पीड़ितों ने एक-दूसरे की जमापूंजी दांव पर लगाई! एक ऐप से लाखों लोगों को लगा 1200 करोड़ का चूना; कहानी फर्जी SD Pay की
गुजरात में फर्जी डिजिटल वॉलेट का खुलासा हुआ है, जिससे करीब 1200 करोड़ रुपये की ठगी की गई. सबसे खास बात है कि आरोपियों ने पीड़ितों को अपने विश्वास में कुछ ऐसे लिया कि सभी ने अपनी पूरी जमापूंजी निवेश में लगा दी. अब इस मामले की जांच पुलिस कर रही है.
आधुनिक होते समय में जितनी तेजी से तकनीक आगे बढ़ रही है, ठीक उसी गति से स्कैम की संख्या भी बढ़ रही है. ताजा मामला गुजरात से सामने आया है, जहां पर एक ऐप ने लाखों लोगों की जीवन भर की कमाई को पल भर में साफ कर दिया. आलम यह है कि लोग यह भी नहीं समझ पाए कि वह जहां अपना पैसा निवेश कर रहे हैं, वह प्लेटफॉर्म कितना भरोसेमंद है.
दरअसल, पूरा मामला गुजरात के एक बड़े घोटाले से जुड़ा है. इसमें करीब 15 लाख लोगों के साथ धोखा हुआ. सबसे पहले लोगों को अधिक से अधिक ब्याज का लालच दिया गया और फिर कुल मिलाकर 1200 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी का शिकार बना दिया गया है. अब अपनी जमापूंजी खोने वाले केवल सिर पटक रहे हैं. घोटाले के लिए जिस ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया, उसकी पहचान 'एसडी पे' (SD Pay) और 'अपना पे' (Apna Pay) ऐप के तौर पर हुई है.
पहले जानिए हुआ क्या?
पूरा मामला खुला वडोदरा की रहने वाली एक 48 साल की महिला टीचर से, जो सबसे पहले इस ऐप की ग्राहक और शिकार दोनों बनीं. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, महिला एक सिंगल मदर हैं और साल 2025 में उन्होंने अपना एक बीचएके घर बेच दिया. उससे मिले करीब 9.5 लाख रुपये को 'एसडी पे' में लगा दिए. सबसे खास बात है कि केवल एक साल से भी कम समय में यह राशि बढ़कर डिजिटल वॉलेट 50 लाख रुपये हो गई. झटका तो तब लगा, जब यह 50 लाख रुपये केवल वॉलेट में नजर आ रहे थे, इन्हें किसी भी तरीके से निकाला नहीं जा सकता था. कुछ समय बाद ऐप भी बंद हो गया.
महिला का कहना है कि शुरुआत में भी उन्हें इस ऐप मे पैसे लगाने की इच्छा नहीं थी. उस दौरान ठगों ने उनको अपने विश्वास में लेने के लिए एक ब्लैंक चेक दे दिया और कहा कि वह इसमें रकम लिखकर कैश करा लें. जब इतने विश्वास के साथ उनसे ठगों ने बात की,तो वह उनकी बातों में आ गईं और भरोसा खोते हुए पैसे जमा कर दिए. धीरे-धीरे इस पैसे में बढ़ोतरी देखकर वह खुश भी हुईं और अन्य लोगों को भी प्रोत्साहित किया, जो इसमें पैसे लगा सकते थे.
फर्जी ऐप ने कैसे लोगों को फंसाया
रिपोर्ट्स के अनुसार, धवल पटेल नाम के शख्स ने साल 2024 में 'एसडी पे' को लॉन्च किया था. धवल पटेल ही इस घोटाले का मुख्य आरोपी है. सबसे पहले इस ऐप के जरिए लोगों को बिल पेमेंट और मोबाइल रिचार्ज आसान बनाने का झांसा दिया गया. जानकार बताते हैं कि यह एक पोंजी स्कीम थी. पुलिस ने जांच में पाया कि ऐप की कोई अपनी कमाई भी नहीं थी. ये कंपनी न कोई सामान बनाती थी और न कोई सेवा देती थी. दावा है कि नए जुड़ने वाले निवेशकों को पुराने निवेशकों के पैसों से ब्याज दिया जाता था.
