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Ajit Doval: एक इंटेलिजेंस टीम बॉर्डर मिशन से वापस नहीं लौट पाई थी. कई दिन बीत गए और कोई खबर नहीं मिली. फिर हेडक्वॉर्टर से एक कॉल आया, जिसमें बताया गया कि टीम के लोग चीन की हिरासत में हैं. उस समय सिक्किम में तैनात युवा इंटेलिजेंस ऑफिसर अजित डोभाल के लिए इस घटना ने टीम की सिक्योरिटी और उनके अपने प्रोफेशनल फ्यूचर को लेकर टेंशन पैदा कर दी.
शनिवार को IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर ने उस घटना को याद किया.उन्होंने कहा, 'मुझे पता था कि यह मेरे करियर का द एंड है. मैं तब बीस-तीस साल की उम्र में था और मुझे एक नया करियर शुरू करना था.' मुख्य अतिथि के तौर पर ग्रेजुएट होने वाले छात्रों से डोभाल ने अपने शुरुआती करियर के अनुभवों के आधार पर चुनौतियों और मौकों पर बात की. उन्होंने छात्रों से कहा कि वे एक ऐसी दुनिया में कदम रख रहे हैं जो टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट से पूरी तरह बदल चुकी है.
डोभाल ने बताया कि जब सिक्किम का भारत में विलय हो रहा था, तब वे वहां तैनात एक युवा IPS ऑफिसर थे और इंटेलिजेंस के काम में नए थे. उनकी जिम्मेदारियों में बॉर्डर पर चीनी सेना की गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाना था. बॉर्डर मिशन पर भेजी गई एक इंटेलिजेंस टीम तय समय में वापस नहीं लौटी, जिससे वे बहुत परेशान हो गए.
उन्होंने कहा, 'मेरे लिए यह न केवल प्रोफेशनल तौर पर बल्कि मानवीय नजरिए से भी बहुत चिंता की बात थी कि इतने सारे लोग गायब हो गए थे. उनके बारे में हमें पता नहीं था कि वे जिंदा हैं या मर चुके हैं या उनके साथ क्या हुआ है.'
#WATCH | Roorkee, Uttarakhand: At the IIT Roorkee Convocation, National Security Advisor Ajit Doval says, "I was very sad. It was one of those phases in life when you feel very down. So far, my career was going quite well... I had a colleague, an old Tibetan Sherpa, who was a… https://t.co/jSQTTLkfHk pic.twitter.com/Jhxq3SUa2y
— ANI (@ANI) September 19, 2026
डोभाल ने कहा कि एवलांच या किसी ऐसी घटना की कोई रिपोर्ट नहीं थी, जिससे उनके गायब होने का कारण पता चल सके. बाद में उनके सीनियर ने उन्हें बताया कि टीम के सदस्यों को चीनी सेना ने पकड़ लिया था.
टीम से पूछताछ की गई और आखिरकार उन्हें वापस भेज दिया गया. डोभाल ने कहा कि उनकी रिहाई शायद बातचीत या समझौते के बाद हुई, हालांकि उन्होंने इस व्यवस्था के बारे में विस्तार से नहीं बताया. इसके बाद जांच हुई और उन्हें डर था कि इस घटना से उनका करियर खत्म हो जाएगा. आखिरकार, जांच में उन्हें बेकसूर पाया गया.
उन्होंने कहा, 'हेडक्वॉर्टर से हमें जो स्केच और मैप दिए गए थे, उनमें कुछ कमियां और गलतियां थीं. इसी वजह से ऐसा हुआ.'
अजीत डोभाल ने आगे कहा, 'मैं बहुत दुखी था. यह जिंदगी का एक ऐसा दौर था, जब इंसान बहुत निराश महसूस करता है. अब तक मेरा करियर काफी अच्छा चल रहा था. मेरा एक साथी था, एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो में मेरे साथ काम करता था. उसने मुझसे पूछा- 'सर, आप इतने दुखी क्यों हैं?' मैंने उसे बताया कि मैंने बहुत उम्मीदों और बड़े सपनों के साथ यह करियर शुरू किया था, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि सब कुछ गलत हो गया है. उसने कहा, 'सर, ऐसा कुछ नहीं है. यह सब मैप-रीडिंग का खेल है.' ज़िंदगी असल में बस एक सवाल है. कुछ लोग मैप सही से पढ़ पाते हैं, तो कुछ गलत... वह कई सालों तक बर्फ से ढके पहाड़ों में रहा था. उसने मुझे तीन बातें बताईं. पहली- यह जानो कि तुम अभी कहां हो. दूसरी- यह जानो कि तुम कहां जाना चाहते हो. और तीसरी- वहां पहुंचने का रास्ता जानो.'
ग्रेजुएट होने वाले छात्रों से मुखातिब होते हुए डोभाल ने कहा कि उन्हें ऐसे अवसर मिल रहे हैं जो उनसे पहले की पीढ़ियों को नहीं मिले थे. उन्होंने कहा, 'हो सकता है कि आपको इस बात का एहसास न हो, लेकिन पिछले 1,000 सालों में आप सबसे किस्मत वाली पीढ़ी हैं, जिसे इतने सारे अवसर मिलने वाले हैं.' उन्होंने कहा कि पिछली पीढ़ियों ने गुलामी और ऐसी पाबंदियों का सामना किया था जिन्होंने उनके मौकों को सीमित कर दिया था. भारत और दुनिया भर में आए बदलावों ने युवाओं के लिए नई संभावनाएं खोली हैं. डोभाल ने कहा, 'आप एक ऐसे दौर में आ रहे हैं, जब किसी भी देश या समाज की तरक्की और विकास में टेक्नोलॉजी सबसे अहम भूमिका निभाएगी.'