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सड़कों पर उतरेगा पूरा देश? EVM पर राज ठाकरे ने उठाए सवाल, फ्रांस का जिक्र कर चढ़ा दिया सियासी पारा

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने ईवीएम (EVM) को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. फ्रांस का उदाहरण देते हुए उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जिससे राज्य की सियासत गरमा गई है. जानिए राज ठाकरे के इस नए बयान के क्या हैं मायने.

Written ByRavindra Pratap Singh
Published: Oct 21, 2026, 08:25 PM IST|Updated: Oct 21, 2026, 08:32 PM IST
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सड़कों पर उतरेगा पूरा देश? EVM पर राज ठाकरे ने उठाए सवाल, फ्रांस का जिक्र कर चढ़ा दिया सियासी पारा
Image Credit: एक देश, कई सवाल और बदलते हालात: राज ठाकरे की तीखी टिप्पणियां और राजनीतिक हलचल

About the Author

    Ravindra Pratap Singh

    Ravindra Pratap Singh

    रवींद्र प्रताप सिंह ने साल 2015 में जागरण.कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा मौजूदा समय वो ज़ी न्यूज डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. अगस्त 2025 में उन्होंने ज़ी न्यूज ज्वाइन किया है. रवींद्र देश और दुनिया की खबरों के अलावा खेलों में क्रिकेट जगत और क्राइम की खबरों पर बेहतरीन पकड़ रखते हैं. इसके पहले रवींद्र रिपब्लिक भारत में इवनिंग शिफ्ट के इंचार्ज रहे और शाम की शिफ्ट संभालते हुए होम पेज की जिम्मेदारी रवींद्र के ऊपर थी. उससे पहले रवींद्र ने जनसत्ता और न्यूज नेशन में भी शाम की शिफ्ट और होम पेज की जिम्मेदारी बखूबी निभाई. इसके पहले रवींद्र ने 5 सालों तक पी7 और लाइव इंडिया जैसे न्यूज चैनलों में काम किया था. रवींद्र आकाशवाणी में काम करने का अनुभव रखते. अवध यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएट रवींद्र पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. आप रवींद्र से जुड़ने के लिए Ravindra.Singh@India.com पर मेल कर सकते हैं या फिर फेसबुक पर संपर्क करने के लिए https://www.facebook.com/pintu.singh.397 और एक्स पर https://x.com/rs66533 रवींद्र से संपर्क किया जा सकता है. 
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    महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) चीफ राज ठाकरे की एक बार फिर से सरकार पर निशाना साधते हुए बैलेट पेपर से चुनाव करने की मांग दोहराई है. राज ठाकरे के इस बयान से महाराष्ट्र में सियासी पारा चढ़ेगा. राज ठाकरे ने देश की मौजूदा व्यवस्था को लेकर सरकार को कटघरे में खड़े करते हुए सत्ता पर सवाल खड़े किए हैं. ठाकरे ने कहा कि वो साल 2018 से ही ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से वोटिंग की वकालत करते आ रहे हैं.

    ठाकरे ने आगे कहा कि उनका तर्क है कि ईवीएम से वोटों की गिनती तो बहुत जल्दी हो जाती है, लेकिन आखिर इतनी जल्दी है किसे? अगर बैलेट पेपर से चुनाव कराने में चार दिन का समय भी लग जाए, तो इसमें कोई बुराई नहीं है. उन्होंने फ्रांस का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां एक व्यक्ति की आपत्ति के बाद चुनाव प्रक्रिया को रोक दिया गया था. चुनावों में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए और पड़ोसी देशों में भी बैलेट पेपर से ही मतदान हो रहा है.

