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अंतरिक्ष में खुलेगा भारत का पहला 'पेट्रोल पंप'! अब खत्म नहीं होगा सैटेलाइट्स का ईंधन, भारतीय स्टार्टअप ने की बड़ी तैयारी

अंतरिक्ष में ईंधन खत्म होने के बाद सैटेलाइट को बेकार छोड़ने की जरूरत शायद आने वाले समय में खत्म हो जाए. भारत की एक स्टार्टअप कंपनी OrbitAID Aerospace नवंबर में एक ऐसी तकनीक का टेस्ट करने जा रही है, जो सैटेलाइट में फिर से ईंधन भर सकेगी.

Written ByUdbhav Tripathi
Published: Oct 17, 2026, 01:40 PM IST|Updated: Oct 17, 2026, 01:47 PM IST
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अंतरिक्ष में खुलेगा भारत का पहला 'पेट्रोल पंप'! अब खत्म नहीं होगा सैटेलाइट्स का ईंधन, भारतीय स्टार्टअप ने की बड़ी तैयारी
Image Credit: सैटेलाइट में ईंधन भरने की तकनीक

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Udbhav Tripathi

Udbhav Tripathi

उद्भव त्रिपाठी जी न्यूज डिजिटल में सब एडिटर हैं. वह जुलाई 2025 में जी न्यूज से जुड़े. साइंस और ऑटो-टेक की खबरें लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. उन्होंने अब तक Samsung, Realme और  Vivo जैसे स्मार्टफोन्स के रिव्यू किए हैं. 2025 के बिहार चुनाव में इन्होंने लाइव खबरें चलाई थी जो लोगों को काफी पसंद आई थी. इनकी खबरें काफी भरोसेमंद होती हैं. इससे पहले वे हरिभूमि में काम कर चुके हैं. जहां उन्होंने टेक, एक्सप्लेनर और देश दुनिया पर भी काम किया. इनकी पढ़ाई की बात करें तो इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मॉस कम्यूनिकेशन में PG कर रखा है. अगर आपको इनसे बात करनी है, तो आप udbhavtripaathi@gmail.com पर जुड़ सकते हैं.
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गाड़ी का पेट्रोल खत्म होता है तो हम तुरंत पास के पेट्रोल पंप पर चले जाते हैं और हमारी गाड़ी बिना रुके चलती रहती है. लेकिन जरा सोचिए अगर यह दिक्कत अंतरिक्ष में तैर रहे करोड़ों-अरबों के सैटेलाइट्स के साथ हो जाए तो? अब तक तो फ्यूल खत्म होते ही सैटेलाइट्स फेल हो जाते थे, लेकिन अब इस सेक्टर में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. भारत का एक स्टार्टअप इस तस्वीर को बदलने जा रहा है. भारत की एक युवा स्पेस कंपनी इसी नवंबर में स्पेस में पेट्रोल पंप की तकनीक का पहला टेस्ट करने जा रही है, जो सैटेलाइट्स की जिंदगी बढ़ा देने वाला होगा.

भारत की एक स्पेस कंपनी ऐसी तकनीक पर काम कर रही है, जिससे अंतरिक्ष में ही सैटेलाइट के अंदर फिर से ईंधन भरा जा सकेगा. कंपनी इसी नवंबर 2026 में इस तकनीक का टेस्ट करने की तैयारी में है. इस भारतीय स्टार्टअप का नाम OrbitAID Aerospace है. कंपनी के फाउंडर और CEO शक्तिकुमार आर के अनुसार, लगभग 30 किलो वजनी AayulSAT-1A सैटेलाइट को नवंबर में Small Satellite Launch Vehicle यानी SSLV से लॉन्च करने की प्लानिंग है. लेकिन, लॉन्च की डेट अभी कंफर्म नहीं हुई है. कंपनी ने नवंबर के मध्य का संभावित समय बताया है.

कंपनी के मुताबिक, सैटेलाइट तैयार है और अगले हफ्ते इसके आखिरी टेस्ट पूरे करने की प्लानिंग है. इसके बाद इसे लॉन्च की तैयारी के लिए श्रीहरिकोटा भेजा जाएगा.

स्पेस में कैसे काम करेगा फ्यूल स्टेशन?

