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बडगाम जिले में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के टॉप कमांडर हाशिम मूसा का खात्मा हो चुका है. उसके एनकाउंटर के 5 दिन बाद कवन जंगल इलाके में पलमैदान के पास दवाइयों और खाने-पीने की चीजों से भरा एक बैग बरामद किया गया है, जिसके बाद पुलिस ने उसके लॉजिस्टिक सपोर्ट नेटवर्क की जांच तेज कर दी है. इनपुट है कि पीर पंजाल के जंगलों में 35-40 और विदेशी आतंकवादी सक्रिय हैं.
बैग मिलने के बाद सुरक्षा बलों का मानना है कि छिपे हुए आतंकवादियों को मदद देने वाला एक अच्छी तरह से संगठित स्थानीय नेटवर्क एक्टिव है. अगर इस स्थानीय नेटवर्क को पकड़ लिया जाता है, तो छिपे हुए आतंकवादियों को खत्म करना आसान हो जाएगा.
गृह मंत्रालय ने मूसा के खात्मे को जम्मू-कश्मीर में LeT नेटवर्क के लिए एक बड़ा झटका बताया है. मारा गया मूसा LeT कमांडरों के चार सदस्यीय समूह का आखिरी जीवित सदस्य था, जो 2022 से इस क्षेत्र में एक्टिव था और कई बड़े हमलों में शामिल था. उसकी मौत के साथ ही पूरा समूह खत्म हो गया है. इससे पहले उसके तीन साथियों को खत्म किया जा चुका था. जुनैद भट को 3 दिसंबर 2024 को दाचीगाम में मारा गया था, जबकि सुलेमान को 28 जुलाई 2025 को मौत के घाट उतारा गया था और 4 सितंबर 2026 को तीसरे साथी यासिर को ऑपरेशन असधर के तहत ढेर किया गया था.
दरअसल, 29 सितंबर की रात बडगाम के कवन जंगलों में सुरक्षा बलों ने मूसा को ढेर कर दिया था. यह कार्रवाई सटीक खुफिया इनपुट मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस के SOG, सेना और CRPF ने मिलकर की थी. अगली सुबह तलाशी के दौरान पलमैदान इलाके से उसकी लाश और भारी मात्रा में हथियार-गोला-बारूद बरामद हुआ था. यह कार्रवाई पीर पंजाल के घने जंगलों में छिपे विदेशी आतंकियों और उनके मददगारों को साफ करने के लिए चल रहे बड़े अभियान का हिस्सा थी.
गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह आतंकी गिरोह कश्मीर में हुए कई बड़े हमलों में शामिल रहा है, जैसे कंडी, हालन, डेरा की गली, शिव खोरी, गगनगीर और बैसारन के हमले. इसके अलावा, अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले में भी मूसा का नाम सीधे तौर पर सामने आया था.
मूसा के खात्मे के बाद जम्मू-कश्मीर में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है और सुरक्षा व्यवस्था को काफी कड़ा कर दिया गया है. खुफिया जानकारी से पता चला है कि पाकिस्तान स्थित आतंकी हैंडलर इस नुकसान से बौखलाकर जवाबी हमले की कोशिश कर सकते हैं.
श्रीनगर को अन्य जिलों से जोड़ने वाली प्रमुख सड़कों और रास्तों पर सुरक्षा वाहन और जवान तैनात किए गए हैं. वाहनों की तलाशी और रात में चेकिंग शुरू कर दी गई है. वहीं संवेदनशील इलाकों में गश्त दोगुनी कर दी गई है, ताकि संभावित घुसपैठ न हो पाए.
एजेंसियों को जानकारी मिली है कि अपने टॉप कमांडर के मारे जाने के बाद बौखलाए पाकिस्तानी आतंकी अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए धार्मिक स्थलों, VVIPs, बाजारों और प्रवासी मजदूरों को निशाना बना सकते हैं. इस बड़े इनपुट के बाद सेना, पुलिस और CRPF ने मिलकर सभी संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और चौकसी कई गुना बढ़ा दी है. सुरक्षा बलों का पूरा फोकस घाटी में छिपे करीब 35-40 विदेशी आतंकियों और आतंकियों को छिपकर मदद देने वाले उनके लोकल नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने पर है.