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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर एक महिला ने कथित तौर पर नशे में चाकू से हमला किया. यह घटना तब हुई, जब ममता बनर्जी कोलकाता के मिलन संघ क्लब में पूजा का उद्घाटन करने गई थीं. कहा जा रहा है कि आरोपी महिला एक सिविक वॉलंटियर है और उसका नाम तनिष्ठा साहा है. यह आरोप तृणमूल कांग्रेस ने लगाया है. शिकायत मिलने के बाद कालीघाट पुलिस स्टेशन ने उसे गिरफ्तार कर लिया है.
TMC सांसद साकेत गोखले ने आरोप लगाया कि जब से बीजेपी बंगाल की सत्ता में आई है, तब से कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो गई है. आम लोग तो छोड़िए, प्रदेश की पूर्व सीएम ममता बनर्जी तक सुरक्षित नहीं हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि एक ड्रग एडिक्टिड ममता दीदी के आवास पर पहुंच गई और चाकू से हमला करने की कोशिश की. जबकि उन्हें जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा हासिल है.
गोखले ने आरोप लगाया, इस हमले के पीछे बीजेपी की साजिश हो सकती है. असल में मोदी सरकार उन्हें खत्म करने पर तुली हुई है. इस बारे में पुलिस को शिकायत दर्ज करवा दी गई है. देखते हैं कि पुलिस इस मामले में कोई एक्शन लेगी या इस अटैक के लिए अमित शाह की मंजूरी मिली हुई थी.
SHOCKING NEWS: A drug addict reached Mamata Banerjee’s residence today and tried to attack her with a knife. This is the condition in Bengal where even a Z+ protectee & 3-time CM is not safe. Was this a planned conspiracy by BJP because Didi is determined to finish them off in Delhi? A complaint has been filed. Will the police act or was this sanctioned by Amit Shah?
— Saket Gokhale (@SaketGokhale) October 13, 2026
TMC नेता डोला सेन ने घटना की जानकारी देते हुए कहा कि यह वाकया मंगलवार शाम करीब 6 बजे हुआ. उन्होंने कहा कि आरोपी महिला की पहचान तनिष्ठा साहा के रूप में हुई है. वह नशे की हालत में ममता दीदी के आवास के बाहर पहुंची और वहां पर गंदी गालियां दी. इसके बाद चाकू निकालकर ममता बनर्जी के पास जाने की कोशिश की. डोला सेन ने कहा कि आरोपी महिला ने खुद को ममता बनर्जी की भतीजी बताते हुए उनके पास जाने की जिद भी की.
बताते चलें कि बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी इन दिनों चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ काफी मुखर हैं. उनके इस्तीफे की मांग को लेकर वे लगातार इंडी गठबंधन के विरोध प्रदर्शनों में बढ़-चढ़कर भाग ले रही हैं. दिल्ली में सोमवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च में भी वे शामिल रहीं. गठबंधन की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी भी दी गई, जिसमें एसआईआर की समीक्षा करने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की जांच करने की गुहार लगाई गई है.