जांच में पाया गया कि ऐप लोगों को हर दिन का 0.15 से .030 प्रतिशत तक ब्याज देने का दावा करता था. सबसे खास बात है कि लोगों को जोड़ने पर भारी कमीशन भी देने की बात कही गई. सेमिनार और ऑनलाइन कॉल वाली मार्केटिंग करके लोगों को फंसाया गया.
लोगों ने कर्ज लेकर किया निवेश
अधिक और शानदार ब्याज और कंपनी के दावे ने लोगों को अपनी ओर खींचा. कुछ लोगों ने जीवनभर की जमापूंजी लगा दी, तो कुछ लोगों ने कर्ज लेकर पैसा इस ऐप में निवेश किया. सुरेंद्रनगर ने एक शख्स ने 60 लाख रुपये का लोन लिया और फिर पूरा पैसा ऐप में लगा दिया. पुलिस ने बताया कि इसमें 20 लाख का पर्सनल लोन, 20 लाख पत्नी के नाम पर लोन और 20 लाख का गोल्ड लोन शामिल था. उसने घर बनाने के सपने के लिए अपना पूरा पैसा ऐप में लगा दिया, जो अब डूब चुका है.
ठीक ऐसे ही सूरत के रहने वाले एक शख्स ने केवल 1000 रुपये लगाए थे. उसने भारी मुनाफा कमाकर अपने नीचे 1.76 लाख लोगों की चेन बना दी. सबसे खास बात है कि टीचर ने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी निवेश कराया. टीचर की तमाम साथियों ने अपना पैसा लगा, जो अब डूब चुका है.
निवेशकों ने फर्जी शेयर वाली चाल भी चली
पुलिस ने जांच में पाया कि साल 2026 तक आते-आते ऐप से लोग जुड़ने बंद हो गए. ऐसे में ऐप के पास लोगों को ब्याज देने के पैसे नहीं बचे, इसके बाद ठगों ने नया पैंतरा आजमाया और निवेशकों को फर्जी शेयर देना शुरू कर दिया. उन्होंने निवेशकों को गुमहार करने के लिए झूठ बोला और कहा कि कंपनी का आईपीओ आने वाला है. ठगों ने यहां तक दावा किया कि जो शेयर वह आज 20 रुपये में दे रहे हैं, वह शेयर बाजार में 100 रुपये का हो जाएगा.
जून में पहली बार पुलिस में पहुंचा ठगी का मामला
इसी साल जून के महीने में पहली बार ये पूरा मामला पुलिस के पास पहुंचा. सितंबर 2026 में एक पुलिसकर्मी की पत्नी ने 10 लाख रुपये ठगे जाने की एफआईआर दर्ज कराई थी. इसके बाद अमरेली साइबर क्राइम पुलिस ने एक्शन लेना शुरू किया. शुरुआती जांच में पुलिस ने पाया कि इस फर्जी ऐप को करीब 15 लाख लोगों ने डाउनलोड किया था. करीब साढ़े 6 लाख खातों के जरिए 1211 करोड़ रिपये का निवेश किया गया था.
इसके बाद 12 सितंबर को मुख्य आरोपी धवन पटेल और हिरेन शाह को गिरफ्तार किया गया था. इस पूरे मामले में कुल 12 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है. सबसे पहले पुलिस ने एक्शन लेते हुए ऐप को गूगल प्ले से हटवाया और भारतीय रिजर्व बैंक को भी इसकी जानकारी दी. हालांकि, पुलिस अभी तक केवल 1.86 करोड़ रुपये की रिकवर कर पाई है. आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की तैयारी की जा रही है.
आत्महत्या करने सोच रहे लोग
गौरतलब है कि 21 सितंबर को वडोदरा की टीचर और एक अन्य पीड़ित अमरेली पुलिस गए थे. इस दौरान पुलिस आरोपी धवल को कोर्ट ले जा रही थी. नाराज लोगों ने पुलिस की गाड़ी रुकवाई और रोते हुए धवल पटेल को थप्पड़ मारा. पीड़िता का कहना है कि टीचर ने बताया कि पैसे डूबने के बाद एक समय उन्होंने आत्महत्या करने की सोची थी।
पीड़िता शिक्षिका ने कहा कि घर चलाने के लिए पैसे नहीं थे और घर में पढ़ने वाला बेटा और बूढ़ी मां की जिम्मेदारी थी. हालांकि, शिक्षिका ने कहा कि आत्महत्या की बजाए उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया.
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