पाक से टेरर फंडिंग और 8 करोड़ की हवाला मनी का खुला काला चिट्ठा, यासीन मलिक पर शिकंजा, अब चलेगा मुकदमा
एनआईए कोर्ट ने अलगाववादी नेता यासीन मलिक और 6 अन्य पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में केस चलाने का आदेश दिया है. यासीन मलिक तिहाड़ जेल में कैद है और वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुआ था.
कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक और 6 अन्यों पर मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में मुकदमा चलेगा. दिल्ली की स्पेशल एनआईए कोर्ट ने यह आदेश दिया है. यह मामला पाकिस्तान से हवाला चैनल्स के जरिए मिली विदेशी फंडिंग के आरोपों से जुड़ा है.
आरोप है कि हवाला नेटवर्क के जरिए 8,94,87,639 रुपये की रकम जुटाई गई, जो बाद में आरोपियों को मिल गए. ED का यह मामला, 2017 में NIA की ओर से दर्ज किए गए एक केस से जुड़ा है. इसमें IPC की धारा 120B, 121 और 121A गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 13, 16, 17, 18, 20, 38, 39 और 40 लगाई गई हैं.
बंद कमरे में हुई सुनवाई
शुक्रवार को NIA के स्पेशल जज प्रशांत शर्मा ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया और 19 नवंबर से अभियोजन पक्ष के सबूत दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया. यह सुनवाई बंद कमरे में हुई.
यासीन मलिक तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुआ और उसने आरोपों से इनकार किया. उसने कहा कि वह इस मामले में अपना बचाव करेगा. सितंबर में, NIA स्पेशल कोर्ट ने आदेश दिया था कि यासीन मलिक और 6 अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत आरोप तय किए जाएं. अन्य आरोपियों में जहूर अहमद शाह वटाली, अब्दुल रशीद शेख, शब्बीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, ट्रिसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और मसरत आलम भट शामिल हैं.
आरोप है कि अपनी विचारधारा और अलगाववाद के एजेंडे को फैलाने के अलावा ये लोग भारत में दहशत फैलाना चाहते थे. लिहाजा, इसके लिए इनको पाकिस्तान से हवाला और अन्य आतंकवादी संगठनों से फंड मिला था.
ईडी की जांच में क्या आया सामने?
ED की जांच से पता चला कि 'शेड्यूल्ड ऑफेंस' के जरिए 8,94,87,639 रुपये की अपराध से हासिल रकम मिली. आरोपियों को यह रकम अलग-अलग तरीकों से मिली.उन्होंने इसे इधर-उधर भेजा, छिपाया, अपने पास रखा या इस्तेमाल किया.
आरोप है कि यह रकम एक कॉम्प्लेक्स सिस्टम के जरिए पहुंचाई गई. इसमें कैश कूरियर का इस्तेमाल किया गया, जो नई दिल्ली में पाकिस्तान उच्चायोग से पैसे इकट्ठा करते थे और इसे हुर्रियत आलाकमान (जिसमें यासीन मलिक भी शामिल है) तक पहुंचाते थे. इस पैसे का इस्तेमाल विध्वंसक गतिविधियों और जम्मू-कश्मीर राज्य को भारत से अलग करने के लिए किया जाना था.
आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा यासीन मलिक
अपराध से मिली कमाई का पता लगाने के लिए, ED ने 14 जून, 2017 को 'एन्फोर्समेंट कंप्लेंट' दर्ज की. ED का आरोप है कि आरोपी यासीन मलिक 'जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट' (JKLF) का प्रमुख था. यह संगठन 1990 के दशक से ही जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल रहा है.
गुलाम मोहम्मद भट के घर से जब्त किए गए दस्तावेजों से पता चला कि वित्तीय वर्ष 2015-2016 के दौरान, आरोपी जहूर अहमद शाह वटाली के जरिए आरोपी मोहम्मद यासीन मलिक, शब्बीर अहमद शाह और मसरत आलम को विदेशी चंदा मिला था. गुलाम मोहम्मद भट, जहूर अहमद शाह वटाली के यहां कैशियर-सह-अकाउंटेंट के तौर पर काम करता था.
फंड जुटाने के लिए बनाया था इन्फ्रास्ट्रक्चर
यह भी आरोप है कि आरोपी यासीन मलिक के इस्तेमाल किए जाने वाले ईमेल अकाउंट से भेजे और मिले ईमेल से पता चलता है कि उसने दुनिया भर में फंड जुटाने के लिए एक बड़ा सिस्टम और ढांचा तैयार किया था. इस फंड का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में 'आजादी की लड़ाई' के नाम पर आतंकवादी, अलगाववादी और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया गया. इन पैसों का इस्तेमाल न केवल उसके संगठन JKLF को बनाए रखने के लिए किया गया, बल्कि जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और हिंसा फैलाने के लिए भी किया गया.