अब आपके मन में सबसे बड़ा सवाल आ रहा होगा कि आखिर स्पेस में ये फ्यूल स्टेशन कैसे बनेगा और कैसे काम करेगा? इसका जवाब है कि जैसे धरती पर पेट्रोल पंप पर जाने पर ईंधन मिलता है, वैसे ही स्पेस में मौजूद सैटेलाइट को फ्यूल मिल सकेगा. इसके लिए एक सर्विस सैटेलाइट, फ्यूल लेने वाले सैटेलाइट के पास भेजा जाएगा. फिर दोनों को जोड़कर उसमें ईंधन भरने की प्रक्रिया होगी. इससे यह फायदा होगा कि ईंधन खत्म होने की समस्या दूर हो सकती है. वर्तमान समय में सैटेलाइट डिजाइन करने और स्पेस में भेजने में बहुत सारा पैसा खर्च होता है. वैसे एक बार ईंधन खत्म होने के बाद सैटेलाइट फिर से इस्तेमाल में नहीं आ पाती है. लेकिन अगर ईंधन खत्म होने के बाद उसे फिर से ईंधन देकर इस्तेमाल के लिए प्रयोग में लाया जाएगा, तो नई सैटेलाइट भेजने की जरूरत नहीं होगी और इससे बहुत पैसा बचेगा.

OrbitAID Aerospace का नया मिशन इसी दिशा में एक कदम है. कंपनी इस टेस्ट के माध्यम से सैटेलाइट को आपस में कनेक्ट करने, उसके अंदर ईंधन भरने और दूसरे पहलू को समझने को टेस्ट करना चाहती है. इसके साथ सैटेलाइट के अंदर बिजली और डेटा ट्रांसफर की क्षमता का भी टेस्ट होगा.

पहले मिशन में आई थी ये समस्या

कंपनी इससे पहले भी इस तरह की तकनीक का प्रदर्शन करने की योजना बना चुकी थी, लेकिन जनवरी 2026 में PSLV से जुड़े एक लॉन्च में आई कुछ खराबी के कारण वह मिशन प्रदर्शन के आखिरी चरण तक नहीं पहुंच पाया. कंपनी के फाउंडर शक्तिकुमार के अनुसार नया मिशन सिर्फ पुराने मिशन की जगह लेने के लिए नहीं है. इसमें कुछ एडवांस पेलोड और नई क्षमताएं भी शामिल की गई हैं. लेकिन, कुछ तकनीकी जानकारियां लॉन्च के बाद ही पब्लिक होंगी.

2027 में दो सैटेलाइट के साथ होगा बड़ा प्रयोग

OrbitAID की योजना सिर्फ सैटेलाइट में ईंधन भरने के टेस्ट तक ही नहीं है. कंपनी अगले साल की पहली तिमाही में एक और एडवांस मिशन की तैयारी कर रही है. इसमें दो सैटेलाइट होंगे. एक दूसरे के पास पहुंचेगा और उसके साथ जुड़ने का प्रयास करेगा. इस मिशन में सैटेलाइट को एक-दूसरे के पास लाने, साथ ही उनके आपस की दूरी और स्थिति को कंट्रोल करने, डॉकिंग और फ्यूल भरने जैसी क्षमताओं का टेस्ट किया जाएगा.

(ये भी पढ़ेंः भारत का सुरक्षा कवच: GSAT 7C और वरुणास्त्र पर 4,106 करोड़ खर्च, आकाश से पाताल तक बढ़ी देश की ताकत)

कंपनी सैटेलाइट के लिए जेटपैक जैसी टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन भी करना चाहती है. जिसका उद्देश्य यह देखना है कि उसका बनाया सिस्टम सैटेलाइट को स्पेस में अपनी दिशा और स्थिति बदलने में किस हद तक सहायता कर सकता है. आने वाले समय में ऐसी टेक्नोलॉजी दूसरे सैटेलाइट की मदद करने में भी काम आ सकती है.

कंपनी के अनुसार अगले साल यानी 2027 के मिशन के लिए निर्माण का काम भी शुरू हो गया है. दिसंबर के आसपास सैटेलाइट को आपस में जोड़ने और उसके अलग-अलग हिस्सों को एक साथ लगाने का काम शुरू करने की तैयारी है. अगर ये टेस्ट सफल होता है, तो भविष्य में अंतरिक्ष में सैटेलाइट की रिपेयर, ईंधन भरने और उनकी काम करने की क्षमता को आगे बढ़ाया जा सकेगा.

(ये भी पढे़ंः सोने की खोज में ऑस्ट्रेलिया बना 'वास्को डी गामा': खर्च किए 13000 करोड़; भारत की कैसे होगी चांदी?)
 

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