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'सरकार लाठियां नहीं, जवाब दे': दिल्ली में नाकेबंदी और इंटरनेट सस्पेंशन पर भड़के शशि थरूर, कहा- रिहा किए जाएं प्रदर्शनकारी

Shashi Tharoor on CJP Protest: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को रोकने के लिए सरकार की कड़ी पाबंदियों की आलोचना की है. थरूर ने पोस्ट लिखकर कहा कि सरकार को लाठियों से नहीं बल्कि संवाद के जरिए प्रदर्शनकारियों से बात करनी चाहिए.

'सरकार लाठियां नहीं, जवाब दे': दिल्ली में नाकेबंदी और इंटरनेट सस्पेंशन पर भड़के शशि थरूर, कहा- रिहा किए जाएं प्रदर्शनकारी

Shashi Tharoor on CJP Delhi Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन की वजह से दिल्ली शनिवार को अघोषित किलेबंदी जैसी स्थिति में रही. जगह-जगह बैरिकेड्स लगे हुए थे और जंतर-मंतर की ओर जाते दिख रहे लोगों को डिटेन करके रोका जा रहा था. प्रदर्शन की आड़ में अराजकता की रिपोर्ट को देखते हुए सरकार ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए 22 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की थी. कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने सरकार की इस सख्ती की निंदा की है. थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लंबी पोस्ट लिखकर पुलिस के इंतजामों को अघोषित आपातकाल जैसा बताते हुए प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की मांग की.

दिल्ली में सुरक्षाबलों की युद्ध जैसी तैनाती- थरूर

शशि थरूर ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'मैं रात 2 बजे के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली लौटा हूं. मैंने शायद ही कभी ऐसा कुछ देखा हो जैसा दिल्ली आज देख रही है. शहर में हर कुछ सौ मीटर पर चेकपॉइंट्स बने हैं. सड़कों पर कंक्रीट के बैरियर और नुकीली कीलें (स्पाइक स्ट्रिप्स) बिछाई गई हैं. पूरे शहर में 22,000 पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की युद्ध जैसी तैनाती है. 250 ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं और 45 मेट्रो स्टेशन बंद हैं. इसके अलावा, दिल्ली और उसके आस-पास के इलाकों में युवाओं को उनके घरों और सड़कों से हिरासत में लेने की खबरें आ रही हैं. यह सब सिर्फ इसलिए ताकि नागरिक हमारे चुनावों की निष्पक्षता पर शांतिपूर्ण तरीके से सवाल न उठा सकें. सबसे ज्यादा दमनकारी और पिछड़ी हुई बात राष्ट्रीय राजधानी के दिल में इंटरनेट का निलंबन है.'

मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए थरूर ने कहा, 'आवाजाही की स्वतंत्रता पूरी तरह से बेड़ियों में जकड़ चुकी है. जंतर-मंतर खासतौर पर इसलिए तय किया गया था ताकि नागरिक दिल्ली के केंद्र में अपनी असहमति दर्ज करा सकें. आज वहां जाने वाले रास्तों को भी प्रतिबंधित घोषित कर दिया गया है. यह सवाल पूछना लाजिमी है कि जब हमारी राजधानी में महिलाओं को सुरक्षा की जरूरत होती है, तब यह भारी-भरकम प्रशासनिक बल और तत्परता कहां गायब हो जाती है.'

'हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करे सरकार'

प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग करते हुए शशि थरूर ने लिखा, 'हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करना ही होगा और अगर प्रदर्शनकारी सोमवार को फिर से लौट आएं तो क्या अधिकारी राष्ट्रीय राजधानी को फिर से पूरी तरह से लॉक डाउन कर देंगे? हमारी जेन-जी अघोषित आपातकाल से कहीं बेहतर के हकदार है.'

सरकार को नसीहत देते हुए कांग्रेस नेता ने कहा, 'जो सरकार अपने चुनावों की निष्पक्षता को लेकर आश्वस्त होगी, वह उन पर उठने वाले सवालों का स्वागत करेगी. इसके विपरीत, जो सरकार उनसे बचने के लिए अपनी राजधानी को एक किले में बदल देती है, वह उस शक को और गहरा करती है जिसे वह दबाना चाहती है. सरकार को लाठियां नहीं, जवाब देने चाहिए. उसे दमन नहीं, अभिव्यक्ति देनी चाहिए.'

'सरकार को जनता के सवालों का देना होगा जवाब'

थरूर ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा, 'बैरिकेड्स चुनाव आयोग में लोगों का विश्वास बहाल करने के लिए कुछ नहीं करेंगे. जितनी जल्दी वह जनता के सवालों का जवाब देगा, उतनी ही जल्दी शांति बहाल होगी. लोकतंत्र की ताकत इस बात से मापी जाती है कि वह अपने कामकाज पर सवाल उठाने वालों के साथ कैसा बर्ताव करता है. इस पैमाने पर आज जो हमने देखा है, वह बेहद शर्मनाक और असहनीय है.'

 

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About the Author

Devinder Kumar

Devinder Kumar

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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