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दिल्ली में SIR: हादसा नहीं, ना ही कोई भूल, 'अवैध कब्जा' बताकर वोटर लिस्ट से बेदखल बेला एस्टेट के 728 मजदूर!

हाल में ही दिल्ली में हुए SIR के बाद एक बड़ा विवाद खड़ा होते नजर आ रहा है. सामने आए वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट के पार्ट नंबर 38, जेजे बेला एस्टेट-विजय में 728 वोटरों के नाम हटा दिए गए. इसके बाद चुनावी अधिकारियों ने सफाई दी है.

दिल्ली में SIR: हादसा नहीं, ना ही कोई भूल, 'अवैध कब्जा' बताकर वोटर लिस्ट से बेदखल बेला एस्टेट के 728 मजदूर!
Image Credit: दिल्ली में एसआईआर के बाद ड्राफ्ट लिस्ट पर बवाल. (फोटो- एआई)

Delhi SIR: दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट में बड़ी संख्या में लोगों के नाम कटने की बात सामने आई है, जिससे विवाद शुरू हो गया. रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली के एक मतदान केंद्र पर 729 मतदाताओं के नाम दर्ज थे, जिनमें से 728 नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर कर दिए. बूथ पर केवल 1 मतदाता का नाम बच गया.

दरअसल, पूरा मामला पार्ट नंबर 38, जेजे बेला एस्टेट-विजय से संबंधित है. रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि यहां के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से इसलिए हटाए गए, क्योंकि क्योंकि जिन घरों में वे पहले रहते थे, वे घर अब वहां मौजूद नहीं है. ऐसे में एसआईआर की पूरी प्रक्रिया जांच के घेरे में आ गई है.  

समझिए क्या है पूरा मामला

वोटर लिस्ट से इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम कटने के बाद विवाद बढ़ गया. मामला सामने आने के बाद चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों की ओर से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण दिया गया. अधिकारियों का कहना है कि मतादाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया मकानों की मौजूदा स्थिति और मतदाताओं के उपलब्ध पते से जुड़ी जानकारी के आधार पर की गई है.

अधिकारियों ने कहा कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को सही करना और उसमें मौजूद गलत और अपात्र लोगों का नाम हटाना है. बता दें कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कर्मचारी घर-घर जाकर मतदाताओं और उनके पते से जुड़ी जानकारी को जांचते हैं.

कहां फंस रहा पेच?

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, यमुना के किनारे पर और पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील जोन O में बसे इस इलाके में एसआईआर से पहले 729 वोटर रजिस्टर्ड थे. हालांकि,  ड्राफ्ट में केवल एक नाम बचा, ड्राफ्ट लिस्ट के सामने आने के बाद बवाल मच गया.  मामले को बढ़ता देख चुनाव अधिकारियों के बयान सामने आए हैं, जिसमें बताया गया कि रिपोर्टों के बाद पुराने पोलिंग स्टेशन नंबर 33 की वोटर लिस्ट की जांच की गई.

बयान में बताया गया है कि अधिकांश वोटरों के पते में सिर्फ खेती लिखा हुआ था, जबकि कुछ ही वोटरों के लिए घर के नंबर दर्ज किए गए थे. अधिकारियों ने बताया कि इलाके के काफी लोग यमुना किनारे के इलाके में खेती-बाड़ी का काम करते थे. खेती-बाड़ी की वे गतिविधियां, जिन्हें ERO ऑफिस ने गैर-कानूनी खेती बताया, 2021 में बंद कर दी गई थीं, जबकि इलाके में बने घरों को 2022-23 में तोड़ दिया गया था. ऐसे में पुराने चुनावी रिकॉर्ड तैयार होने के बाद से इलाके की भौतिक और आवासीय स्थिति में काफी बदलाव आया है.

मतदाताओं को आपत्ति दर्ज करने का मिलता है मौका

इस विशेष पुनरीक्षण के दौरान जो ड्राफ्ट सूची तैयार की गई है, उसमें बाद में अपना नाम जांचने और आवश्यकता पड़ने पर आपत्तियां दर्ज कराने का मौका भी दिया जाता है. इस स्थिति में जिन भी मतदाताओं के नाम सूची से हटे हैं, उनके लिए प्रक्रिया के तहत अपनी स्थिति स्पष्ट करने का मौका रहता है. 
 

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About the Author

abhinav tripathi

abhinav tripathi

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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