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दंगों का खौफनाक कनेक्शन: पेरिस में इस्लामिस्ट-कम्युनिस्ट साजिश बेनकाब, यूरोप के 9 देशों में 101 संगठन मचा रहे बवाल

फॉक्स न्यूज डिजिटल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पेरिस और यूरोप के अन्य देशों में जिन संगठनों ने उत्पात मचाया है, वह 9 मुल्कों में फैले हुए हैं और इनकी संख्या 101 के आसपास है.

Written By Rachit Kumar
Published: Oct 22, 2026, 06:58 AM IST | Updated: Oct 22, 2026, 01:27 PM IST
Image Credit: यूरोप में हिंसा के कनेक्शन का खुलासा हुआ है.
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फ्रांस और यूरोप के बाकी देशों में दंगे कौन भड़का रहा है? क्या यह सिर्फ वहां के लोगों का ही मुद्दा है या इसमें घुसपैठियों की एंट्री हो गई है. फॉक्स न्यूज डिजिटल का दावा है कि ये प्रदर्शन एक ही इकोसिस्टम से जुड़े हुए हैं. यानी जो गुट फ्रांस में दंगे भड़का रहे हैं, वह यूरोप के अन्य देशों को भी नहीं बख्श रहे हैं.

जांच में मिले 101 संगठन

सीनियर एडिटर असरा नोमानी की जांच में नौ देशों में फैले 101 संगठनों की पहचान की गई है, जिन्हें 'रेड-ग्रीन प्रोटेस्ट इकोसिस्टम' (यानी इस्लामी और कम्युनिस्ट समूहों का तंत्र) कहा गया है. ये समूह यूरोप में विरोध प्रदर्शनों को ऑर्गनाइज करने या उन्हें बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं.

उनकी रिपोर्ट का टाइटल है ग्लोबल केओस इंक ग्रोज टू 101 ग्रुप्स. इसमें फ्रांस के संगठन 'इंडियन एलायंस पेरिस' (IAP) का जिक्र है. रिपोर्ट के अनुसार,'यह संगठन फ्रांस और यूरोप के बाकी देशों के विरोध-प्रदर्शनों के मैसेज को जोड़ने का काम कर रहा है और मैनहट्टन में पीपल्स फोरम के साथ जुड़ा हुआ है.'

संगठनों को कैसे मिल रही ताकत?

उनकी रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कैसे प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल (PI) नाम की एक इंटरनेशनल पूंजीवाद-विरोधी संगठन ने 16 अक्टूबर को अपनी वेबसाइट पर एक ब्रीफिंग के दौरान फ्रांस, स्पेन और अल्बानिया में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को एक साथ रखा. इसमें सवाल उठाया गया कि क्या ये नए विद्रोह इतनी संगठित ताकत हासिल कर सकते हैं कि उन हालात को बदल सकें, जिनकी वजह से ये पैदा हुए हैं?' रिपोर्ट में लिखा गया,'प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल इन्हीं ताकतों को समर्थन देने और उन्हें आपस में जोड़ने का काम कर रहा है.'

कहां से हो रही फंडिंग?

असरा नोमानी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यूरोप में चल रहे इस विरोध-प्रदर्शन को कम्युनिस्ट-समर्थक संगठनों के एक नेटवर्क से भी बढ़ावा मिल रहा है. इनमें ब्रेकथ्रू न्यूज,कोडपिंक और पार्टी फॉर सोशलिज्म एंड लिबरेशन जैसे संगठन शामिल हैं. इन्हें शंघाई में रहने वाले अमेरिकी मूल के टेक टाइकून नेविल रॉय सिंघम का फंड और समर्थन हासिल है.'

14 अक्टूबर को ब्रेकथ्रू न्यूज़ के साथ एक इंटरव्यू में, नेविल रॉय सिंघम की पत्नी और कोडपिंक की सह-संस्थापक जोडी इवांस ने कहा था, 'मैं चाहती हूं कि लोग फ्रांस, स्पेन की ओर देखें और खुद से पूछें कि हम कहां हैं? हम सड़कों पर क्यों नहीं हैं?' वहीं, डिसइन्फो लैब नाम के एक एक्स हैंडल ने ट्वीट किया कि पेरिस में रहने वाले भारतीय मूल के जॉय बनर्जी, जो इंडियन एलायंस पेरिस के सचिव हैं, वे पहले CGT यूनियन के प्रतिनिधि रह चुके हैं और उनके संबंध फ्रेंच कम्युनिस्ट पार्टी से भी रहे हैं.

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About the Author

रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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