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ममता बनर्जी की एक फोन कॉल से पश्चिम बंगाल की सियासत गरमा गई है. आखिर ऐसा क्या हुआ जो अपने करीब 50 साल के सियासी करियर में लगभग इतनी ही पुरानी दुश्मनी को भुलाने के लिए वो राजी हो गई हैं. दरअसल बंगाल की सियासत के दो 'जानी-दुश्मन' रहे सियासी दल अब बातचीत की मेज पर आने को बेताब दिख रहे हैं. इसका असर आगे चलकर पूरे देश में देखने को मिल सकता है. इस तरह ममता बनर्जी की ओर से विपक्षी नेताओं से संपर्क की खबरों ने विपक्षी एकजुटता का नया अध्याय लिख दिया है. ममता बनर्जी ने सीपीआई-एम के नेता एम ए बेबी को फोन लगाया तो बंगाल में सियासी हलचल बढ़ गई.
कोलकाता से आई इस खबर के मुताबिक ममता की फोन कॉल से पश्चिम बंगाल में दशकों से एक-दूसरे की कट्टर विरोधी रहीं तृणमूल कांग्रेस और सीपीआई (M) के बीच बातचीत का रास्ता खुल गया है. यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय घटा है जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद की खबर एक अखबार में छपने के बाद विपक्षी दल बीजेपी के खिलाफ लामबंद होते दिख रहे हैं.
दोनों दल विपक्षी INDIA गठबंधन के शुरुआती सदस्यों में हैं, लेकिन अब तक उन्होंने किसी तरह का औपचारिक संवाद या संपर्क नहीं किया था. इस संवाद के मायने बड़े गहरे हैं, क्योंकि विपक्ष के 'इंडी' अलायंस की आखिरी बैठक 8 जून 2026 को दिल्ली में हुई थी. अब जल्द ही नई बैठक की खबर आ सकती है.
जानकारी के मुताबिक दोनों नेताओं ने इस बात पर चर्चा की कि विपक्षी दलों को कैसे जल्द से जल्द एकजुट होकर चुनाव आयोग, चुनावी प्रक्रिया और लोकतंत्र की विश्वसनीयता की रक्षा के लिए अभियान चलाया जाना चाहिए.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ममता बनर्जी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से भी बात की और उनसे INDIA गठबंधन की बैठक तत्काल बुलाने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि अगर संभव हो तो यह बैठक इसी महीने की 28 या 29 सितंबर को बुलाई जानी चाहिए.
इसी साल 4 मई को 'दीदी' की सत्ता गई थी. उसके बाद टीएमसी में हुए दो-फाड़ से आहत ममता बनर्जी के कांग्रेस के नेताओं को भी फोन करने की खबरें आई हैं. एसआईआर के चरिए वोट चोरी का आरोप लगा चुके कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इसी साल में बंगाल के सियासी हालातों को लेकर ममता बनर्जी से चर्चा कर चुके हैं.
ताजा घटनाक्रम ये है कि बेबी ने सभी विपक्षी नेताओं को पत्र लिखकर चुनाव आयोग के अधिकारियों में मतभेद की खबरों के बाद चिंता जताई थी. इसके बाद ममता बनर्जी ने उनके पत्र का जवाब देकर बीजेपी से मुकाबला करने के लिए दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया.
हालांकि कुछ लोगों को हैरानी इस बात पर भी हो रही है कि जिस ममता ने मातृभूमि की मिट्टी माथे पर लगाकर 35 साल पुरानी वामपंथी सरकार को उखाड़ फेंकने की कसम खाई थी, उसे पूरा करने के बाद मुख्यमंत्री के पद तक पहुंची 'दीदी' ने उसी लाल सलाम वार्टी पार्टी के नेता से बात कर राज्य की बीजेपी सरकार को उखाड़ फेकने के लिए मिलकर काम करने की अपील की है.