो वह किसी से बर्दाश्त नहीं होता और पर्यावरण की चिंता सताने लगती है.

सवाल: क्या यही वजह है कि जनता में इस तरह के बयानों को लेकर नाराजगी है?

राज नायर का जवाबः बिल्कुल. दीया मिर्जा बार-बार हिंदू त्योहारों के समय धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम करती हैं. ऐसे में आम जनता के मन में उनके प्रति नाराजगी आना पूरी तरह स्वाभाविक है. सवाल यह भी उठता है कि इन लोगों ने खुद धरातल पर पर्यावरण के लिए ऐसा क्या काम किया है, जो अचानक हिंदू त्योहार आते ही इन्हें पर्यावरण की इतनी गहरी चिंता सताने लगती है?

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About the Author

Ravindra Pratap Singh

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रवींद्र प्रताप सिंह ने साल 2015 में जागरण.कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा मौजूदा समय वो ज़ी न्यूज डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. अगस्त 2025 में उन्होंने ज़ी न्यूज ज्वाइन किया है. रवींद्र देश और दुनिया की खबरों के अलावा खेलों में क्रिकेट जगत और क्राइम की खबरों पर बेहतरीन पकड़ रखते हैं. इसके पहले रवींद्र रिपब्लिक भारत में इवनिंग शिफ्ट के इंचार्ज रहे और शाम की शिफ्ट संभालते हुए होम पेज की जिम्मेदारी रवींद्र के ऊपर थी. उससे पहले रवींद्र ने जनसत्ता और न्यूज नेशन में भी शाम की शिफ्ट और होम पेज की जिम्मेदारी बखूबी निभाई. इसके पहले रवींद्र ने 5 सालों तक पी7 और लाइव इंडिया जैसे न्यूज चैनलों में काम किया था. रवींद्र आकाशवाणी में काम करने का अनुभव रखते. अवध यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएट रवींद्र पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. आप रवींद्र से जुड़ने के लिए Ravindra.Singh@India.com पर मेल कर सकते हैं या फिर फेसबुक पर संपर्क करने के लिए https://www.facebook.com/pintu.singh.397 और एक्स पर https://x.com/rs66533 रवींद्र से संपर्क किया जा सकता है. 
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