SIR पर आर-पार: BJP के सामने कांग्रेस की 3 शर्तें, खरगे बोले- 'पीछे नहीं हटेंगे'
SIR को लेकर देशभर में जारी विपक्ष के प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तीन सूत्रीय मांगे रखी हैं.. सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए खरगे ने कहा कि इससे कम पर कोई बात नहीं होगी. भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार को हमारी ये मांगे माननी ही होगी.
एसआईआर (SIR) पर सरकार और विपक्ष के बीच बढ रही तकरार के बीच कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार के सामने 3 मांगे रखकर अपना आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है. खरगे ने एक्स पर बाकायदा एक पोस्ट लिखकर अपनी पार्टी की मांगों की जानकारी साझा की है. मल्लिकार्जुन खरगे ने पार्टी की लंबी मंत्रणा के बाद सामने आई चीजों के बारे में लिखते हुए बताया, 'कांग्रेस पार्टी की 3 मांगे नॉन निगोशिएबल हैं.
कांग्रेस की तीन मांगें
पहली मांग- ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा.
दूसरी मांग- SIR को पूरी तरह रद्द करना.
तीसरी मांग- बैलट पेपर पर चुनाव कराना.
खरगे ने आगे लिखा, 'देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ता और INDIA गठबंधन के हमारे सभी साथी इन तीन मुद्दों को लेकर सड़कों पर डटे हुए हैं. जो भी सिविल सोसायटी सदस्य और युवा संगठन इन प्रमुख मुद्दों पर देश में किसी भी जगह संघर्ष कर रहे हैं, हम उनके साथ हैं. दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने जिस दिल्ली में महिला पत्रकारों का उत्पीड़न किया, वो बेहद निंदनीय है. तानाशाह घबराया हुआ है, ध्यान भटकाने के एक और अध्याय के लिए तैयार रहिए.'
ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग को नोटिस
CEC ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसले लेने के आरोपों पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. वकील विकास सिंह याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए. विकास सिंह ने कोर्ट को बताया कि कानून के मुताबिक आयोग के फैसले में मुख्य चुनाव आयुक्त और आयुक्तों का फैसला शामिल होता है. चुनाव आयोग में फैसले या तो सर्वसम्मति से होने चाहिए या फिर बहुमत से होने चाहिए.'
कानून में बदलाव की मांग: याचिकाकर्ता
याचिकाकर्ता ने 2023 के कानून की धारा 16 के तहत CEC को मिली कानूनी सुरक्षा के दायरे पर भी सवाल उठाया. सिंह ने कहा, 'हमारा अपील है कि कोर्ट CEC को अभी निलंबित कर दे. उन्हें काम न करने दिया जाए.'
इसके बाद जस्टिस बागची ने टिप्पणी की कि इस तरह की इम्यूनिटी तो जजों को भी नहीं है, हम जवाब मांग रहे हैं.
अंतरिम आदेश देने से इनकार
याचिकाकर्ताओं के वकील ने ये भी कहा कि हालात बहुत खराब है. सीईसी ज्ञानेश कुमार नियमों के खिलाफ जाकर काम कर रहे है. इसलिए सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश की जरूरत है.
CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुई अदालत ने कहा, 'मीडिया रिपोर्ट के आधार पर अंतरिम आदेश नहीं दे सकते. दोनों पक्षों को सुनने दीजिए.'
अदालत ने नोटिस जारी करके सभी पक्षों से जवाब मांगा है. सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि अगर फैसला सहमति से नहीं तो उस पर रोक संभव है.