पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी लगातार एक्शन मोड में हैं. हाल में ही बंगाल सरकार ने गैर-मान्यता प्राप्त और बिना किसी रजिस्ट्रेशन के चल रहे 252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया था. इसके अलावा नियमों की अनदेखी करने वाले राज्य के करीब 100 मदरसों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया था. अब राज्य सरकार ने एक बड़ा फैसला लेते हुए मदरसा शिक्षा आयोग को समाप्त करने का ऐलान किया है.
सरकार ने मदरसा शिक्षा आयोग को खत्म करने साथ ही इसको स्कूल सेवा आयोग (SSC) में मिला दिया है. यानी सरकार के इस फैसले से मदरसे में शिक्षकों की भर्ती भी एसएससी के दायरे में आएगी. बंगाल के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री खुदीराम टुडू का कहना है कि इस फैसले से मदरसों में शिक्षकों की भर्ती पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से हो पाएगी.
रिपोर्ट्स के अनुसार, बंगाल में कुल 2100 से अधिक मदरसे रजिस्टर्ड हैं. वहीं, 2,396 मदरसे बिना आवश्यक मंजूरी या मान्यता के संचालित हो रहे थे, जिन्हें बंद किया गया है. हालिया सर्वे के अनुसार, बंगाल प्रशासन ने बिना मान्यता प्राप्त वाले 252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया है.
राज्य में मदरसा सेवा आयोग का गठन साल 2008 में हुआ था. इसका असली उद्देश्य मान्यता प्राप्त गैर-सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में योग्य शिक्षकों और कर्मचारियों की पारदर्शी नियुक्ति करना था. बताया जाता है कि इससे पहले बंगाल में शैक्षणिक व्यवस्था और परीक्षाओं के संचालन के लिए पश्चिम बंगाल मदरसा शिक्षा बोर्ड की स्थापना की गई थी. इसको 1994 के अधिनियम द्वारा वैधानिक स्वायत्त दर्जा भी दिया गया था.
पश्चिम बंगाल के सीएम सुवेंदु अधिकारी ने हाल में ही रेजीनगर और नंदीग्राम के उपचुनावों में प्रचार के दौरान कहा था कि बीजेपी कभी भी अस्पसंख्यकों को 'जय श्रीराम' कहने को मजबूर नहीं करेगी. वह चाहें तो 'भारत माता की जय' बोल सकते हैं. सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह समय अल्पसंख्यक समुदाय के लिए सरकार के साथ जुड़ने और बीजेपी के साथ दोस्ती हाथ बढ़ाने का सबसे अच्छा अवसर है.