कोलकाता में सुबह-सुबह ED छापेमारी से मचा हड़कंपः अमृत प्रोजेक्ट लिमिटेड से जुडे़ 8 ठिकानों पर पड़ी रेड
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में आज (सोमवार, 12 अक्टूबर) सुबह-सुबह 8 जगहों पर ईडी की छापेमारी से हड़कंप मच गया है. जानकारी के मुताबिक, अमृत प्रोजेक्ट लिमिटेड में निवेश से जुड़े मामले में इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया है.
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई देखने को मिल रही है. आज (सोमवार, 12 अक्टूबर) सुबह-सुबह 8 जगहों पर ईडी की छापेमारी से हड़कंप मच गया है. जानकारी के मुताबिक, अमृत प्रोजेक्ट लिमिटेड में निवेश से जुड़े मामले में इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया है. इससे पहले सितंबर में भी ED ने इस मामले के सिलसिले में 17 जगहों पर रेड मारी थी. उस वक्त ईडी ने कोलकाता समेत देश के कई राज्यों में इस कंपनी से जुड़े ठिकानों पर छापा मारा था. उस वक्त तलाशी के दौरान ईडी ने 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की चल संपत्तियां जब्त की थीं. छापेमारी में ईडी को जयपुर, इंदौर और दिल्ली में होटलों, स्कूलों, आवासीय परिसरों और जमीन से जुड़े निवेश के दस्तावेज भी मिले थे.
किस मामले में हुई कार्रवाई?
जानकारी के मुताबिक, कंपनी पर करीब 131 करोड़ रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप है. आरोपों के मुताबिक, कंपनी ने आम जनता से निवेश के नाम पर बड़े रिटर्न का झांसा देकर 131 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की है. इस मामले में 01 अगस्त 2025 को शिकायत दर्ज कराई गई थी.
अमृत प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के अलावा अमृत बायो-एनर्जी एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड, अमृत प्रोजेक्ट्स (NE) लिमिटेड, अमृत बाजार परिसेवा लिमिटेड और इनके निदेशकों और प्रमोटरों के खिलाफ भी शिकायत दर्ज कराई गई थी. आरोप है कि बड़े रिटर्न का झांसा देकर आम जनता से करोड़ों रुपये लिए गए और बाद में जमा रकम लौटाई नहीं गई.
GPIL पर भी बड़ी कार्रवाई
अमृत प्रोजेक्ट लिमिटेड से पहले ईडी ने मनी लांड्रिंग मामले में गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (जीपीआईएल) पर कार्रवाई करते हुए उसके 139 बैंक खाते फ्रीज कर दिए. इसके साथ ही कंपनी से जुड़े लोगों के म्यूचुअल फंड और शेयर भी फ्रीज कर दिए गए. इतना ही नहीं, दो मर्सिडीज और एक बीएमडब्ल्यू समेत तीन महंगी गाड़ियां भी जब्त कर ली गईं.
बता दें कि GPIL पश्चिम बंगाल में रजिस्टर्ड कंपनी है. बंगाल के बाहर भी कंपनी ने अपने कॉर्पोरेट ऑफिस बना रखे हैं. इसके अलावा देशभर में कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट हैं, जहां केबल, कंडक्टर, तार और उससे जुड़े उत्पादों के निर्माण होता है. कंपनी पर आरोप है कि उसने केनरा बैंक से फंड-बेस्ड और नॉन-फंड-बेस्ड वर्किंग-कैपिटल सुविधाएं लेने में काफी हेरफेर किया था.
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