लद्दाख में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: LAHDC कारगिल भंग, 8 नई परिषदों और 100 सीटों का खाका तैयार
लद्दाख में जिलों के पुनर्गठन के साथ बड़ा प्रशासनिक फैसला: कारगिल LAHDC भंग कर 8 नई परिषदों के गठन की तैयारी. जानें इस ऐतिहासिक बदलाव का लद्दाख के प्रशासन पर क्या असर पड़ेगा.
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से शासन-प्रशासन को लेकर एक बेहद अहम खबर सामने आई है. लद्दाख प्रशासन ने ज़िलों के पुनर्गठन (Reorganisation) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूर्ववर्ती 'लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद' (LAHDC) कारगिल को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है. प्रशासन का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य नए बने क्षेत्रों में शासन व्यवस्था को बेहतर बनाना और नई परिषदों के गठन का रास्ता साफ करना है.
जब तक नए ज़िलों के लिए अलग-अलग स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों का औपचारिक गठन नहीं हो जाता, तब तक विकास कार्यों और रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज में कोई रुकावट न आए, इसके लिए अंतरिम (विशिष्ट) इंतजाम किए गए हैं:
DC संभालेंगे कमान: कारगिल के डिप्टी कमिश्नर (DC) सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को ही इन परिषदों की सभी शक्तियों और ज़िम्मेदारियों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.
फैसले लेने का अधिकार: नई परिषदों के अस्तित्व में आने तक क्षेत्र की सभी विकास योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों की कमान कारगिल DC के पास ही रहेगी.
8 नई परिषदों के लिए 100 निर्वाचन क्षेत्रों की अधिसूचना
ज़मीनी स्तर तक लोकतंत्र और विकास की पहुंच मजबूत करने के लिए लद्दाख प्रशासन ने संशोधित LAHDC अधिनियम, 1997 के तहत एक बड़ा नोटिफिकेशन जारी किया है. इसके तहत कुल 8 स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के गठन की रूपरेखा तैयार की गई है, जिनमें कुल 100 निर्वाचित निर्वाचन क्षेत्र (Elected Constituencies) शामिल होंगे. इन 100 सीटों का बंटवारा क्षेत्र की भौगोलिक और प्रशासनिक ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है.
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आम जनता पर क्या पड़ेगा इस फैसले का असर?
- लद्दाख जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले प्रदेश में जिलों का पुनर्गठन और स्थानीय स्तर पर छोटी विकास परिषदों का निर्माण एक दूरगामी और ऐतिहासिक फैसला माना जा रहा है.
- दूर-दराज के इलाकों को मजबूती: पहले जहां प्रशासनिक ध्यान सिर्फ मुख्य केंद्रों तक सीमित रह जाता था, वहीं अब द्रास, ज़ंस्कार, नुब्रा और चांगथांग जैसे दूरस्थ इलाकों को अपनी खुद की स्वायत्त परिषद मिलेगी.
- तेज विकास और सीधी भागीदारी: इस नए ढांचे से स्थानीय समस्याओं का तुरंत निपटारा हो सकेगा, विकास कार्यों के लिए सीधे बजट का आवंटन होगा और शासन में स्थानीय लोगों की भागीदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ेगी.
- संक्षेप में कहें तो यह प्रशासनिक बदलाव लद्दाख के सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन में सीधा और सकारात्मक सुधार लाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा.
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