Money Laundering Case: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने 'वाटिका लिमिटेड' (वाटिका ग्रुप) के चेयरमैन-को मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) 2002 की धारा 19 के तहत गिरफ्तार कर लिया है.
ED ने मेसर्स वाटिका लिमिटेड, उसके प्रमोटर डायरेक्टर अनिल भल्ला, गौतम भल्ला, गौरव भल्ला और अन्य के खिलाफ PMLA के तहत ECIR दर्ज की थी, जिसमें धोखाधड़ी, रिहायशी प्लॉट न देने और अन्य संबंधित अपराधों का आरोप है.
ED की जांच में खुलासा हुआ कि साल 2010-2012 के बीच 7 खरीदार कंपनियों ने गुरुग्राम के 'वाटिका इंडिया नेक्स्ट' (सेक्टर 84/85) और 'वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2' (सेक्टर 88A) प्रोजेक्ट में रिहायशी प्लॉट के लिए पूरी बिक्री राशि के तौर पर करीब 260 करोड़ रुपये एडवांस में 'मेसर्स वाटिका लिमिटेड' को दिए थे. इसके बाद साल 2014 और 2015 में प्लॉट-वाइज एग्रीमेंट भी किए गए. हालांकि, बाद में प्रोजेक्ट के लेआउट में बदलाव कर दिया गया. पहले से अलॉट किए गए प्लॉटों के नंबर बदल दिए गए और उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया. वहीं, प्रोजेक्ट की जमीन को लगातार दूसरे खरीदारों को अलॉट और बेचा जाता रहा.
'वाटिका इंडिया नेक्स्ट-2' में लगभग 90 करोड़ रुपये में खरीदे गए करीब 1.10 लाख वर्ग गज में से एक भी प्लॉट 14 साल बाद भी डिलीवर नहीं किया गया है, जबकि 'वाटिका इंडिया नेक्स्ट' में भी सिर्फ आंशिक डिलीवरी ही हुई है. इस तरह आज भी लगभग 140.73 करोड़ रुपये मूल्य के प्लॉट अधूरे पड़े हैं. जांच में सामने आया है कि अनिल भल्ला ने जांच के दायरे में आए लेन-देन के सभी अहम फैसलों की खुद निगरानी की है, जबकि गौतम भल्ला ग्रुप के प्रमुख प्रमोटर हैं, जिन्होंने अहम एग्रीमेंट साइन किए, जमीन वाली कंपनियों में डायरेक्टरशिप संभाली और उन पर कंट्रोल रखा. जांच में मिले सबूत बताते हैं कि बड़े फैसले इन दोनों ने मिलकर लिए थे.
यह भी पता चला कि प्रोजेक्ट की जमीन करीब 22 ग्रुप कंपनियों के जरिए रखी गई थी. इन कंपनियों में कोई कर्मचारी नहीं था और न ही उनका कोई अलग बिजनेस था. इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से कॉर्पोरेट गारंटी देने और लैंड बैंक को मैनेज करने के लिए किया जाता था, जिसमें जमीन को वित्तीय संस्थानों के पास गिरवी रखना भी शामिल है. 'मेसर्स वाटिका लिमिटेड' के बैंक खातों की जांच में पता चला कि खरीदारों से लिया गया पैसा सिर्फ उन्हीं प्रोजेक्ट में इस्तेमाल नहीं हुआ जिसके लिए वह लिया गया था. पैसा दूसरी ग्रुप कंपनियों और प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं में ट्रांसफर कर दिया गया, जो इन प्रोजेक्ट का हिस्सा भी नहीं थीं.
एक अन्य मामले में 2024 में स्केलर वेंचर्स ने एक एग्रीमेंट टू सेल और बाय-बैक एग्रीमेंट के तहत 473.18 करोड़ रुपये का भुगतान किया. इसमें से केवल 165 में से 15 प्लॉट ही वापस खरीदे गए. इसके बाद बचे हुए 150 में से 14 प्लॉट को स्केलर की जानकारी या सहमति के बिना तीसरे पक्ष को करीब 13.62 करोड़ रुपये में बेच दिया गया. इस तरह इस केस में अब तक अपराध से हुई कमाई करीब 154.36 करोड़ रुपये आंकी गई है.
इससे पहले ED ने PMLA की धारा 17 के तहत 7 ठिकानों पर तलाशी ली थी. एक आरोपी के घर से मर्सिडीज-बेंज GLC 300, 1.3 किलो से ज्यादा सोने और हीरे के गहने जिनकी कीमत करीब 1.55 करोड़ रुपये है और करीब 3.04 करोड़ रुपये के बैंक खाते और FDR (फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद) बरामद कर फ्रीज किए गए थे. गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को 29 सितंबर 2026 को गुरुग्राम की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 3 अक्टूबर 2026 तक ED की कस्टडी में भेज दिया गया है. मामले में आगे की जांच जारी है. (इनपुट- IANS)