कॉकपिट, कुल्हाड़ी और कैप्टन: फ्लाईदुबई की फ्लाइट में जिस 'हथियार' से हुआ पायलट मच्छार पर हमला, क्या वो ले सकता है किसी की जान?
पब्लिक ट्रांसपोर्ट (बस-ट्रेन) में आपने खिड़की-दरवाजों के पास हथौड़ा देखा होगा, वहीं लिखा होता है आपात स्थिति में इस्तेमाल करें. फ्लाइट में पॉयलट जिस कॉकपिट में बैठकर जहाज उड़ाता है, वहां भी इमरजेंसी के लिए एक टूल रखा जाता है. UAE के अधिकारियों का आरोप है कि ओमानी को-पायलट ने उसी को हथियार बनाकर हमला किया था.
तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई एक फ्लाइट जो कथित तौर पर आतंकी हमले के चलते क्रैश होने वाली थी, वो भारतीय पायलट की बहादुरी से सुरक्षित लैंड हुई तो वो कुछ घंटों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी खबर बन गई. विमान के कॉकपिट में हुई हिंसा के बाद चारों ओर कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी के चर्चे हैं. कॉन्सपिरेसी थ्योरी की पड़ताल से इतर पीएम मोदी, डोनाल्ड ट्रंप, नेतन्याहू और दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान सब कैप्टन की बहादुरी की दाद दे रहे हैं.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ओमान के को-पायलट ने कॉकपिट में मच्छार पर अटैक किया था जिसके बाद प्लेन तेजी से नीचे जाने लगा था. क्रू के बीचबचाव और मच्छार की मुस्तैदी से 174 लोगों को ले जा रहा प्लेन जब सऊदी अरब के तबुक में सेफ लैंड किया तब लोगों की जान में जान आई.
कॉन्सपिरेसी थ्योरी
कथित तौर पर प्लेन क्रैश कराने की कोशिश करने वाले पायलट ने यूके की एक यूनिवर्सिटी से कोर्स किया था. संयुक्त अरब अमीरात के प्रॉसिक्यूटर जनरल हमद सैफ अल शम्सी ने बताया कि जहाज के को-पायलट की पहचान ओमान के नागरिक हमम अल हम्मामी के तौर पर हुई. जिसने आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए कॉकपिट के अंदर मौजूद 'टूल' से पायलट मच्छार पर वार करके विमान का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की कोशिश की.
कॉकपिट में था 'हथियार'!
इसी हमले का एनलिसिस करते हुए मशहूर एविएशन कमेंटेटर 'फ्लाइंग बीस्ट' ने एनसीबी न्यूज़ को बताया कि हमलावर ने शायद विमान की इमरजेंसी क्रैश कुल्हाड़ी हासिल कर ली थी और उसी से उसने कैप्टन मच्छार के ऊपर अटैक किया था.
इस थ्योरी का समर्थन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी किया. टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक हम्मामी ने कुल्हाड़ी से ही मच्छार पर वार किया था.
हालांकि, फ्लाईदुबई ने कहा है कि घटना के हालात की जांच चल रही है, इसलिए अभी उस हथियार का नाम अधिकारिक रूप से नहीं सामने आ सका है, जिससे ये पुष्टि हुई हो कि आखिर कैप्टन मच्छार को खून से सराबोर करने में किस चीज यानी हथियार का इस्तेमाल हुआ. ऐसे तमाम सवालों का जवाब ढूंढने के लिए जांच-पड़ताल जारी है.
चश्मदीदों के मुताबिक गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, मच्छार कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे. जिससे कुछ यात्री और क्रू मेंबर्स अंदर जाकर हमलावर के ऊपर काबू कर सके.
