महाराष्ट्र में सूखे की मार: पानी नहीं मिला तो गांव ही बेचने को तैयार हुए लोग, सोलापुर के तुलसी में फूटा 25 साल का गुस्सा
ये कैसे संभव है कि कोई गांव बिना सरकारी परियोजना (जैसे- बांध या हाइवे निर्माण) के लिए होने वाले भूमि अधिग्रहण के बगैर ही बिकाऊ या खाली हो जाए. महाराष्ट्र में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां के बाशिंदों का दर्द जानकर आपकी रूह कांप जाएगी.
महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के तुलसी गांव में लगे कुछ बैनर-पोस्टरों ने सूखे की गंभीर समस्या की ओर इशारा करके जलवायु परिवर्तन के खतरों से देश को आगाह किया है. उन पोस्टर्स पर लिखा है ‘यह गांव बिकाऊ है’. भला ऐसा कैसे हो सकता है, पहली नजर में ये बात भले ही लोगों को अटपटी या अजीब लगे, लेकिन गांव वालों के लिए ये कोई मजाक नहीं, बल्कि जिंदगी और मौत का सवाल बन गया है. अपने इलाके की दुर्दशा से नाराज यहां के लोग करीब 25 सालों से पानी आने का इंतजार कर रहे हैं.
तुलसी गांव के सरपंच शरद मोरे कहते हैं कि अगर कोई गांव खरीदना चाहता है तो आगे आ सकता है. हालात से परेशान मोरे ने कहा है कि कोई अपनी खुशी से पुरखों की जमीन और जन्मभूमि को नहीं छोड़ता. लेकिन उनके आगे ये मजबूरी है. जिंदगी और मौत का संकट है, इसलिए उन्हें मजबूरी में गांव छोड़ने के बारे में सोचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. इस समस्या ने गांव वालों की उस सामूहिक परेशानी का स्याह सच दिखलाया है, जिसे वे कई सालों से झेल रहे हैं.
पानी से क्यों दूर?
यह गांव सीना माढ़ा लिफ्ट सिंचाई योजना से महज 9 किलोमीटर की दूरी पर है. यह योजना साल 2000 में शुरू हुई थी, लेकिन गांव वालों को अब तक इसका फायदा नहीं मिल सका है. आसपास के कई गांवों में पर्याप्त पानी मिलने से किसान नकदी फसलों की खेती कर रहे हैं, जबकि तुलसी गांव के किसानों की हालत लगातार बदतर हो रही है. क्योंकि यहां के किसान आज भी खेती के लिए युगों पुरानी कुदरती बारिश के पानी के सहारे बैठे हैं.
महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री बाबा साहेब पाटिल ने इस खतरे की पुष्टि करते हुए कहा था कि उन्होंने अपने जीवन में इतने गंभीर हालात नहीं देखे थे, जितने बुरे हालात इस बार महाराष्ट्र में बने हैं. उन्होंने राज्य में 100 फीसद सूखे की स्थिति बनने का जिक्र करके लाखों किसानों की चिंता बढ़ा दी थी.
हालात इस बार वाकई बहुत खराब हैं. माढ़ा इलाके के कई गांवों में करीब 45 दिनों से बारिश नहीं हुई है. तुलसी के जलाशयों में पानी बेहद कम है और कई कुएं और टैंक सूख चुके हैं. गांव में जुलाई से टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है. ग्रामीणों को डर है कि मानसून के बाद करीब 2,700 हेक्टेयर खेती की जमीन बंजर हो सकती है.
गणेश चतुर्थी पर आंदोलन
पानी की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से ग्रामीण अनशन कर रहे हैं. गणेश चतुर्थी के दिन उनका अनिश्चितकालीन उपवास शुरू हुआ था. गांव वाले तहसीलदार को दिए ज्ञापन में सामूहिक आत्मदाह तक की चेतावनी देने से लेकर आगामी चुनावों का बहिष्कार करने तक की बात कही थी. हालांकि बाद में राज्य के जल संसाधन मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल से बातचीत के बाद गांववालों का आंदोलन खत्म हो गया.
इस एपिसोड को लेकर सोलापुर के डीएम एस. कार्तिकेयन ने बताया कि सिंचाई विभाग ने तुलशी का हाइड्रोलॉजिकल सर्वे पूरा किया है. सर्वे के नतीजों के आधार पर नहर नेटवर्क के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने की बात कही गई है.
2026 के सुपर अल नीनो ने डराया!
महाराष्ट्र के सहकारिता मंत्री ने इसी महीने के आखिर तक राज्य में 100 फीसदी सूखे की स्थिति बनने की आशंका जताई थी. अब कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि आने वाले कुछ महीनों का मौसम भारत में हजारों लोगों को मौत के कगार पर पहुंचा सकता है.
ये सुपर अलनीनो का खतरा ज्यादा है, जिसका असर और भयानक सूखे, जंगलों की आग और बाढ़ से होने वाली तबाही के रूप में दिख सकता है. यानी 2026 का अल नीनो अब तक का सबसे शक्तिशाली और सुपर अल-नीनो बन सकता है.
भारत की बात करें तो मौसम विभाग के कुल बारिश के आंकड़ों और इंडिया ड्रॉट मॉनिटर के सूखे के मैप देखने पर साफ पता चलता है जहां पर बारिश सामान्य से कम हुई, वहां के लोग सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. इन नक्शों में महाराष्ट्र के गुजरात, तेलंगाना, कर्नाटक और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में भी सूखे के बड़े क्षेत्र दिखाई दे रहे हैं.