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केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से शासन-प्रशासन को लेकर एक बेहद अहम खबर सामने आई है. लद्दाख प्रशासन ने ज़िलों के पुनर्गठन (Reorganisation) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूर्ववर्ती 'लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद' (LAHDC) कारगिल को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है. प्रशासन का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य नए बने क्षेत्रों में शासन व्यवस्था को बेहतर बनाना और नई परिषदों के गठन का रास्ता साफ करना है.
जब तक नए ज़िलों के लिए अलग-अलग स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों का औपचारिक गठन नहीं हो जाता, तब तक विकास कार्यों और रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज में कोई रुकावट न आए, इसके लिए अंतरिम (विशिष्ट) इंतजाम किए गए हैं:
DC संभालेंगे कमान: कारगिल के डिप्टी कमिश्नर (DC) सह मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को ही इन परिषदों की सभी शक्तियों और ज़िम्मेदारियों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.
फैसले लेने का अधिकार: नई परिषदों के अस्तित्व में आने तक क्षेत्र की सभी विकास योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों की कमान कारगिल DC के पास ही रहेगी.
ज़मीनी स्तर तक लोकतंत्र और विकास की पहुंच मजबूत करने के लिए लद्दाख प्रशासन ने संशोधित LAHDC अधिनियम, 1997 के तहत एक बड़ा नोटिफिकेशन जारी किया है. इसके तहत कुल 8 स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषदों के गठन की रूपरेखा तैयार की गई है, जिनमें कुल 100 निर्वाचित निर्वाचन क्षेत्र (Elected Constituencies) शामिल होंगे. इन 100 सीटों का बंटवारा क्षेत्र की भौगोलिक और प्रशासनिक ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए किया गया है.
