'EC के फैसले ने छीन लिया मेरा हक!' सिंबल फ्रीज होने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी, CJI ने आयोग से मांगा जवाब
ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह को लेकर CJI सूर्यकांत की पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव के बीच में चिन्ह जब्त करने की टाइमिंग पर सवाल उठाए, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने आयोग और दूसरे पक्ष से रुख स्पष्ट करने को कहा है. पूरी खबर पढ़ें.
चुनाव आयोग (Election Commission) ने ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस का सिंबल (चुनाव चिह्न) फ्रीज किए जाने के फैसले के खिलाफ ममता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. अपनी याचिका में ममता बनर्जी ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए आयोग के फैसले पर सवाल उठाए हैं और कहा कि इस फैसले ने उनके और उनकी पार्टी के संवैधानिक अधिकारों को छीन लिया है. इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (24 सितंबर) को भारत के चुनाव आयोग (ECI) से पूछा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस पार्टी के दो विरोधी गुटों के बीच विवाद पर फैसला करने में उसे कितना समय लगेगा?
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी की ओर से अपनी दलीलें पेश कर रहे कपिल सिब्बल ने बताया कि आयोग ने चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के दौरान नाम और चिह्न फ्रीज करने का फैसला किया, जिससे उनके पक्ष के पास प्रभावी राहत का रास्ता नहीं बचा. ऐसे में उन्होंने आयोग की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए. इसके बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने आयोग को मामले की सुनवाई शुरू करनी की इजाजत दी और कहा कि चुनाव आयोग कुछ समय तक रोजाना सुनवाई कर सकता है और दोनों पक्षों को अपने सबूत और दस्तावेजों को कोर्ट में पेश करने का मौका देकर इस विवाद पर फैसला कर सकता है.
28 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने ECI से यह जवाब तब मांगा, जब वह ममता बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें पार्टी के अंदर दूसरे गुट के झगड़े के बीच ECI के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और उसके चुनाव चिह्न 'फूल और पत्ती' को फ्रीज कर दिया गया था. भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर तक के लिए टाल दी है.
EC ने सिंबल को फ्रीज करने का दिया था आदेश
चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज करने का आदेश दिया था और दोनों विरोधी गुटों को निर्देश दिया था कि जब तक विवाद सुलझ नहीं जाता, तब तक वे नए नाम और चिह्न चुन लें. चुनाव आयोग का यह फैसला उपचुनावों की घोषणा के 10 दिन बाद आया था, जिनके लिए ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों ने उम्मीदवार खड़े किए थे. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट अब फुटबॉलर के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ रहा है और बागी गुट लिफाफा चिह्न पर चुनाव लड़ रहा है.
दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और निशान
मामला तृणमूल कांग्रेस के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों से जुड़ा है. चुनाव आयोग ने अंतरिम फैसले के तहत दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न दिए हैं. साथ ही दोनों गुटों को फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम इस्तेमाल करने से रोक दिया गया है. आयोग ने मूल चुनाव चिह्न को अभी सुरक्षित रखा है. यानी फिलहाल किसी एक गुट को इस चुनाव चिह्न पर अपना दावा करने की अनुमति नहीं दी गई है.
6 अक्तूबर को होना है उपचुनाव
पश्चिम बंगाल में 6 अक्तूबर को विधानसभा उपचुनाव होना है. सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि चुनाव की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है. इस पर कपिल सिब्बल ने साफ किया कि वह चुनाव पर रोक लगाने की मांग नहीं कर रहे हैं. चुनाव आयोग का कहना है कि दोनों गुटों के बीच विवाद पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है. आयोग इस मामले में दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद फैसला करेगा. यह प्रक्रिया चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के तहत होगी. फिलहाल आयोग का अंतरिम फैसला लागू है और उपचुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है.