धरती की ओर बढ़ रहा NASA का 1.5 टन का टेलीस्कोप, भारत के इन बड़े शहरों पर भी मंडरा रहा मलबे का खतरा
अंतरिक्ष से नासा का एक टेलीस्कोप धरती की तरफ आ रहा है. हैरानी की बात यह है कि इसकी जद में भारत के भी कई शहर हैं. नासा ने इसको लेकर सभी तरह की चेतावनियां जारी कर दी हैं.
अंतरिक्ष की दुनिया को जानने के लिए पृथ्वी से कई तरह के उपकरण स्पेस में भेजे जाते हैं. हालांकि, कई बार यह इंसानों के लिए मुश्किलें भी पैदा कर देते हैं. हाल में भी कुछ ऐसा हो रहा है. अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA का एक टेलीस्कोप जल्द ही पृथ्वी की कक्षा में दाखिल होने वाला है. इसका वजन करीब 1.5 टन बताया जा रहा है. भारत के लिए खतरे की बात यह है कि इसका मलबा भारत के हैदराबाद और मुंबई जैसे शहरों में गिर सकता है.
दरअसल जब यह टेलीस्कोप वायुमंडल में एंट्री करेगा तो बहुत तेज गर्मी की वजह से यह जलकर नष्ट हो जाएगा. हालांकि, टंगस्टन से बने कुछ भारी पुर्जे और टेलीस्कोप के शीशे के कुछ हिस्से धरती तक पहुंच सकते हैं. नासा के अंदाजे के मुताबिक इससे किसी भी इंसान को कोई खतरा नहीं है. नासा ने अनुमान जाहिर किया है कि 21000 में से सिर्फ 1 फीसद ही ऐसी आशंका है कि किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचा सकता है. अधिकतर संभावना यही है कि इसका मलबा अगर पृथ्वी पर गिरा भी, तो समुद्र में गिरेगा.
मलबा कहां-कहां गिर सकता है?
इस टेलीस्कोप के मलबा गिरने के बारे में NASA ने बताया कि भूमध्य रेखा से 20.6 डिग्री उत्तर और 20.6 डिग्री दक्षिण अक्षांश के बीच मलबा गिर सकता है और इस अक्षांश के बीच में भारत के अलावा अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और दक्षिण अमेरिका के हिस्से भी शामिल हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि NASA ने यह भी बताया कि टेलीस्कोप के ज्यादातर हिस्से वायुमंडल में ही जलकर खत्म हो जाएंगे, लेकिन कुछ भारी पुर्जों के धरती तक पहुंचने का खतरा है.
कौन सा टेलीस्कोप धरती पर गिरने वाला है?
NASA के इस टेलीस्कोप का नाम नील गेहरल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी है. इसे 20 नवंबर 2004 को अंतरिक्ष में भेजा गया था. इस टेलीस्कोप को सिर्फ 2 साल के लिए भेजा गया था, लेकिन तकरीबन 22 वर्षों तक अपनी जिम्मेदारियां निभाता रहा. अब नासा का कहना है कि यह 4 नवंबर 2026 को पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल हो सकता है. भारत के समय के हिसाब से देखें, तो यह 4 नवंबर 2026 को दोपहर 2 बजे के आसपास बताया जा रहा है.
- इसने 2000 से ज्यादा गामा-रे विस्फोटों का अध्ययन किया.
- करीब 1400 सुपरनोवा यानी तारों के विस्फोटों को देखा.
- ब्लैक होल, धूमकेतु और क्षुद्रग्रहों पर भी महत्वपूर्ण जानकारियां इकट्ठा कीं.
- इसकी खासियत थी कि अंतरिक्ष में कहीं विस्फोट होने पर यह तेजी से अपनी दिशा बदलकर उस घटना का अध्ययन कर सकता था.