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चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद के बीच 42 पूर्व जजों ने एक खुला पत्र जारी किया है. इसमें उन्होंने चुनाव आयोग, न्यायपालिका और दूसरे संवैधानिक संस्थानों को कमजोर करने की कोशिशों पर गंभीर चिंता जताई है. पूर्व जजों ने कहा कि चुनाव में ‘वोट चोरी’ जैसे आरोप अगर बिना ठोस सबूत के लगातार लगाए जाते हैं, तो इससे संवैधानिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है. पत्र में यह भी कहा गया है कि संस्थाओं की आलोचना करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन उन्हें बदनाम करना अलग बात है.
इसी बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है. मंगलवार 6 अक्टूबर को इंडिया गठबंधन के सांसदों ने संसद परिसर से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की. विपक्षी दलों ने पहले ही ऐलान किया था कि उनके सांसद एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां चुनाव आयोग के सामने रखेंगे. विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने की भी बात कही थी. यह प्रदर्शन 30 सितंबर को 19 विपक्षी दलों की बैठक के बाद तय किया गया था. चुनाव आयोग के कार्यालय और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी. पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों की आवाजाही नियंत्रित की.

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी करीब 9 घंटे तक धरने पर बैठे रहे. इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया. प्रदर्शन स्थल पर पुलिस और विपक्षी नेताओं के बीच काफी हंगामा भी हुआ. राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी, चरणजीत सिंह चन्नी, दीपेंद्र हुड्डा और पवन खेड़ा समेत कई नेताओं को भी हिरासत में लिया गया. पुलिस प्रदर्शनकारी नेताओं को धीरे-धीरे मौके से हटाती रही और बैरिकेडिंग भी हटाई जाने लगी.
राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी सांसद चुनाव आयुक्तों से मुलाकात करना चाहते हैं और आयोग को उनसे मिलना ही चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि देश की आवाज को नजरअंदाज किया जा रहा है. राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष सिर्फ चुनाव आयोग के सामने अपनी बात रखना चाहता है. उन्होंने कहा कि सांसदों की मांग है कि आयोग से सीधे पूछा जाए कि आखिर वोट चोरी के आरोपों पर उसकी क्या प्रतिक्रिया है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर चुनाव आयोग उन्हें वहां बैठा नहीं देखना चाहता, तो दिल्ली में कोई दूसरी जगह बता दे. वे वहां जाकर भी बैठने के लिए तैयार हैं.
राहुल गांधी चुनाव आयोग के कार्यालय की तरफ जाने के लिए 6 अक्टूबर को आकाशवाणी भवन के रास्ते से आगे बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया. इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और के.सी. वेणुगोपाल चुनाव आयोग के कार्यालय से करीब 200 मीटर की दूरी पर धरने पर बैठ गए. कांग्रेस के कई कार्यकर्ता भी आकाशवाणी भवन के बाहर जमा हो गए.
राहुल गांधी ने दावा किया कि 300 से ज्यादा विपक्षी सांसद संसद से चुनाव आयोग तक मार्च कर चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते थे. उन्होंने कहा कि ये सांसद करोड़ों भारतीयों का प्रतिनिधित्व करते हैं. राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि जब इतने सांसद चुनाव आयुक्तों से मिलना चाहते हैं, तो उन्हें मिलने से क्यों रोका जा रहा है. उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शन कर रहे नेताओं को रोकने और धमकाने की जरूरत क्यों पड़ रही है.
वहीं, चुनाव आयोग के सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस की ओर से आयोग से किसी बैठक का अनुरोध नहीं मिला है. सूत्रों का कहना है कि किसी अन्य विपक्षी दल की तरफ से भी बैठक के लिए अनुरोध नहीं किया गया. एसआईआर को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है. दूसरी ओर आयोग ने अपने तीन सदस्यीय निकाय में मतभेद की खबरों को खारिज किया है. आयोग का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं.