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टूटी पार्टियां, बिखरा कुनबा: क्या फारूख अब्दुल्ला ने बचा ली पार्टी या NC में फिर बुलंद होगी बगावत की आंधी?

नेशनल कॉन्फ्रेंस में बगावत फिलहाल के लिए शांत होती नजर आ रही है. हालांकि, जानकारी के अनुसार बागी विधायकों ने पार्टी सुप्रीमो फारूख अब्दुल्ला को सिर्फ 14 दिन का समय दिया है. इतने समय में उनकी मांगे पूरी नहीं हुई, तो बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है.

Reported By Khalid Hussain Edited By K. Raj Mishra
Published: Nov 07, 2026, 08:43 AM IST | Updated: Nov 07, 2026, 09:14 AM IST
Image Credit: क्या फारूख अब्दुल्ला ने बचा ली पार्टी? (File Photo- ANI)
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जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अंदर चल रही खींचतान के बीच पार्टी अध्यक्ष फारूख अब्दुल्ला संटकमोचक बनकर सामने आए. उन्होंने शुक्रवार (6 नवंबर) को बागी विधायकों से मुलाकात की. बागी गुट के साथ बैठक के बाद फारूख अब्दुल्ला ने दावा किया है कि पार्टी एकजुट है और मीडिया में किए जा रहे दावे गलत हैं. उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस बिखरा हुआ है, ये खबरें गलत हैं. जो लोग सोचते हैं कि वो इस संगठन को तोड़ सकते हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि यह न तो कभी टूटा है और न ही कभी टूटेगा. बागी विधायकों को शांत करने के लिए फारूख अब्दुल्ला ने कहा कि कुछ कदम जल्द उठाए जाएंगे, जबकि बाकी कदम धीरे-धीरे उठाए जाएंगे.  हम पार्टी और सरकार को मजबूत करेंगे ताकि लोगों की परेशानियों को दूर किया जा सके. उनके इस बयान से पार्टी का घमासान फिलहाल के लिए थमता नजर आ रहा है.

बगावत शांत हुई, या आने वाला है तूफान?

पार्टी सुप्रीमो से मिले भरोसे के बाद बागी विधायकों ने भी अपने रुख में परिवर्तन किया है. बागी नेताओं ने कहा कि वे मंत्रियों का इस्तीफा नहीं चाहते. उनकी मांगें कुछ और हैं. सूत्रों के मुताबिक, बागी नेताओं ने फारूख अब्दुल्ला के सामने मुख्यमंत्री के सलाहकार को हटाने और कैबिनेट में फेरबदल जैसे मुद्दे रखे हैं. इस पर फारूख की ओर से कुछ वक्त मांगा गया है. सूत्रों के अनुसार, बागी विधायक अगले 14 दिनों तक देखेंगे कि अब्दुल्ला परिवार और पार्टी हाईकमान अपने वादों पर कितना अमल करते हैं. इसके बाद ही बागी नेता अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे. अब फारूख अब्दुल्ला के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.

फारूख के फैसले पर टिका सरकार का भविष्य

NC पर मचे घमासान को लेकर सियासी जानकारों का कहना है कि पिछले 5 वर्षों में देश की 3 बड़ी क्षेत्रीय पार्टियों में टूट देखने को मिल चुकी है. अगर फारूख अब्दुल्ला ने सही समय पर सही फैसला नहीं लिया, तो इस लिस्ट में एक और पार्टी का नाम जुड़ सकता है. बता दें कि सत्ताधारी NC गठबंधन के पास 53 सीटें हैं. अगर बागी 25 विधायक इस्तीफा देते हैं, तो गठबंधन की सीटें घटकर 28 रह जाएंगी. 

वहीं, बागियों के इस्तीफे से सदन में प्रभावी विधायकों की कुल संख्या 65 रह जाएगी. इससे बहुमत का आंकड़ा घटकर 33 हो जाएगा. इससे बीजेपी के लिए सत्ता का रास्ता खुल सकता है, क्योंकि NC के बाद बीजेपी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है. 29 विधायकों के साथ वह विपक्ष की भूमिका निभा रही है. इसके साथ 3 निर्दलीय विधायक भी विपक्ष की भूमिका मे हैं. वहीं, सत्तापक्ष के साथ 4 निर्दलीय विधायक हैं. अगर NC में बड़ा उलटफेर होता है, तो निर्दलीय विधायकों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाएगी.

पिछले 5 साल में कौन से दल टूटे

पिछले पांच वर्षों में जिन तीन बड़े क्षेत्रीय दलों में टूट देखने को मिली है, उनमें शिवसेना, एनसीपी और टीएमसी शामिल है. शिवसेना में जून 2022 में टूट हुई थी. उस वक्त एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में ज्यादातर विधायकों को उद्धव ठाकरे से नाता तोड़ते हुए अपनी नई राह चुनी थी. इसी के साथ उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई थी और बीजेपी के साथ मिलकर बनाई गई नई सरकार में एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री बने थे. बाद में चुनाव आयोग से भी एकनाथ शिंदे के गुट को ही मान्यता मिल गई और शिवसेना का चुनावी निशान 'तीर-कमान' उनके पास आ गया. 

इसी तरह से जुलाई 2023 में अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से बगावत कर दी थी. उन्होंने एनसीपी को तोड़कर बीजेपी से हाथ मिला लिया. शरद पवार को दूसरा झटका तब लगा, जब अजीत पवार गुट को ही असली एनसीपी का दर्जा मिला. बीजेपी-शिवसेना-एनसीपी सरकार में अजीत पवार को डिप्टी सीएम बनाया गया था. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद ममता बनर्जी की टीएमसी पार्टी में भी टूट देखने को मिली. टीएमसी विधायकों और सांसदों का एक बड़ा गुट बागी होकर ममता से अलग हो गया था.

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About the Author

सैयद खालिद हुसैन जम्मू-कश्मीर के एक पुरस्कार विजेता पत्रकार हैं, जिन्हें 24 वर्षों से अधिक का अनुभव है. साल 2014 से 'ज़ी न्यूज़' में चीफ  स्पेशल कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम कर रहे हैं.जी मीडिया से पहले हुसैन ने न्यूज़ 18 में नौ साल तक सीनियर कोरेस्पोंडेंट के रूप में काम किया. हुसैन ने अपने करियर की शुरुआत डीडी न्यूज से की थी. हुसैन ने अपनी तालीम श्रीनगर के पब्लिक स्कूल और डीएवी हाई स्कूल से हासिल की. फिर ग्रेजुएशन तक का सफ़र एस.पी हायर सेकेंडरी स्कूल और अमर सिंह कॉलेज से पूरा किया. उसके बाद मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई के लिए दिल्ली के सर अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पूरी की. इसके अलावा हुसैन लेखक फ़िल्म/ वीडियो कैमरा का स्पेशल कोर्स एफटीआई पुणे से कर चुके हैं.  मुंबई और दिल्ली में कई साल काम करने के बाद 2004 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में काम करना शुरू किया. डीडी न्यूज़, डीडी कश्मीर, BAG फ़िल्म्स में फ्रीलांस काम किया. हुसैन पिछले दो दशक से भी ज्यादा समय से जम्मू-कश्मीर से जुड़े कई मुद्दों को बेहतरीन तरीके से कवर कर रहे हैं. लद्दाख से लेकर मुंबई तक हुसैन भारत के कई शहरों से रिपोर्टिंग कर चुके हैं.
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