मणिपुर में तनाव के बीच बड़ा फैसला: गृह मंत्रालय ने 13 इलाकों को छोड़ पूरे राज्य को किया 'डिस्टर्ब एरिया' घोषित
मणिपुर के 13 खास पुलिस थाना क्षेत्रों को इस फैसले के दायरे से बाहर रखा गया है. इसका मतलब ये है कि इन 13 इलाकों को छोड़कर पूरे राज्य में अफस्पा का कानून पहले की तरह चलता रहेगा.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मणिपुर के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को छोड़कर बाकी पूरे राज्य को 'अशांत क्षेत्र' घोषित कर दिया है. यह डिसीजन AFSPA यानी आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर्स एक्ट के तहत लिया गया है. यह फैसला 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा, जो 31 मार्च 2027 तक जारी रहेगा. हालांकि, अगर सरकार चाहे तो हालात को देखते हुए इसे तय समय से पहले भी वापस ले सकती है.
जिन इलाकों को 'अशांत क्षेत्र' घोषित किया जाता है, वहां तैनात सुरक्षाबलों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कुछ खास अधिकार मिल जाते हैं, जिनका इस्तेमाल वे तय नियमों और हालात के हिसाब से करते हैं.
मणिपुर में तनाव क्यों?
दरअसल, इस वक्त मणिपुर में तनाव है. गुरुवार यानी 24 सितंबर को भारत-म्यांमार सीमा से सटे कामजोंग जिले में हथियारबंद उग्रवादियों ने हमला कर नगा समुदाय के चार लोगों की जान ले ली. इस वारदात के विरोध में प्रमुख नगा संगठन ने इलाके में 24 घंटे के आपातकालीन बंद की घोषणा की है, वहीं दूसरी तरफ कांगपोकपी जिले के माकुई इलाके में करीब 12 घंटे तक जमकर उपद्रव हुआ, जहां नगा समुदाय के कम से कम 41 घरों और एक चर्च को आग के हवाले कर दिया गया.
दोपहर करीब 4 बजे हुआ हमला
जानकारी के अनुसार, कामजोंग जिले के पिलोंग गांव में गुरुवार को हुए हमले में 4 लोगों की मौत हुई. यह हमला दोपहर करीब 4 बजे हुआ. पिलोंग गांव भारत और म्यांमार पिलर नंबर 95 के पास मौजूद है. यह चासाड पुलिस स्टेशन से करीब 30 किलोमीटर दूर पड़ता है. पुलिस को शक है कि हमलावर सीमा पार से आए थे.
चासाड पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी की अगुवाई में एक पुलिस टीम स्थानीय लोगों और असम राइफल्स के साथ मिलकर शव और घायल व्यक्ति को लाने के लिए पिलोंग गांव पहुंची. पुलिस ने अभी तक इस हमले के पीछे जिम्मेदार लोगों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन खबरों के अनुसार कुकी नेशनल आर्मी बर्मा यानी केएनए-बी गुट पर शक जताया जा रहा है.
हमले में किसका हाथ?
स्थानीय सूत्रों की मानें तो इन चारों लोगों की हत्या के पीछे कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा (KNA-B) और अन्य हथियारबंद कुकी गुटों के उग्रवादियों का हाथ बताया जा रहा है. हालांकि, इन आरोपों की अभी स्वतंत्र तौर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है.
मारे गए लोगों की पहचान कांगपत खुल्लेन गांव के रहने वाले फामी जाजो, बेटरसन जाजो और वारेशिम जाजो के रूप में हुई है, जबकि चौथा शख्स जिंजुई गांव का निंगथेम काशक था.
ऐसी हिंसक वारदातें बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह
इस घटना की मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने साफ कहा कि 'ऐसी हिंसक वारदातों को हमारे समाज में बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.' इसके साथ ही उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदना जताई और इस मुश्किल घड़ी में उन्हें हिम्मत और संबल मिलने की प्रार्थना की.
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