    सड़कों पर उतर आएगा देश

    राज ठाकरे की बातों का सबसे गंभीर हिस्सा देश के भविष्य को लेकर उनकी चेतावनी थी. उनका मानना है कि आने वाले दो-चार महीनों में देश में कुछ बहुत बड़ा और अप्रत्याशित हो सकता है. सरकार की गलतियों और नीतियों के चलते लोगों का गुस्सा फूट सकता है. राज ठाकरे ने आगे कहा कि अगर आने वाले दिनों में पूरा देश सड़कों पर उतर आए, तो किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए. NEET आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौरान युवाओं में भयंकर गुस्सा देखने को मिला था. देश के कई हिस्सों में सूखे जैसे हालात और आने वाले समय में खाद्यान्न की कमी जैसी समस्याएं सरकार के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं. उन्होंने यहां तक कह दिया कि देश के हालात ऐसे बन सकते हैं जहां नेतृत्व को लेकर गंभीर संकट खड़ा हो जाए.

    समीर भाटिया की डॉक्यूमेंट्री का जिक्र कर कहा- देश में सेंसरशिप

    देश की मौजूदा परिस्थितियों पर सवाल खड़े करते हुए राज ठाकरे ने अमेरिका का उदाहरण दिया और कहा कि अमेरिका में लोकतंत्र का असली रूप देखने को मिलता है, जहां ऑस्कर के मंच पर खड़े होकर भी लोग अपनी बात खुलकर कह सकते हैं और इसके बाद भी उनकी तस्वीरों या कला का बॉयकॉट नहीं किया जाता. इसके उलट, उन्होंने समीर भाटिया द्वारा बनाई गई एक डॉक्यूमेंट्री का जिक्र किया, जिसे सोशल मीडिया और प्लेटफॉर्म्स से हटाने के लिए कहा जा रहा है. उन्होंने सवाल किया कि क्या देश के लोगों को हमेशा एकतरफा या स्पॉन्सर्ड कंटेंट ही देखना पड़ेगा? पत्रकारों और मीडिया की स्थिति पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अब दिल्ली के न्यूज चैनलों पर काम करने वाले पत्रकार भी खुलकर अपनी बात रखने लगे हैं और ज्यादा दिनों तक सच को दबाया नहीं जा सकता.

    न्यायपालिका और स्वायत्त संस्थानों पर टिप्पणी

    देश की स्वतंत्र संस्थाओं और न्यायपालिका की भूमिका पर भी उन्होंने सवालिया निशान लगाए. राज ठाकरे का कहना था कि देश की स्वायत्त संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर विचार करने की जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट और अन्य संस्थानों को सोचना चाहिए कि वे किस तरह के फैसले दे रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बदलाव बहुत जरूरी है, चाहे वह राजनीतिक स्तर पर हो या व्यवस्था के स्तर पर, क्योंकि कोई भी व्यक्ति हमेशा के लिए सत्ता में रहने का सर्टिफिकेट लेकर नहीं आया है.

    पुलिस, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक समीकरण

    कानून-व्यवस्था और पुलिस के इस्तेमाल पर बात करते हुए उन्होंने तीखा तंज कसा. ठाकरे ने कहा कि देश में 'लॉ' तो है, लेकिन सही मायनों में 'ऑर्डर' नहीं है. पुलिस और सुरक्षा के मुद्दों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि राजनेता पुलिस का इस्तेमाल अपने तरीके से करना चाहते हैं, लेकिन सुरक्षा मामलों को गंभीरता से देखने की जरूरत है. इसके अलावा, 2014 के राजनीतिक बदलावों का जिक्र करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि उस समय सत्ता में जो परिवर्तन आया, वह पूरी तरह नरेंद्र मोदी के प्रभाव और लोकप्रियता की वजह से था, न कि किसी अन्य संगठन की वजह से. यदि आज भी जनता सरकार बदलना चाहेगी, तो वे सिर्फ नेतृत्व को देखकर ही फैसला लेंगी.

    यह भी पढ़ेंः '5 हजार देकर क्या एहसान कर रहे हैं?' किसानों के मुद्दे पर उद्धव ठाकरे ने सरकार को घेरा, CM फडणवीस को दिया ये चैलेंज

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    Maharashtra News