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मरीजों को ठगने का खेल खत्म: AI विज्ञापन बैन, NMC की नई गाइडलाइंस से फर्जी इन्फ्लुएंसर्स बेचैन

नेशनल मेडिकल कमीशन ने अब नए नियम जारी कर दिए हैं, जिसके तहत अब अस्पताल और मेडिकल सेंटर्स गारंटीड इलाज का दावा नहीं कर पाएंगे. साथ ही एआई के इस्तेमाल पर सख्ती की गई है. अस्पतालों को जानकारी का सोर्स तक बताना होगा.

Written By Rachit Kumar
Published: Oct 08, 2026, 07:36 AM IST | Updated: Oct 08, 2026, 07:55 AM IST
Image Credit: एनएमसी के चाबुक से मरीजों को सही जानकारी मिलेगी.
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डॉक्टरों और अस्पतालों के सोशल मीडिया प्रमोशन पर NMC ने नए नियम जारी किए हैं. नए नियमों के तहत डॉक्टर और अस्पताल सोशल मीडिया के जरिए भ्रामक प्रचार या मरीज जुटाने की कोशिश नहीं कर सकेंगे. नियमों का दायरा इंस्टाग्राम, यू-ट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म,  इन्फ्लुएंसर्स, स्पॉन्सर्ड कंटेंट और AI आधारित प्रमोशन तक भी बताया गया है. यानी सोशल मीडिया पर मरीजों को आकर्षित करने के लिए भ्रामक मार्केटिंग पर रोक के अलावा मेडिकल विज्ञापन पर ज्यादा जवाबदेही रहेगी.

अस्पताल अब मरीजों के टेस्टिमोनियल और प्रशंसापत्र का इस्तेमाल नहीं करेंगे. वे पेड और फर्जी रिव्यू नहीं करा पाएंगे. ना तो इलाज के गारंटीड नतीजों का दावा कर पाएंगे और ना ही भ्रामक या बढ़ा-चढ़ाकर दावे. साथ ही मरीजों की कहानियों का प्रमोशनल इस्तेमाल भी नहीं किया जा सकेगा.

NMC ने अस्पतालों/मेडिकल संस्थानों और रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के लिए विज्ञापन और पब्लिक कम्युनिकेशन से जुड़ी गाइडलाइंस पर एक सार्वजनिक सूचना जारी की है. इसका मकसद मेडिकल पेशे की गरिमा बनाए रखना, हेल्थकेयर के कमर्शियलाइजेशन को रोकना और मरीजों को गुमराह करने वाले मेडिकल दावों से बचाना है.

AI पर भी कसी गई लगाम

इन गाइडलाइंस में कमर्शियल प्रमोशन के लिए AI के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई गई है. कमर्शियल फायदे के लिए AI से बनाए गए प्रमोशन कैंपेन पर रोक है. AI से बना कोई भी प्रमोशनल कंटेंट जो इन गाइडलाइंस के तहत आता हो, उस पर सोर्स मार्क करना जरूरी है. इसमें साफ तौर पर बताया जाना चाहिए कि कंटेंट AI से बनाया गया है. RMP या अस्पताल AI से बनाए गए कंटेंट का इस्तेमाल बीमारी की पहचान या इलाज के बारे में गुमराह करने वाली ऐसी जानकारी फैलाने के लिए नहीं कर सकते, जिसे साबित न किया जा सके.'

गाइडलाइंस में विज्ञापन और कम्युनिकेशन की परिभाषा दी गई है, जिसमें सोशल मीडिया, वेबसाइट, ब्लॉग, व्हाट्सएप, टेलीग्राम, फेसबुक और दूसरे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म, पॉडकास्ट और इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग शामिल हैं. इनमें डिजिटल मार्केटिंग कैंपेन, स्पॉन्सर्ड पोस्ट, AI से प्रमोशन, पब्लिक इंटरव्यू, प्रमोशन के मकसद से लिखे गए न्यूज आर्टिकल, ऑनलाइन हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म और ऑडियो-विजुअल व डिजिटल कम्युनिकेशन भी शामिल हैं. NMC ने यह भी साफ किया है कि थर्ड-पार्टी प्रमोटर या इन्फ्लुएंसर का इस्तेमाल करके जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता. उसने कहा है कि इन्फ्लूएंसर के जरिए पब्लिश करने से जिम्मेदारी नहीं बदलती.

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About the Author

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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