DRDO ने आसमान में उतारा नया 'पहरेदार', महीनों हवा में रहकर देगा पल-पल की खबर; ड्रैगन और पाकिस्तान की बढ़ेगी टेंशन!
भारत अब धरती के 21 किलोमीटर की ऊंचाई से दुश्मन पर नजर रखने की तैयारी कर रहा है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी DRDO ने इसके लिए स्वदेशी हाई-एल्टीट्यूड एयरशिप HAPS का सफल टेस्ट किया है.
क्या आसमान में तैरते बादलों के बीच से भी दुश्मनों की निगरानी की जा सकती है? भारत ने इस सवाल का जवाब अब दे दिया है! रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी DRDO ने ऐसी सफलता हासिल की है, जिसके बाद देश की सर्विलांस सिस्टम में ताकत बढ़ने वाली है. स्पेस और सैटेलाइट सेक्टर में बड़ी छलांग लगाते हुए अपने स्वदेशी हाई-एल्टीट्यूड एयरशिप यानी HAPS का सफल टेस्ट कर लिया है. टेस्ट के दौरान यह प्लेटफॉर्म 21 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंचा. आइए जानते हैं क्या है DRDO का यह नया ब्रह्मास्त्र और कैसे यह देश की सुरक्षा का नया रक्षक बनेगा...
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस टेस्ट के दौरान एयरशिप लगभग 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर 30 मिनट से ज्यादा समय तक रहा. इसके बाद इसे वापस नीचे आने का निर्देश दिया गया. इस पूरी प्रक्रिया के बाद प्लेटफॉर्म को सुरक्षित तरीके से जमीन पर उतार लिया गया.
21 KM की ऊंचाई पर हुआ परीक्षण
यह टेस्ट इसलिए भी खास है क्योंकि HAPS को धरती की सतह से काफी ऊपर, स्ट्रेटोस्फियर यानी वायुमंडल की दूसरी परत में लंबे समय तक काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. इस इलाके में ऐसे प्लेटफॉर्म लंबे समय तक निगरानी, संचार और अलग अलग तरह की जानकारी जुटाने में मददगार हो सकते हैं. टेस्ट के दौरान HAPS ने जमीन पर बने कंट्रोल स्टेशन तक वीडियो और दूसरी जरूरी जानकारी लगातार भेजी गई. इससे यह भी पता चला कि सिस्टम ऊंचाई पर रहते हुए जमीन से संपर्क बनाए रखने में सक्षम है.
कई सिस्टम ने एक साथ किया काम
इस टेस्ट के दौरान एयरशिप में कई तरह के डिवाइस लगाए गए थे. इनमें GPS रिसीवर, कैमरे, इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट और ऊंचाई को कंट्रोल करने के लिए दूसरे सिस्टम भी लगाए गए थे. टेस्ट के दौरान इन सभी सिस्टम के कामकाज पर नजर रखी गई और उनसे मिले डेटा का बाद में रिसर्च किया गया. इस पूरे टेस्ट में DRDO के साथ भारतीय वायु सेना समेत कई एजेंसियों ने सहयोग किया. इनमें CEMILAC, DGCA, एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और दूसरी नागरिक एजेंसियां शामिल थीं.
आगरा की DRDO लैब ने तैयार किया
इस हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म को DRDO की आगरा स्थित एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट यानी ADRDE ने तैयार किया है. यह एक ऐसा हल्का एयरशिप है जिसे स्ट्रेटोस्फियर में लंबे समय तक उड़ान भरने के लिए विकसित किया जा रहा है. इसका इस्तेमाल आगे चलकर निगरानी, संचार और दूसरे मिशन में किया जा सकता है. लंबे समय तक एक ही इलाके के ऊपर मौजूद रहने की क्षमता इसकी अहम खासियत मानी जा रही है.
राजनाथ सिंह ने दी बधाई
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए DRDO, भारतीय वायु सेना, सरकारी कंपनियों और उद्योग से जुड़े सहयोगियों को बधाई दी. उन्होंने इसे देश में आधुनिक एयरोस्पेस तकनीक विकसित करने और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम उपलब्धि बताया.