UCC को हरी झंडी: गुजरात में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू, राष्ट्रपति ने दी मंजूरी; शादी-लिव इन समेत इन चीजों में सख्त नियम
UCC Law Approved In Gujarat: गुजरात में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code या UCC) एक्ट को पास कर दिया गया है. इसके कानून बनने से अब पुरुषों और महिलाओं को राज्य में हर लेवल पर समान अधिकार मिलेंगे.
Gujarat UCC: गुजरात में सरकार की ओर से पारित यूनिवर्सल सिविल कोड ( UCC) एक्ट को देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी है. मंजूरी मिलते ही राज्य सरकार ने इस संबंध में राजपत्र में आधिकारिक अधिसूचना प्रकाशित कर दी है. UCC के कानून बनने से अब यहां महिलाओं को संपत्ति के मामले में समान अधिकार प्राप्त होंगे.
गुजरात विधानसभा की ओर से UCC बिल पास होने के बाद राज्यपाल और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर से यह कानून बन गया है. राज्यपाल और राष्ट्रपति की अंतिम स्वीकृति प्राप्त होने के बाद गुजरात सरकार ने 'गुजरात समान नागरिक संहिता, 2026' से संबंधित ऑफीशियल गैजेट पब्लिश किया है. यह नया कानून गुजरात के साथ-साथ राज्य के बाहर रहने वाले सभी गुजरात के लोगों पर लागू होगा.
महिला-पुरुषों को समान अधिकार
सरकार की ओर से कानून को लागू करने के संबंध में गैजेट नोटिफिकेशन जारी करने के बाद इसे पूरी तरह प्रभाव में लाने के लिए कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी लाई जाएगी. इस कानून में सामाजिक समानता और नागरिक अधिकारों से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जिसे अब राष्ट्रपति की ओर से अप्रूव कर दिया गया है. हालांकि, आदिवासी समुदाय को इस UCC एक्ट के सभी प्रावधानों से छूट दी गई है और बेटा-बेटी दोनों को संपत्ति में समान उत्तराधिकार अधिकार दिए गए हैं. महिलाओं को भी संपत्ति और उत्तराधिकार से संबंधित सभी कानूनी मामलों में पुरुषों के समान अधिकार दिए गए हैं.
इसके अलावा शादी और तलाक से जुड़े मामलों के लिए कानून में एक समान प्रावधान किए गए हैं यानी UCC की मंजूरी और राजपत्र में इसके प्रकाशन के साथ ही राज्य सरकार ने गुजरात में समान नागरिक संहिता को लागू करने करने के लिए एक मजबूत कदम उठाया है. अब कानून को लागू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा.
प्रमुख कानूनी प्रावधान और महत्वपूर्ण मुद्दे
संविधान के आर्टिकल 366(25) और 342 के अंतर्गत आने वाली अनुसूचित जनजातियों (ST) के सदस्यों और संविधान के सेक्शन 21 के अंतर्गत संरक्षित पारंपरिक अधिकारों वाले समूहों को इस अधिनियम के प्रावधानों से छूट दी गई है.
शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन जरूरी
विवाह के समय लड़के की आयु 21और लड़की की उम्र 18 साल होना अनिवार्य है. कानून लागू होने के 60 दिनों के अंदर सभी विवाहों का रजिस्ट्रेशन होना अनिवार्य होगा. निर्धारित समय के अंदर रजिस्ट्रेशन न कराने पर जुर्माना लगाया जाएगा. यह कानून सभी धर्मों के पारंपरिक विवाह रीति-रिवाजों पर रोक नहीं लगाता है. वहीं, जब तक पति या पत्नी जीवित हैं, तब तक दूसरा विवाह नहीं किया जा सकता है.
लिव-इन रिलेशनशिप के लिए सख्त नियम
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले या रहने की इच्छा रखने वाले जोड़ों को रजिस्ट्रार को संयुक्त बयान देकर रजिस्ट्रेशन कराना होगा. वहीं, लिव-इन रिलेशनशिप समाप्त होने पर भी रजिस्ट्रार को संयुक्त या एकतरफा बयान देकर इसकी सूचना देनी होगी. कानून के तहत अगर कोई व्यक्ति वसीयत बनाए बिना मर जाता है, तो उसके पार्टनर, बच्चे और माता-पिता को कानूनी रूप से उसकी संपत्ति में बराबर हिस्सा मिलेगा.
बच्चों के अधिकार
शादी के बाहर, सरोगेसी के जरिए या गोद लेने से पैदा हुए बच्चों को बायोलॉजिल बच्चों के समान ही सभी कानूनी और उत्तराधिकार संबंधी अधिकार दिए गए हैं.
तलाक या शादी से जुड़े विवादों का समाधान
तलाक या शादी से जुड़े विवादों के लिए कोर्ट जाने से पहले मध्यस्थता का विकल्प है. मैरिज रजिस्ट्रेशन के बिना रोजगार या सरकारी डॉक्यूमेंट्स में वैवाहिक स्थिति में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है.