कश्मीर के मुद्दे पर भारत ने तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन को मुंहतोड़ जवाब दिया है. न्यूयॉर्क में हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सेशन में एर्दोगन ने पाकिस्तान की भाषा बोलते हुए कश्मीर का राग अलापा था. अब भारतीय विदेश मंत्रालय ने उन्हें आईना दिखाते हुए साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न हिस्सा हैं. यह देश की संप्रभुता और अखंडता से जुड़ा मामला है, जिस पर किसी भी तीसरे देश को बोलने या टांग अड़ाने का कोई हक नहीं है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने वीकली कॉन्फ्रेंस में एर्दोगन के बयान को पूरी तरह खारिज किया. जायसवाल ने कहा, 'भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान तुर्किए के राष्ट्रपति द्वारा भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई गैर-जरूरी और अनुचित टिप्पणियों को खारिज करता है. यह भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ा मामला है और इस पर किसी भी बाहरी पक्ष का कोई अधिकार-क्षेत्र नहीं है.'
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन ने कश्मीर का मुद्दा उठाया था. उन्होंने पाकिस्तान की भाषा बोलते हुए कहा था कि 'दक्षिण एशिया में शांति के लिए जरूरी है कि कश्मीर समेत सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और उससे जुड़े प्रस्तावों के तहत बातचीत से सुलझाया जाए.'
#WATCH | Delhi: On Turkish President Recep Tayyip Erdogan raising the Kashmir issue at the UNGA, MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, "India rejects the unwarranted references to Indian Union territory of Jammu and Kashmir, made by the Turkish President during his UNGA address.… pic.twitter.com/bkxkQs6uAw
— ANI (@ANI) September 29, 2026
यह पहली बार नहीं था जब एर्दोगन ने इंटरनेशनल मंच पर कश्मीर का मुद्दा उठाया हो. वह पिछले कई सालों से यूएनजीए के मंच का इस्तेमाल कश्मीर के मुद्दे पर बयानबाजी के लिए करते रहे हैं. हालांकि, भारत ने हर बार तुर्किये को आईना दिखाया है. भारत लगातार यह कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा हैं, तुर्किये को दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए. उसे भारत के अंदरूनी मामलों में गैर-जरूरी बयानबाजी और दखलअंदाजी से दूर रहना चाहिए.
एर्दोगन ने कश्मीर पर सबसे विवादित बात 2019 में कही थी, यह वही वक्त था, जब भारत ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया था. उस समय यूएन के मंच से एर्दोगन ने दावा किया था कि कश्मीर में लाखों लोग कैद जैसे हालात में हैं और दुनिया इस पर चुप है. तब भी भारत ने उनके बयान पर कड़ा ऐतराज जताया था. अब एक बार फिर जब एर्दोगन ने वही पुरानी बात दोहराई, तो भारत ने उनके बयान को पूरी तरह से खारिज कर दिया और यह साफ कर दिया कि भारत के अंदरूनी मामलों में दखलअंदाजी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी.
भारत दौरे पर आए अमेरिकी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के साथ भारतीय विदेश सचिव की रविवार को अहम बैठक हुई थी. इसे लेकर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा 'रविवार को विदेश सचिव ने अमेरिकी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की थी. इस दौरान द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई. विदेश सचिव ने SRIA कानून को लेकर हमारी चिंताओं से उन्हें अवगत कराया और बताया कि दोनों देशों के रिश्तों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर इसका क्या असर पड़ सकता है.'
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच विदेश मंत्रालय ने फारस की खाड़ी में मौजूद भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर स्थिति साफ की है. मंत्रालय की तरफ से बताया गया है कि भारत सरकार इलाके में मौजूद अपने सभी नागरिकों और जहाजों पर लगातार नजर बनाए हुए है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा 'भारत के लिए माल लेकर आ रहे 6 भारतीय झंडे वाले और 6 विदेशी झंडे वाले कमर्शियल जहाज इस समय फारस की खाड़ी में हैं, जिन पर 163 भारतीय नाविक सवार हैं.' इस पूरे इलाके में कमर्शियल जहाजों पर 4,500 से ज्यादा अन्य भारतीय नाविक भी काम कर रहे हैं. संबंधित भारतीय एजेंसियां और अधिकारी उनकी सुरक्षा व भलाई पर पूरी नजर रखे हुए हैं.'