हीरो पायलट की आपबाती
हमले में गंभीर रूप से घायल पायलट मच्छार ने बताया, 'जब फ्लाइट सामान्य तरीके से टेक ऑफ होकर आगे बढ़ रही थी. को-पायलट प्रार्थना कर रहा था. मुझे कुछ भी असामान्य नहीं लगा. कई पायलट और पैसेंजर्स टेकऑफ के समय प्रार्थना करते हैं. प्रेयर के दौरान मैं एकदम सामने देख रहा था. वह उठा तब भी कुछ असामान्य घटनाक्रम नहीं था. करीब पांच मिनट बाद मेरे सिर के पिछले हिस्से में जोरदार चोट महसूस हुई मैं जमीन पर गिर पड़ा.'
मच्छार ने आगे बताया, 'मैं समझ गया, को-पायलट ने मारा. मैंने रोकने की कोशिश की. सब धुंधला-धुंधला दिख रहा था. बस इतना समझा आ रहा था कि प्लेन नीचे जा रहा है. मैं फर्श पर था. लोग चीख रहे थे. ऐसा नहीं करता तो मेरी मौत तो तय थी. इसलिए मैंने पूरा जोर लगा दिया. जितनी ताकत बची थी उसे लगाकर दरवाजे की ओर भागा और उसे खोल दिया. बाहर खड़े लोग उसे रोकने को तैयार थे. दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने भी विमान का कंट्रोल संभालने में मदद की. प्लेन का लीवर उठाकर कंट्रोल बहाल किया गया और सब बच गए.'
फ्लाइटरडार24 के मुताबिक, इस दौरान विमान करीब एक मिनट में 33 हजार फीट से 17 हजार फीट तक नीचे आ गया था. यानी कुल्हाड़ी की गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन मच्छर ने हमलावर का सामना किया और कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया.
कुल्हाड़ी क्या ले सकती है जान?
विमान में रखी जाने वाली इस खास कुल्हाड़ी को ‘क्रैश एक्स’ कहते हैं. ये बहुत मजबूत होती है. मुश्किल वक्त में विमान के अंदर रास्ता बनाना और इमरजेंसी से निपटने में क्रू की मदद करने के लिए इसे रखने की शुरुआत हुई थी. यूएस एविएशन इंडस्ट्री की रिपोर्ट्स के मुताबिक यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका में 1955 से विमानों में इसे रखने का नियम लागू है.
यानी विमान में जो चीज इमरजेंसी में काम आने के लिए कॉकपिट में रखी जाती है, वही कैप्टन मच्छार पर हमले का हथियार बन गई. आम तौर पर जो छोटी सी हथौड़ी या हथौड़ा जो बस, ट्रेन और मेट्रो की खिड़की-दरवाजों और आग बुझाने वाले सिलेंडरों के पास रखा गया होता है, उसे इस तरह डिजाइन किया जाता है कि शीशा आराम से टूट सके. यानी वो हथौड़ी इतनी मजबूत होती है कि शीशा ही तोड़ दे तो उससे इंसान को गंभीर चोट लग सकती है. सिर पर वार किया जाए तो जान भी जा सकती है.
ठीक इसी तरह से फ्लाइट के कॉकपिट में जो इमरजेंसी टूल रखा जाता है, वो एक हथौड़ी होती है, जिसे आप ऊपर देख पा रहे होंगे. वो भी बहुत मजबूत होती है.
कब पड़ती है जरूरत?
- आग लगने पर कोई पैनल काटकर रेस्क्यू के लिए रास्ता बनाने में इसका इस्तेमाल हो सकता है.
- इसी तरह किसी हिस्से में फंसे लोगों को बाहर निकलने का रास्ता बनाने में इसका यूज होता है.
- इमरजेंसी में मिरर यानी शीशा तोड़ने या कुछ सामाना काटने के लिए भी ये कुल्हाड़ी काम आती है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि उसकी तेज धार से गर्दन कट सकती है. यानी वो कुल्हाड़ी जो आपात स्थिति में जान बचाने के लिए रखी जाती है, वो किसी कट्टरपंथी मानसिकता वाले शख्स या आतंकी के हाथ में पड़ जाए तो उससे लोगों की जान भी जा सकती है.